विशेष रिपोर्ट

फर्जी एफडीआर से करोड़ों का ठेका, विभाग ने नहीं कराया था सत्यापन

Posted Date : 05-Jun-2018



अफसर शक के दायरे में
हरजीत सिंह पप्पू
जगदलपुर, 5 जून (छत्तीसगढ़)। सुकमा के एक ठेकेदार ने फर्जी एफडीआर बना कर सड़क बनाने का करोड़ों का ठेका ले लिया। गौर करने वाली बात है कि संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा ठेकेदार द्वारा जमा किया गया एफडीआर का सत्यापन तक कराना जरूरी नहीं समझा गया। वहीं मामले में सुकमा जिले में पदस्थ पीएमजीएसवाय के अधिकारियों, स्टेट बैंक और ठेकेदार की सांठगांठ भी अब परत दर परत उजागर हो रही है। भारतीय स्टेट बैंक जगदलपुर की एसएमई शाखा ने शासन को भेजे ई-मेल में स्वीकार किया है कि सुकमा के ठेकेदार रामशरण सिंह भदौरिया की फर्म द्वारा पीएमजीएसवाय के ठेके के लिए जमा किये गये वे तीनों एफडीआर फर्जी हैं, जिनकी शिकायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी छत्तीसगढ़ सड़क विकास अभिकरण से की गई थी। 
मिली जानकारी के अनुसार सभी एफडीआर शॉर्टटर्म के लिए जमा किये गये थे, जिनके बदले ठेकेदार को निर्माण कार्यों के ठेके प्रदान किये गये थे। वर्तमान में इस ठेकेदार के समूचे बस्तर में निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिनकी लागत 500 से 700 करोड़ के बीच बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यदि इस ठेकेदार द्वारा अब तक जमा करवाये गये सभी एफडीआर की जांच की गई तो फिर एक बार बहुत बड़ा घोटाला उजागर होगा। उक्त ठेकेदार के पास 3.5 करोड़ की बैंक गारंटी होना बताया जा रहा है। जबकि इसके द्वारा 100 से भी ज्यादा की बैंक गारंटी विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए जमा की गई है। यदि इन सभी की जांच हुई तो फिर एक बार एक नया बैंक गारंटी घोटाला लोगों के सामने होगा।
बीती 23 तारीख को सुकमा के तीन ठेकेदार शैलेन्द्र सिंह, विनोद सिंह और जाकिर हुसैन ने सीईओ छग ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण से शिकायत की थी कि सुकमा के मेसर्स रामशरण सिंह ठेकेदार द्वारा एनआईटी-300 के निविदा क्रमांक 33748, 33750, 33751 में लगाये गये एफडीआर फर्जी प्रतीत होते हैं कृपया इसकी जांच करायें। शिकायत के दूसरे दिन सीईओ राकेश चर्तुवेदी ने शाखा प्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक एसएमई शाखा जगदलपुर को पत्र लिखा और दिनांक 9/5/2018 को बने रुपये 4056000,2513000 एवं 4861000 के 3 एफडीआर का सत्यापन करने कहा। दूसरे दिन स्टेट बैंक आफ इंडिया के चीफ मैनेजर ने यह खुलासा कर दिया कि तीनों एफडीआर उनकी शाखा द्वारा जारी नहीं किये गये हैं। 
मेसर्स रामशरण सिंह के सहसंचालक अभिषेक सिंह भदौरिया ने बताया कि उनकी फर्म के कर्मचारी की गलती से ऐसा हुआ है, उन्होंने बताया कि उन्हें संबंधित विभाग से कोई नोटिस नहीं मिला 
है और न ही कोई कार्रवाई की गई है। 
छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि ठेकेदार का का टेंडर निरस्त कर दिया गया है तथा उसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है। एफडीआर के सत्यापन के सवाल पर उन्होंने कहा कि सैकड़ों की तादाद में एफडीआर आते हैं यह संभव नहीं की सभी का सत्यापन कराया जाए और ऐसा कोई नियम भी नहीं है शिकायत होने पर वेरीफाई किया जाता है। ठेकेदार पर विभाग द्वारा एफआईआर कराया जाएगा के प्रश्र पर कहा कि विभागीय कार्रवाई हमारी ओर से की जा रही है। उन्होंने कहा कि उक्त ठेकेदार द्वारा सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा क्षेत्र में इसके पहले भी कई निर्माण कार्य समय पर पूरे किए हैं पहले उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं है। 

इधर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कवासी लखमा ने भी इस मामले में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। खबर है कि रामशरण सिंह समेत उनकी फर्म के अन्य 5 डायरेक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया जा रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चौगुनी दरों पर काम कर रहे ठेकेदार, जिला निर्माण समितियों की कुछ चुनिंदा ठेकेदारों पर मेहरबानी, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर दी जा रही भारी छूट और ठेकेदारों द्वारा उपकृत होने वाले अफसरों के तमाम अनैतिक रिश्तों की वजह से अब जो मामला पैदा हुआ है, उसने सभी को हैरान कर दिया है। 
  इस पूरे मामले में पीएमजीएसवाय के एक कार्यपालन अभियंता स्तर के अधिकारी और एक सब इंजीनियर तथा स्टेट बैंक जगदलपुर की एसएमई शाखा में पदस्थ एक महिला अधिकारी की भी संलिप्ता बताई जा रही है। पीएमजीएसवाय द्वारा कभी भी एफडीआर या बैंक गारंटी का विधिवत सत्यापन नहीं कराया गया। सत्यापन के लिए भी ठेकेदार को माध्यम बनाकर उसी के हाथ से एफडीआर सत्यापित करने भेजा जाता रहा। ठेकेदार द्वारा बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर कूटरचित सत्यापन करवाकर काम लिया जाता रहा। इसी तरह बैंक गारंटी भी फर्जी तरीके से बनाकर जमा किये जाने की बात सामने आ रही है। इसी तरह एफडीआर में दो-दो शून्य बढ़ाकर हजार को लाख बनाया गया है। उसी तरह की कूटरचना बैंक गारंटी में भी की गई है ऐसा सूत्रों का कहना है।  




Related Post

Comments