संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : हिंदुस्तानी लड़कियां क्या इंसान भी हैं?
17-Nov-2021 2:57 PM (118)
‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय :  हिंदुस्तानी लड़कियां  क्या इंसान भी हैं?

हत्या और आत्महत्या की दो अलग-अलग खबरें ऐसी आई हैं जो बताती हैं कि हिंदुस्तानी समाज में लडक़ी की क्या हालत है, पहले कम हिंसक खबर देखें तो छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक युवती की शादी कहीं पर तय हुई, तो उसके प्रेमी या दोस्त ने सडक़ पर उसे पीट डाला। उसने घर जाकर आत्महत्या कर ली। और दूसरी खबर मध्यप्रदेश के भोपाल से है जहां पर एक लडक़ी ने समाज से बाहर शादी कर ली थी, और उसका परिवार उससे नाराज चल रहा था। शादी के बाद उस लडक़ी का एक बच्चा हुआ जो 6 महीने का था और जिसकी मौत हो गई। उस बच्चे को दफनाने के नाम पर इस लडक़ी का पिता और भाई पहुंचे और दफनाने के लिए जंगल ले जाते हुए वह लडक़ी भी साथ चली गई। वहां पर उसके पिता ने पहले अपनी बेटी से बलात्कार किया और फिर उसका गला घोंटकर कत्ल कर दिया फिर बाप-बेटे उस लडक़ी की लाश और उसके बच्चे की लाश को जंगल में फेंककर आ गए। पुलिस ने बाप-बेटे को गिरफ्तार कर लिया है, और 55 बरस के बाप ने अपना कुसूर मान लिया है कि वह बेटी के प्रेम विवाह से नाराज था। यह पूरी जानकारी पुलिस ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके दी है।

यह समझ नहीं पड़ता है कि हिंदुस्तानी लडक़ी के हक इंसानों की तरह कुछ हैं भी या कुछ भी नहीं हैं? कहीं उसकी दोस्ती किसी और से है, और मां-बाप किसी और जगह शादी तय कर रहे हैं, तो वह दोस्त या प्रेमी से सडक़ पर पिट रही है और तकलीफ में खुदकुशी कर रही है। दूसरी तरफ परिवार की इज्जत के नाम पर बाप अपनी बेटी से उसके बच्चे की लाश के बगल में बलात्कार कर रहा है, और उसका बेटा बहन से हो रहे इस बलात्कार में बाप का साथ दे रहा है। फिर बाप-बेटे मिलकर उसका कत्ल कर दे रहे हैं, और लाश को फेंककर घर चले आ रहे हैं। जाति के बाहर शादी करने का यह गुनाह कितना बड़ा है जिसके लिए अपनी बेटी के तकलीफ के ऐसे वक्त में जब उसने अपना बच्चा खोया ही है, वह अपना बाप भी खो दे रही है, बाप की शक्ल में एक इंसान को भी खो दे रही है, भाई की इंसानियत भी खो दे रही है, जिस भाई को उसने रक्षा बंधन पर राखी बांधी रही होगी, उसने यह किस किस्म की रक्षा दी उसे! ऐसा कितना बड़ा गुनाह उसने किया था जिसकी ऐसी सजा उसको दी गई ? और परिवार की ऐसी कौन सी इज्जत थी जो लडक़ी की शादी से तबाह हो गई थी, और जिसे वापस लाने के लिए बाप अपनी बेटी से बलात्कार कर रहा है?

