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स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी समाज की भूमिका पर कलिंगा विश्वविद्यालय में संगोष्ठी
27-Nov-2021 1:35 PM (163)
स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी समाज की भूमिका पर कलिंगा विश्वविद्यालय में संगोष्ठी
रायपुर, 27 नवंबर। कलिंगा विश्वविद्यालय मध्य भारत का एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है। यहां पर वैश्विक मापदंड के अनुरूप विद्यार्थियों में नयी खोज को विकसित करने के लिए उच्च गुणवत्तापूर्ण एवं शोध परक शिक्षा प्रदान किया जाता है। विश्वविद्यालय के शहीद वीर नारायण सिंह शोधपीठ के द्वारा आयोजित भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी समाज की भूमिका पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
 
छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास, कला और संस्कृति को नए सिरे से उजागर करने के लिए शहीद वीर नारायण सिंह शोधपीठ की स्थापना की गयी है। इतिहास, कला एवं संस्कृति से जुड़े विभिन्न पक्षों पर विद्यार्थियों की रचनात्मक रुचि जागृत करते हुए उनके माध्यम से नए शोध और नयी खोज के लिए प्रेरित किया जाता है। मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ के प्रमुख साहित्यकार और शासकीय महाविद्यालय रामचंद्रपुर के प्रभारी प्राचार्य पीयूष कुमार उपस्थित थे।
 
श्री कुमार ने बताया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आदिवासी सरल, सहज और शांतिप्रिय होते हैं। वह अपनी संस्कृति और परंपराओं से गहरे जुड़े हुए होते हैं। भारतवर्ष के विदेशी शासकों ने जब भी उनके अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया या दमनकारी नीति बनाया, तब उन्होंने संगठित होकर उसका तीव्र विरोध किया है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ढाई सौ वर्षों के इतिहास में अनेकों क्रांतियों का सूत्रपात आदिवासी समाज के द्वारा किया गया है।
 
शोधपीठ के अध्यक्ष डॉ. अजय शुक्ल ने बताया कि आदिवासी समाज अपनी श्रेष्ठ संस्कृति और उत्कृष्ट परंपरा से जानी जाती है। किसी भी जागरुक समाज की पहचान उसके गौरवशाली अतीत और वर्तमान काल में उसकी भूमिका से तय होती है। प्रकृति प्रेमी आदिवासी समाज का जीवन उनकी संस्कृति के साथ जल, जंगल और जमीन से जुड़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में इस समाज ने शहीद वीरनारायण सिंह जैसे सपूत देकर सिर्फ प्रदेश को ही नहीं बल्कि देश को भी गौरवान्वित किया है। जिन्होंने राजसिंहासन त्याग कर देशहित में अपने प्राणों की आहुति देकर देशवासियों का एक नया संदेश दिया है।

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