विशेष रिपोर्ट

सीटीई ने 3 साल में सैकड़ों करोड़ों की निर्माण गड़बड़ी पकड़ी, सिंचाई के ज्यादा प्रकरण

Posted Date : 11-Jun-2018




ज्यादातर मामलों पर कार्रवाई नहीं

शशांक तिवारी
रायपुर, 11 जून (छत्तीसगढ़)। प्रदेश में मुख्य तकनीकी परीक्षक ने तीन साल में सैकड़ों करोड़ के डेढ़ दर्जन से अधिक निर्माण कार्यों में गड़बड़ी पकड़ी है। सबसे ज्यादा 6 प्रकरण जल संसाधन विभाग के हैं। खास बात यह है कि परीक्षक की रिपोर्ट पर ज्यादातर मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। 
मुख्य तकनीकी परीक्षा संगठन के कार्यपालन यंत्री राकेश पुराम ने 'छत्तीसगढ़' से चर्चा में कहा कि संगठन निर्माण विभागों के कार्यों में शिकायत की जांच कर रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी)को भेज देती है। जीएडी संबंधित विभागों से रिपोर्ट लेती है और फिर इसे विधानसभा के पटल पर रखा जाता है। 
बताया गया कि मुख्य तकनीकी परीक्षक संगठन (सीटीई) ने जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण, पंचायत और वन विभाग के कुल 30 निर्माण कार्यों की जांच की थी। इनमें से 20 निर्माण कार्यों में गड़बड़ी सामने आई। इनमें एनीकट, सड़क और पुल-पुलिया निर्माण शामिल हैं। ये जांच मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह या फिर मुख्य सचिव अथवा अलग-अलग स्तरों से आई अनुशंसा पर की गई थी। जल संसाधन विभाग के 6 बड़े निर्माण कार्यों में अनियमितता पकड़ी है, लेकिन एक-दो को छोड़ दें, तो बाकी मामलों में बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। 
जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता एचआर कुटारे ने 'छत्तीसगढ़Ó से चर्चा में कहा कि विभाग में सीटीई की जांच रिपोर्ट पर भांटागांव-रूद्री में लाइनिंग कार्य में अनियमितता पर ठेकेदार को पेनाल्टी लगाई थी और इसकी सूचना भी सीटीई को दे दी है। उन्होंने कहा कि हेमलकोड़ों का जलाशय गुणवत्ताहीन होने की रिपोर्ट पुरानी है और अभी उनके पास जानकारी नहीं है। 
सीटीई ने हेमलकोड़ों जलाशय के निर्माण को गुणवत्ताहीन करार दिया है। इसके अलावा सहगांव एनीकट ढहने के मामले में प्रारंभिक जांच में कई तरह की गड़बड़ी पकड़ी थी। इसी तरह सूरजपुर जिले के रेहर नदी पर निर्मित मोहरा एनीकट और भवरडीह नदी पर निर्मित  एनीकट के निर्माण में भी गड़बड़ी पकड़ी है। रिपोर्ट में यह बताया गया कि एनीकट के निर्माण के लिए वांछित सर्वेक्षण कार्य भी नहीं किया गया। तकनीकी मापदण्डों के पालन में कमी के साथ-साथ गुणवत्ता विहीन कांक्रीट कार्य कराए जाने के फलस्वरूप एनीकट क्षतिग्रस्त हुआ। इसके लिए मैदानी अधिकारियों के अलावा ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया गया। 
शिवनाथ नदी पर ग्राम मार्री एवं चिलाडबरी के मध्य उच्चस्तरीय एनीकट के निर्माण कार्यों की जांच में भी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। 
रिपोर्ट यह कहा गया कि एनीकट निर्माण के दौरान सतत निरीक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और तकनीकी मापदण्डों के पालन में कमी, गुणवत्ता और वर्क मेनसी की कमी होने के कारण एनीकट में रिसाव और क्षतिग्रस्त होना पाया गया। इसी तरह बिलासपुर-बलौदाबाजार मार्ग में भी शिवनाथ नदी पर एनीकट के निर्माण में यह माना गया कि विभाग में कार्य स्थल के चयन में त्रुटि की है। 
सीटीई ने लोक निर्माण विभाग के बसना-भंवरपुर सागरपाली, डोंगरगढ़ चिचोलामार्ग में भी गड़बड़ी पकड़ी थी। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग के छोकरानाला पर पुल निर्माण में गड़बड़ी पाई है। यह कहा है कि निर्माण कार्य के दौरान पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों के द्वारा गुणवत्ता पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया। पंचायत ग्रामीण विकास विभाग के ग्राम सड़क योजना के कार्यों में भी गड़बड़ी पकड़ी है। इसमें मुडिय़ाडीह से भद्रा तक और सड़क निर्माण कार्य को मापदण्ड के अनुसार नहीं पाया। गरियाबंद जिले के ग्राम राजापढ़ाव से निर्माण कार्यों के अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़क निर्माण कार्य को भी गड़बड़ माना है।
सीटीई ने गुरूघासीदास नेशनल पार्क में निर्मित स्टॉप डेम, घटिया निर्माण कार्य के कारण ढह जाने की भी शिकायत की जांच की थी। इसमें यह बताया गया कि कार्य स्थल की उपयुक्तता के आधार पर डिजाइन और नहीं दिया गया। बिना तकनीकी मापदण्डों और मार्गदर्शन के कार्य संपादन किया गया। इस व्यय को भी अनुपयोगी माना है। इन गड़बडिय़ों पर भी विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। 




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