हिंदुस्तान में वैसे तो हर महीने कहीं न कहीं ऑनर किलिंग कही जाने वाली ऐसी हत्याएं होती हैं, लेकिन यह हत्या तो सबसे ही भयानक है। ऐसा तो किसी कहानी में भी अभी तक पढऩे में नहीं आया था कि बेटी पहली बार मां बनी, उसने अपने बच्चे को खो दिया, और उसकी लाश के बगल उससे रेप करके बाप-भाई उसे भी मार डालें। जाति और परिवार की इज्जत, धर्म की इज्जत का यह पाखंड इंसानों को इतना घिनौना मुजरिम बना दे रहा है कि इससे लोगों को ऐसी हिंसक जाति और धर्म की व्यवस्था से नफरत होने लगे, या दहशत होने लगे, या दोनों होने लगे। यह भी सोचने की जरूरत है कि जो परिवार या समाज इस तरह की सोच का शिकार है कि परिवार की और जाति की कोई ऐसी इज्जत होती है जो कि बाप-बेटी के रिश्ते से भी ऊपर हो, जो कि एक छोटे बच्चे की मौत की तकलीफ से भी ऊपर हो और जो बेटी पर बलात्कार करने के जुर्म के डर से भी ऊपर हो। इस बारे में क्या कहा जाए, शब्द कम पड़ रहे हैं, और शब्द कमजोर भी पढ़ रहे हैं।

हिंदुस्तान में देवियों की पूजा बहुत प्रचलन में है। नवरात्रि पूरी होती है तो अष्टमी के दिन उत्तर भारत और बाकी कई प्रदेशों में छोटी बच्चियों को खिलाने की कन्या भोज की प्रथा सडक़ों पर दिखती है। लोग तरह-तरह की देवियों की तरह तरह से पूजा करते हैं, हिंदुओं के साल के सबसे बड़े त्यौहार दिवाली पर लक्ष्मी की पूजा होती है, गुजरात में दुर्गा की पूजा होती है, और बंगाल में दुर्गा के एक दूसरे स्वरूप की पूजा होती है। इन सब जगहों पर देवियों की यही पूजा साल की सबसे बड़ी पूजा रहती है। बंगाली जहां-जहां बसते हैं वहां वे एक दूसरी देवी, काली के नाम पर कालीबाड़ी बनाते हैं, उत्तर भारत में तमाम जगहों पर स्कूलों में सरस्वती की पूजा होती है। देवियों की इतनी पूजा करने वाले लोग जिंदा देवियों को पैदा होने के पहले से मारना शुरू करते हैं, घरों में बेटों के मुकाबले उन्हें कम खाना देते हैं, उन्हें कम पढ़ाते हैं, उनका कम इलाज करवाते हैं, और उनकी शादी करके उन्हें यह कहकर विदा करते हैं कि लडक़ी की डोली बाप के घर से उठती है, और अर्थी पति के घर से ही उठती है। इस तरह उसे बाकी पूरी जिंदगी के लिए वनवास पर भेजने की तरह पिता के घर से निकाल दिया जाता है। देश में जगह-जगह, कहीं लडक़ी को मंदिरों में देवदासी बनाया जाता है, और उससे देह का धंधा करवाया जाता है, तो कहीं और उसे पति के गुजरने पर सती बना दिया जाता था, जो कि अब कड़े कानून की वजह से खत्म हुआ है। एक अकेली शाहबानो को सुप्रीम कोर्ट ने उसका हक़ दिलाने की कोशिश की, तो देश की भारी बहुमत वाली सरकार ने संसद में शाहबानो को कुचल डाला था।

अधिक लड़कियां पैदा करने पर बहू को मार देने की एक खबर कल ही आई है कि तीन बेटियां पैदा करने वाली बहू को ससुराल ने मार डाला। हिंदुस्तान ऐसे विरोधाभासों से भरा हुआ ऐसा पाखंडी देश है जो कि पत्थर और मिट्टी की देवियों की, मूर्तियों की तो पूजा करता है, लेकिन जिंदा देवियों को तरह-तरह से मारता है जिसमें आज तक का एक सबसे ऊंचा पैमाना भोपाल में सामने आया है, जिसमें जाति के बाहर शादी करने की सजा देने के लिए बाप ने बेटी से बलात्कार करके उसको कत्ल कर दिया। अब देखना यह है कि परिवार की इज्जत किसने बचाई और किसने बिगाड़ी? क्या बेटी ने इज्जत बिगाड़ दी और बाप ने सुधार दी?
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