विशेष रिपोर्ट

जहां राहुल की सभा वहां की कांग्रेस विधायक का नाम नहीं, पार्टी में रेणु जोगी के दिन पूरे? शैलेष पांडेय होंगे मजबूत?

Posted Date : 16-May-2018



राजेश अग्रवाल
बिलासपुर, 16 मई (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव का अभियान शुरू करने आ रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दो दिन के बिलासपुर दौरे से कई समीकरण बनने वाले है। कोटमी के मंच पर गोंडवाना गणतंत्र परिषद् को लाने में सफलता मिलने से कांग्रेसी उत्साहित हैं। इस सभा के बाद कोटा विधायक डॉ. रेणु जोगी का कांग्रेस में भविष्य क्या है, यह भी स्पष्ट हो जाएगा। कांग्रेस में किसकी टिकट पक्की होने वाली है इसका अंदाजा भी इस प्रवास से लगेगा, क्योंकि सबको कुछ न कुछ जिम्मेदारी दे दी गई है। 
जिले के कोटमी में राहुल गांधी गुरुवार दोपहर दो बजे आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करेंगे। यह दौरा दिलचस्प इसलिए बन गया है क्योंकि कांग्रेस ने राहुल गांधी को छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी के संस्थापक अजीत जोगी ने खुली चुनौती देते हुए उसी दिन, उसी समय इसी इलाके में समानान्तर सम्मेलन रखा है। कांग्रेस का दावा है कि पेन्ड्रा, मरवाही में जोगी को सब सुनते रहे हैं इसलिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सुनने के लिए लोग उत्साहित हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शैलेष पांडेय के अनुसार न केवल जिले के लोगों में बल्कि नजदीकी दूसरे जिलों से भी लोग राहुल गांधी को सुनने आ रहे हैं। राहुल गांधी की सभा के सामने जोगी की सभा की कोई तुलना ही नहीं है, वह फीकी रहेगी। इन दिनों मौसम खराब चल रहा है, जबकि जोगी की सभा में श्रोताओं के लिए आंधी-पानी से बचाव का इंतजाम भी नहीं किया गया है। हमारा पूरा ध्यान राहुल गांधी और कांग्रेस की सफल सभा कराने की ओर है। किसने और क्या और जवाबी सभा रखी है, इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। 
दिलचस्प यह है कि कोटा की विधायक और अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी को राहुल गांधी के पूरे दौरे से अलग-थलग रखा गया है। यहां सभा कराने का प्रभार शैलेष पांडेय  को सौंपा गया है। शैलेश पांडेय कोटा या बिलासपुर से चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं, उन्हें इसी क्षेत्र में सभा कराने और यहां भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी है। पांडेय का दावा है कि सभी कार्यकर्ताओं के परिश्रम से राहुल गांधी की सभा ऐतिहासिक होने वाली है।
यह तय है कि यदि यह सभा सफल रही तो पांडेय के लिए टिकट की राह कुछ आसान हो जाएगी। कांग्रेस के दूसरे प्रवक्ता अभय नारायण राय का कहना है कि राहुल की दोनों सभाओं में कांग्रेस के वर्तमान व पूर्व विधायकों के लिए कुर्सियां रखी गई हैं। जहां तक डॉ. रेणु जोगी का सवाल है उन्होंने राहुल का दौरा तय होने के बाद पार्टी से कोई सम्पर्क नहीं किया है न ही पार्टी ने ही उनको कोई जिम्मेदारी सौंपी है।
 इस मामले में डॉ. रेणु जोगी से कई बार सम्पर्क का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन बंद था। 
डॉ. रेणु जोगी को पूरी तैयारी से अलग रखा जाना इस बात का साफ संकेत है कि उनकी अगली टिकट कांग्रेस से पक्की नहीं है।  हालांकि यहां से संदीप शुक्ला, अरुण सिंह चौहान जैसे पुराने कार्यकर्ता भी टिकट के लिए जूझ रहे हैं। इन दोनों को ही डॉ. रेणु जोगी का करीबी माना जाता है। 
कांग्रेसियों में इस बात को लेकर खासा उत्साह है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम राहुल गांधी के साथ मंच साझा कर रहे हैं। कटघोरा, तानाखार, मनेन्द्रगढ़, शहडोल आदि इलाके कोटमी से बहुत दूर नहीं है और इन क्षेत्रों में मरकाम का काफी असर है। वे एक बार निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं। बाद में भाजपा में शामिल हुए फिर कांग्रेस के करीब आए और तानाखार से फिर निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस समय वहां कांग्रेस से रामदयाल उइके लगातार चुने जा रहे हैं। 
मरकाम को कांग्रेस के साथ जोडऩे के लिए पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. चरण दास महन्त  ने काफी कोशिश की। सभा में मरकाम के उपस्थित रहने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि वे कांग्रेस में शामिल होंगे या कांग्रेस के समर्थन से चुनाव लड़ेंगे, पर उनकी राहुल की सभा में मौजूदगी जोगी खेमे के लिए चिंता का विषय जरूर बन गया है। संभावना दिख रही है कि मरवाही या तानाखार में मरकाम को कांग्रेस के समर्थन से उतारा जा सकता है। 
कांग्रेस की टिकट की कतार में लगे अन्य दावेदारों को भी कोटमी और बहतराई में अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। कोटमी सम्मेलन के लिए डॉ. महन्त, राष्ट्रीय सचिव अरुण उरांव, विधायक रामदयाल उइके कई दिनों से डटे हुए हैं। बहतराई, बिलासपुर के कार्यकर्ता सम्मेलन की जिम्मेदारी प्रभारी कांग्रेस सचिव चंदन यादव, प्रदेश महामंत्री अटल श्रीवास्तव, शेख गफ्फार, अशोक अग्रवाल आदि संभाल रहे हैं। 




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