सेहत-फिटनेस

क्या बढ़िया सेहत के लिए हमें वाकई रोज 10 हजार कदम चलना चाहिए?
12-Jul-2021 2:46 PM (90)
क्या बढ़िया सेहत के लिए हमें वाकई रोज 10 हजार कदम चलना चाहिए?

खुद को फिट रखने की चाह में लोग बहुत-कुछ कर रहे हैं. इसी में एक तकनीक है, रोजाना 10 हजार कदम पैदल चलना. अक्सर इसे बेहद फायदेमंद बताया जाता रहा. लेकिन क्या वाकई लोग रोज इतने कदम चलते हैं? नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों, जैसे अमेरिका और कनाडा में ज्यादातर वयस्क कोशिश के बाद भी रोज 5 हजार से कम स्टेप्स तय करते हैं. तो क्या फिट रहने के लिए हर दिन 10 हजार कदम चलना जरूरी है या इसके बगैर भी स्वस्थ रहा जा सकता है?

फिटनेस ट्रैक करने वाले उपकरण अक्सर बताते हैं कि एक वयस्क को हर दिन 10 हजार कदम चलना चाहिए. बहुत से लोग इसपर भरोसा करते हैं और चलने की कोशिश भी करते हैं. कुछ कामयाब होते हैं तो ज्यादातर ये टारगेट पूरा कर ही नहीं पाते. अगर आप भी इनमें से हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं. दरअसल 10 हजार कदम का विज्ञान से कम और संयोग से ज्यादा वास्ता है.

हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर डॉ एई मिन ली के मुताबिक, 10 हजार कदम का कंसेप्ट जापान में साठ के दशक में शुरू हुआ था. 1964 में टोक्यो में ओलंपिक के दौरान जापान में सेहत को लेकर लोग काफी कुछ करने लगे थे. तब एक घड़ी निर्माता कंपनी ने ऐसा पेडोमीटर बनाया, जिसपर एक पुरुष चलना हुआ दिखता था, साथ में जापानी भाषा में लिखा था- 10 हजार कदम. ये वॉक का एक टारगेट था, जो यूं ही दिया गया था लेकिन कुछ सालों के भीतर ये दुनियाभर में फैल गया.

फिटनेट के लिए आने वाले ट्रैकर बगैर किसी शोध के डालने लगे कि रोज 10 हजार कदम चलना सेहत के लिए फायदेमंद है. हालांकि विज्ञान कहता है कि सेहतमंद रहने के लिए रोज इतने कदम चलने की जरूरत नहीं. इंडियन एक्सप्रेस में इस बारे में विस्तार से बताया गया है.

एक स्टडी पिछले साल ही की गई. इसमें अलग-अलग देशों से लगभग 5 हजार लोगों ने हिस्सा लिया. युवा से अधेड़ उम्र के इन लोगों के बारे में दिखा कि जो लोग रोज 8 हजार कदम चल रहे थे, दिल के दौरे या इसी तरह की बीमारी से उनकी मौत की आशंका, उनके बराबर थी, जो काफी कम चलते थे. इसका मतलब ये नहीं कि 10 हजार या ज्यादा-कम चलने से कोई नुकसान है, बल्कि बात ये है कि ज्यादा चलने से आप ज्यादा स्वस्थ रहेंगे, ये बात गैर-वैज्ञानिक है.

देखा जाए तो कम ही लोग रोज 10 हजार कदम चल पाते हैं. कनाडा और अमेरिका में सेहत के लिए काफी सचेत लोगों पर हुई एक स्टडी में पाया गया कि अगर इतने कदमों का टारगेट लंबे समय के लिए दिया जाए तो लोग चलना ही बंद कर देते हैं. खुद को टारगेट देकर फिर उसे पूरा न कर पाने से तनाव बढ़ता है, जिससे कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. यही कारण है कि वैज्ञानिक अब 10 हजार कदमों की बजाए छोटे टारगेट पर काम करने को कह रहे हैं. इसके साथ ही व्यायाम और संतुलित भोजन काफी हद तक लाइफस्टाइल के कारण होने वाली बीमारियों से दूर रखता है.

स्टडी के दौरान पाया गया कि अमेरिका और कनाडा जैसे विकसित देशों में लोग ज्यादा आलसी हैं. ये बात पहले भी निकल चुकी है. दो साल पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें देशों की रैंकिंग जारी कर बताया गया कि उनके नागरिक शारीरिक रूप से कितने सक्रिय हैं. इसमें युगांडा के नागरिक सबसे ज्यादा मेहनती और एक्टिव माने गए. इसकी केवल 5.5 प्रतिशत आबादी पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं है.

168 देशों की सूची में अमेरिका समेत कई संपन्न देश काफी पीछे रहे. उनके यहां आधी से ज्यादा वयस्क आबादी शारीरिक व्यायाम नहीं करती है. भारत में भी हाल खास बेहतर नहीं. हम इसकी रैंकिंग में 117 वें स्थान पर रहे. रिसर्च के अनुसार हमारी आबादी का 34 प्रतिशत पर्याप्त सक्रिय नहीं है.

इससे पहले अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी एक रिसर्च ने भी भारत को भी दुनिया के सबसे आलसी देशों की सूची में डाला था. भारत इन देशों में 39वीं रैंकिंग पर था. हमारे यहां लोग औसतन एक दिन में 4297 कदम चलते हैं. हर दिन सबसे ज्यादा चलने में हांगकांग के लोग हैं. हांगकांग में लोग रोज औसतन 6880 कदम चलते हैं. वहीं इंडोनेशिया के लोग महज 3513 कदम ही चलने के साथ सबसे कम एक्टिव देशों में आए. (news18.com)

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