विचार / लेख

ईश्वर का दिया नायाब तोहफा है जिंदगी
09-Sep-2021 12:32 PM (192)
ईश्वर का दिया नायाब तोहफा है जिंदगी

-प्रीति चांडक

 

हर साल 10 सितंबर विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसे मनाने का उद्देश्य लोगों को आत्महत्या करने से रोकना एवं  इसके  प्रति जागरूकता फैलाना है।

आत्महत्या क्या है? अपनी मर्जी से मरना  या खुद को खत्म करना आत्महत्या हैं।

सोचने वाली बात है कि हर व्यक्ति दीर्घायु जीवन जीना चाहता है, पर ऐसी क्या मजबूरी होती है कि  वह समय से पहले ही मौत को गले लगा लेता है?  

दोस्तों जिन व्यक्ति में तनावया  निराशा ज्यादा होता है और जब यह निराशाअवसाद में बदल कर चरम सीमा में पहुंच जाती है तब व्यक्ति को चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा नजर आने लगता है और उसे जीने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती है। वह इतना मजबूर हो जाता है कि उसे अपनी समस्या से निपटने के लिए जीने से बेहतर मरना आसान लगता है। अफसोस होता है कि काश हमने उनके लिए कुछ किया होता। हमने उनसे उनकी समस्या पूछी होती  या फिर बस इतना ही कहा होता कि ‘‘मैं तुम्हारे साथ हूं’’ तो शायद हालात कुछ और होते। 

जैसा कि इस वर्ष  का थीम है 'creating hope through action' कार्यवाही (कर्म) के माध्यम से आशा जगाना-दोस्तों अब वक्त है कि किस प्रकार हम कर्म से और कार्यवाही से ऐसे लोगों में  जीने की उम्मीद जगा सके। हमारे कार्य चाहे कितने भी छोटे हो, संघर्ष करने वालों को आशा प्रदान कर सकते हैं ।कार्यों के माध्यम से आप किसी को उनके सबसे कठिन  क्षणों में समाज के सदस्य के रूप में, माता-पिता के रूप में, जीवनसाथी के रूप में, या फिर मित्र और सहकर्मी के रूप में मदद कर सकते हैं।  शोध कहते हैं हर 10 में से  8  व्यक्ति आत्महत्या  से पहले कुछ  संकेत देते हैं।

1. आत्मघाती विचार आ रहे व्यक्तियों में निम्न लक्षण- - खुद को मारने के बारे में सोचना, अपने आप को बहुत समझना, खुद को अकेला महसूस करना, किसी प्रकार के जाल में फंसा महसूस करना, अचानक नशा करना या ज्यादा नशे का सेवन करना, घर परिवार से दूर कहीं चले जाने की बात कहना,  आक्रमक व्यवहार,  खुद को असहाय समझना,  किसी भी क्रियाकलाप में शामिल नहीं होना, और  हमेशा नकारात्मक बातें करना।

2. आत्मघाती विचार के कारण निम्न है-असाध्य रोग, जीवन साथी से अलगाव या जीवन साथी की मृत्यु, शारीरिक शोषण, मानसिक विकार, बुलिंग/रैगिंग,  आर्थिक क्षति,  प्रताडऩा, या  प्रेम प्रसंग में असफलता।

3. आत्मघाती विचार वाले व्यक्ति क्या करें- मेडिटेशन करें, पर्याप्त नींद ले, संतुलित भोजन करें,  अपनी बातों को किसी विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करें, अपने अंदर कुछ रचनात्मक सृजन करें,  प्रार्थना करें,  जब भी नकारात्मक विचार आए तो मन को डाइवर्ट करें, अपने किसी भी फेवरेट काम मेंऔर मनोवैज्ञानिक/मनोचिकित्सक की सलाह ले।

4. एक सपोर्टर के रूप में हम क्या कर सकते हैं : खुल कर बात करें, ऐसे व्यक्ति जिनमें आत्मघाती विचार आ रहे हैं उनसे खुलकर बात कीजिए यह बिल्कुल न सोचे कि उनसे अगर आत्महत्या के बारे में पूछेंगे तो कहीं उनकी तीव्रता न बढ़ जाए।

आप कैसे हैं? क्या आप ठीक हैं? मैं आपकी किस प्रकार मदद कर सकता हूं? इस प्रकार से पूछ कर आप उनकी समस्या थोड़ी कम कर सकते हैं। नॉन जजमेंटल रहे हैं- उन्हें विश्वास दिलाये कि आप उनकी समस्या को समझ रहे हैंऔर उनसे ऐसी कोई बात न करें जिससे वह खुद को दोषी माने। उनसे कहिए कि आप हमेशा उनके साथ है इसलिए एक वह प्रॉमिस करें कि जब तक आप उनकी समस्या का कोई हल नहीं निकाल लेते तब तक वह खुद को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाएंगे।

यह भी आवश्यक है ऐसी चीजें दूर राखी जाएँ जिन्हें देखकर उन्हें बुरी यादें याद आती हो।  घातक चीजों को भी उनकी पहुंच से दूर रखें। उन्हें अकेला न छोड़े और उन्हें यह एहसास दिलाने की कोशिश कीजिए कि उनकी जिंदगी खुद के लिए और उनके परिवार वालों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।               

दोस्तों अगर हम थोड़ा समय, थोड़ी संवेदना   थोड़ी उम्मीद जगायेंगे तो निश्चित रूप से हम एक जिंदगी बचा सकते हैं और यह कहना गलत नहीं होगा कि उस एक जिंदगी के पीछे बहुत सारी जि़ंदगियाँ जुड़ी होती है।

प्रीति चांडक, जिला अस्पताल, नारायापुर में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट है।
आत्महत्या के विचार आते हों तो 104 नंबर पर फोन करें।
हर जिला अस्पताल में स्पर्श क्लिनिक में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में सलाह और उपचार  नि:शुल्क उपलब्ध है।
मानसिक रोगों का नाम गुप्त रखा जाता है।
 

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