सामान्य ज्ञान

राज्य परिषद

Posted Date : 16-May-2018




प्रथम विश्व युद्घ (1914-18 ई.) की अवधि में भारत में स्व-शासन की भावना की वृद्घि को देखते हुए ब्रिटिश सरकार को अपनी नीति में कुछ परिवर्तन करना पड़ा। ब्रिटेन के तत्कालीन भारत सचिव मांटेग्यू और वाइसराय चेम्सफोर्ड के सुझाव पर ब्रिटिश पार्लियामेंट ने 1919 ई. में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट पास किया। इसके अनुसार भारत में एक व्यवस्थापिका सभा के स्थान पर दो सदनों वाले विधानमंडल की स्थापना की गई। इसका ऊपर का सदन राज्य परिषद (कौंसिल ऑफ स्टेट) कहलाया। इसके 260 सदस्यों में से 110 सदस्य मनोनीत होते थे और शेष का भी सांप्रदायिक आधार पर सीमित मताधिकार द्वारा चुनाव किया जाता था। कभी भंग न होने वाली इस संस्था का उद्देश्य केंद्रीय विधानसभा के कामों में रोड़े अटकाना था। अंग्रेजों का यह उद्देश्य काफी हद तक पूरा हुआ। स्वतंत्रता के बाद इसके स्थान पर राज्यसभा का गठन किया गया। इसके उद्देश्य पुरानी राज्य परिषद से सर्वथा भिन्न हैं।

रात में विचरण करने वाला अनोखा पक्षी
 ज्यादा पक्षियों को दिन में ही विचरण करते देखा जाता है, लेकिन जड्र्स कर्सर एक ऐसा पक्षी है, जो रात में सक्रिय रहता है। यह मूल रूप से भारत में ही मिलता है। इसके करीबी जरूर अफ्रीका में पाए जाते हैं।  भारत में यह अंाध्रप्रदेश की  गोदावरी घाटी में- तेलोर, कुडुप्पास सिरोंका, भद्राचलम और अतलपुर के आस-पास देखा जाता है।  
ब्रिटिश भारतीय फौज के अधिकारी  डॉ. टी. सी. जर्डन ने सबसे पहले इस पक्षी की जानकारी दी थी।  इसी के सम्मान में इसका नाम जड्र्स कर्सर रखा गया। बाद में ब्लैंडफोर्ड ने भारत में इसे 1867 और 1871 में देखा। उसके बाद यह लंबे समय तक गुमनामी के अंधेरों में रहा।  1900 में इसे फिर एक बार देखा गया।  दो पक्षी ïैवैज्ञानिकों हिस्लर और किन्नियर ने 1931 में इसे एक बार फिर ढंूढ निकाला।  1932 में जाने-माने भारतीय पक्षी विज्ञानी डॉ. सलीम अली ने इसकी बहुत खोज की, लेकिन उन्हें यह पक्षी नहीं मिला।  
वर्ष 1985 में भारत सरकार और अमरीका की सरकार ने एक संयुक्त प्रोजेक्ट बनाया और बांबे नेचुरल सोसायटी के डॉ. भारत भूषण ने आंध्रप्रदेश की पैन्नार और गोदावरी घाटियों और लंकामय पहाडिय़ों में 1986 में इस पक्षी को खोज निकाला।  बाद में अंाध्रप्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र को अभयारण्य में बदल दिया। आज इस पक्षी के संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं।  इस पक्षी का ऊपरी भाग गुलाबी-भूरा होता है। सिर और गर्दन के पीछे का भाग भूरा और ठोड़ी तथा कंठ सफेद होता है। इसके गले में दो पट्टिïयांं होती हैं। यह क्षिप्रचला नाम पक्षी का रिश्तेदार है। 

 




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