संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : मेनका गाँधी को इस जुर्म की सजा न मिली तो फिर यह लोकतंत्र बोगस ही है
24-Jun-2021 5:26 PM (3978)
‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : मेनका गाँधी को इस जुर्म की सजा न मिली तो फिर यह लोकतंत्र बोगस ही है

देशभर के पशु चिकित्सकों ने कल भाजपा सांसद मेनका गांधी के खिलाफ आंदोलन किया। मेनका गांधी लोगों से बदजुबानी के लिए बदनाम हैं और टेलीफोन पर पशु चिकित्सकों को गालियां देने के बहुत से काम उन्होंने किए हैं। यह पहला मौका नहीं है जब उनकी बदजुबानी इस तरह से सुबूतों सहित सामने आई है, लेकिन यह पहला मौका जरूर है कि 13 मिनट की एक टेलीफोन कॉल में वे गंदी से गंदी गालियां देते नजर आईं, जातिसूचक गालियां देते नजर आईं, गांव के लोगों को गालियां देते नजर आईं, और एक पढ़े-लिखे पशु चिकित्सक को यह कर कह कर भी गालियां दे रही हैं कि उनका बाप कोई माली या ऐसा कोई रहा होगा। उन्होंने तरह-तरह की धमकियां दी, कलेक्टर की धमकी दी, पुलिस की धमकी दी, यह धमकाया कि जिसके कुत्ते का इलाज किया है, जाकर उसी दिन उसके मालिकों को 70 हजार रुपये का चेक देकर आए वरना वे देख लेंगी। हिंदुस्तान में किसी महिला के मुंह से जैसी गालियां सुनने की उम्मीद भी कोई नहीं करते हैं, वैसी ढेर सारी गालियां उन्होंने इस पशु चिकित्सक को बुरी तरह से धमकाते हुए दीं। उसे बार-बार हरामजादा कहा, और न लिखने लायक गालियां देती ही चली गईं। जिन भरोसेमंद वेबसाइटों पर मेनका गांधी का यह ऑडियो क्लिप सुनाया जा रहा है उन्हें दर्जनों बार मेनका गांधी की गालियों को मौन करना पड़ रहा है क्योंकि वह लोगों को सुनाने लायक नहीं हैं। कौन यह उम्मीद कर सकता है कि भारतीय संस्कृति की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी की कई बार की सांसद, जो कि पहले केंद्रीय मंत्री भी रह चुकी हैं, और जिनका बेटा भी भाजपा का सांसद रह चुका है, वह इस तरह की गंदी गालियां देकर एक डॉक्टर को धमकाएगी? यह हक्का-बक्का करने वाली हरकत है, और इससे मेनका गांधी के बारे में पहले से प्रचलित यह चर्चा सही साबित होती है कि वह अधिकारियों को डॉक्टरों को और पशुओं से जुड़े  हुए किसी भी तरह के लोगों को इसी तरह धमकाती हैं, इसी तरह गालियां देती हैं।

मेनका गांधी जब केंद्रीय मंत्री थी तब भी वह देश भर की राज्य सरकारों में काम करने वाले अधिकारियों को फोन पर धमकाने का काम करती थीं, और कहीं भी किसी वन्य पशु के साथ किसी ज्यादती होने की आशंका उनको होती थी, तो वे बदजुबानी पर उतर आती थी। अभी कुछ वक्त पहले छत्तीसगढ़ में जब लगातार हाथी मर रहे थे, उस वक्त भी मेनका गांधी ने रात-दिन फोन कर-करके छत्तीसगढ़ सरकार के बड़े दिग्गज अफसरों को खूब धमकाया था, जबकि न तो वह केंद्र सरकार में किसी मंत्री के पद पर थीं, और ना ही राज्य सरकार के अधिकारी उनके प्रति किसी भी बात के लिए जवाबदेह थे। लेकिन उनका वैसा बर्ताव शुरू से चले आ रहा है और उनके बारे में यह बात प्रचलित है कि अगर मेनका गांधी से अच्छा बर्ताव पाना है तो आपका पशु होना जरूरी है आपके इंसान होने से आपको अच्छा बर्ताव उनसे मिल जाए ऐसी कोई गारंटी नहीं हो सकती। ऐसी चर्चा उनके बारे में हमेशा से चलती रही है और अब जो ताजा ऑडियो सामने आया है, जिसे लेकर देशभर के पशु चिकित्सक आंदोलन कर रहे हैं वह मेनका गांधी के ऊपर कम से कम आधा दर्जन अलग-अलग किस्म के जुर्म दर्ज करने के लिए काफी है। यह अलग बात है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है और वहां पर पुलिस की इतनी मजाल नहीं हो सकती कि भाजपा के एक सांसद के खिलाफ वह कोई कार्यवाही करे, लेकिन हमारा यह मानना है कि ना सिर्फ उत्तर प्रदेश की इस सांसद के खिलाफ बल्कि ऐसी बदजुबानी करने वाले, ऐसी गुंडागर्दी करने वाले, जितने भी किस्म के दूसरे नेता हो सकते हैं, उन सबके खिलाफ ऐसे सबूतों को लेकर पुलिस में रिपोर्ट होनी चाहिए, अदालत में केस होना चाहिए, और ऐसे कुछ लोगों को कैद होनी चाहिए जिससे कि बाकी लोगों को ऐसी गंदी जुबान इस्तेमाल करने, ऐसी गुंडागर्दी करने, ऐसी धमकियां देने के खतरे समझ में आएं। 

इसी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के ताकतवर मंत्री रहे हुए आजम खान ने जब बलात्कार की शिकार एक बच्ची के बारे में तरह-तरह की गंदी बातें कहीं और उसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया तो उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान को बुलाकर कटघरे में खड़ा किया खूब जमकर फटकार लगाई और आजम खान से उनका बयान वापस करवाकर उनसे माफी मंगवाई थी। हमारा यह मानना है कि डॉक्टरों का जो संगठन आज मेनका गांधी के खिलाफ आंदोलन कर रहा है, कल देशभर में उनके खिलाफ प्रदर्शन किए गए हैं, ऐसे डॉक्टरों को अदालत जाना चाहिए और मेनका गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करनी चाहिए क्योंकि उनके पास एक टेलीफोन पर यह पूरा सुबूत है और टेलीफोन कॉल रिकॉर्ड से भी यह निकल सकता है कि मेनका गांधी ने कब-कब फोन करके इस डॉक्टर को धमकाया है। आखिर में एक बात और, मेनका गाँधी का बर्ताव उनके गुजर चुके पति संजय गाँधी की इमर्जेन्सी की ज्यादतियों की याद दिलाता है। मेनका उस वक्त संजय के साथ थीं, और ये तेवर बताते हैं कि उस वक्त की बददिमागी भाजपा में आने के बाद भी उनके मिजाज में जारी है।(क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)

अन्य पोस्ट

Comments