विशेष रिपोर्ट

कोरिया के जंगलों में खुखड़ी-पुटू की बहार

Posted Date : 08-Jul-2018



चिकन-मटन का बना विकल्प, बाजार में 6सौ रुपये किलो तक
चंद्रकांत पारगीर
बैकुंठपुर, 8 जुलाई (छत्तीसगढ़)। बारिश शुरू होते ही कोरिया जिले में पुटू, खुखड़ी (एक प्रकार का मशरूम) चिकन और मटन का बेहतर विकल्प बन गया है।  सुदूर वनांचलों  से नगरों तक आ रहे खुखडी और पुटू के लिए बस जेब ढीली करनी होगी। यहां सोनहत रामगढ़ से आने वाले पुटू, खुखड़ी की मांग रायपुर बिलासपुर से लेकर झारखंड, बिहार में भी ज्यादा है। फिलहाल ये 400 से 600 रुपये प्रति किलो खूब बिक रहा है।
बारिश के साथ ही कोरिया जिले के ग्रामीण इलाकों में तरह-तरह के खुखड़ी उगने लगे हंै। ग्रामीणों के साथ साथ अब शहरी क्षेत्र के लोग  प्रमुख सब्जी के रूप में उपयोग करते हैं। छत्तीसगढ़ ने इस पहली बारिश के मौसम में निकलने वाली खुखड़ी की कई किस्मों की तलाश की। सोनहत, रामगढ और कोटाडोल के जंगलों में  रंग-बिरंगी खुखड़ी के साथ अलग-अलग पेड़ों से निकलने वाली खुखड़ी भी  देखे। इसकी कई किस्में खाने लायक होती हंै तो कई विषाक्त भी। इसकी पहचान कर खुखड़ी चुना जाता है।  ग्रामीणों को सब्जी  के साथ ही यह अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन जाता है। 
ग्रामीणों के अनुसार पुटू जिस जगह पर निकलता है उस स्थान पर सिंदूरी रंग का एक छोटा कीड़ा भी पाया जाता है।  इससे वे अंदाजा लगा लेते हंै कि इस ओर सफेद पुटू मिल सकता है। जो खाने में स्वादिष्ट होता है।
दुर्लभ है खुखड़ी
माना जाता है कि बरसात के मौसम में बिजली कड़कने से धरती फटती है और इसी समय धरती के अंदर से सफेद रंग की खुखड़ी निकलती है। पहली पहली बारिश में निकलने वाली इस खुखड़ी का जीवन सिर्फ कुछ दिनों का रहता है और इसका सीजन भी, शुरूआती बारिश के बाद 20 से 30 दिन ही।  इसके बाद अगले वर्ष तक इंतजार करना पड़ता है।  
खुखड़ी की कई किस्में
खुखड़ी मशरूम की तरह दिखता है। खुखड़ी में भी कई किस्म हैं। ग्रामीणों की मानें तो खुखडी की किस्मों को ग्रामीण अलग अलग नाम से बुलाते है। पतेरी खुखड़ी के अलावा रेत से निकलने वाली बालू खुखड़ी, पन्ना, जामुन, बडख़ा, भूंडू, बोरडा, टंकस खुखड़ी कहते हैं। सबसे ज्यादा बालू, भंूडू और टंकस खुखड़ी को लोग ज्यादा खाते हैं। जबकि सोरवा खुखड़ी का उपयोग सब्जी के अलावा दवाई बनाने में भी किया जाता है। 
सबसे स्वादिष्ट खुखड़ी पतेरी
खुखडिय़ों में सबसे ज्यादा स्वादिष्ट पतेरी नामक खुखड़ी है। इसका स्वाद अन्य सभी खुखडिय़ों की अपेक्षा श्रेष्ठ स्वाद वाला होता है। खुखड़ी की जानकारी  देते चिकू सनमानी कहते हैं, अपने नाम के जैसा यह जंगलों में पत्तों के बीच में छुपा रहता है। इसे खोजना कठिन है। ग्रामीण  जंगलों में  गिरे पत्तों को हटाकर इसकी तलाश करते है। यह खुखड़ी भी जिस स्थान पाया जाता है भारी मात्रा में निकलता है। इसके ऊपर का कुछ ही हिस्सा जमीन के उपरी भाग में हल्का दिखाई देता है।  इसकी आवक होने में अभी देरी है।  यह खुखडी अपने स्वाद के लिए मशहूर है। जिसके चलते बाजार में आने के साथ ही यह हाथों हाथ बिक जाती है। शुरूआती दौर में यह खुखरी भी 4 से 5सौ रूपये किलो तक स्थानीय बाजार में बिकती है। ग्रामीण दिन भर इसकी तलाश में जंगलों की खाक छानते रहते हैं। 
जंगली पुटू की विशेष मांग
कोरिया के जंगलों में सामान्य पुटू के अलावा जंगली पुटू भारी मात्रा में निकलता है। यह पुटू बरसात शुरू होने के कुछ दिन में ही निकलता शुरू हो जाता है। यह पुटू जमीन के अंदर रहता है इसकी तलाश करना मुश्किल होता है। लेकिन जानकार ग्रामीण इसकी तलाश कर लेते हंै। ग्रामीण बताते हैं कि जंगली पुटू जमीन के अंदर रहता है, जहां पर यह मिलता है वहां की जमीन थोड़ी उठी हुई दिखाई देती है जिसकी थोड़ी खुदाई करने पर एक ही स्थान पर भारी मात्रा में यह निकलता है। खासकर यह जंगलों में ही निकलता है। शहर के बाजार में जंगली पुटू की आवक बढ़ गई है। शुरूआत में जंगली पुटू शहर के बाजार में 4 सौ रूपये प्रति किलो के दर से बिका। जिले के रामगढ़ से लेकर भरतपुर क्षेत्र के जंगलों से भारी मात्रा में जंगली पुटू की आवक शहरों में होती है।

गर्भवती इसे न खाएं
डॉइटेशन पूजा त्रिपाठी का कहना है कि खुखड़ी सभी अवस्था के लोग खा सकते हैं, इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा पाया जाता है।  इसे कच्चा खाना नुकसानदेह होता है। सभी खुखडिय़ों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इनकी कुछ प्रजातियां जहरीली होती हैं। इन्हें खाने से हीमोग्लोबिन बना रहता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फॉलिक एसिड एवं लौह तत्व पाया जाता है जो कुपोषण से बचाता है। गर्भवतियों  को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।




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