खेल

मंहगे इक्युपमेंट तलवारबाजी के विकास में बाधक

Posted Date : 09-Jul-2018



छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 9 जुलाई। फेंसिंग के क्षेत्र में देश में प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों की कमी नहीं है, लेकिन मंहगे इक्युपमेंट इस खेल के विकास में बाधक हैं। अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में शामिल होने के लिए देश में किट उपलब्ध न होने के कारण खिलाडिय़ों को विदेश पर आश्रित रहना पड़ता है। 
 कोटा स्टेडियम में 9 से 11 जून तक खेलो इंडिया सलेक्शन ट्रायल के लिए देश के विभिन्न प्रदेशों से राजधानी पहुंचे खिलाडिय़ों ने फेंसिंग से जुड़े उक्त तथ्य का खुलासा किया। 
सलेक्शन ट्रायल के लिए राजधानी पहुंचे महाराष्ट्र के दुर्गेश जंहगीरदार ने सोलापुर में सीनीयर नेशनल में फॉयल इवेंट में जहां कांस्य पदक हासिल किया वहीं तेलंगाना में आयोजित स्कूल नेशनल में टीम में स्वर्ण एवं व्यक्तिगत में रजत पदक हासिल किया। चीन में आयोजित ग्रांट प्रिक्स में उनकी सहभागिता रही। 
दुर्गेश का कहना है कि देश में फेंसिंग का विकास हो रहा है। अच्छे कोच भी यहां मौजूद हैं, लेकिन इक्युपमेंट मंहगे होने के कारण खिलाडिय़ों को दिक्कत होती है। वेपन, किट के लिए भी खिलाडिय़ों को विदेश पर आश्रित रहना पड़ता है। दुर्गेश कहते हैं कई ऐसे देश हैं जहां पीढ़ी दर पीढ़ी फेंसिंग का चलन है। वहां खिलाडिय़ों को इसके लिए बढ़ावा दिया जता है, लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं है।
 फेंसिंग की कई राष्ट्रीय स्पर्धा में शामिल होकर तमिलनाडू की स्वर्ण प्रभा अब तक स्वर्ण पदक सहित कई पदक प्राप्त कर चुकी है। स्वर्ण प्रभा ने बताया कि फेंसिंग का सामान्य किट 50 हजार तक में आ जाता है, लेकिन इंटरनेशनल स्पर्धा में भाग लेने के लिए एफआईई किट की जरूरत होती है, जिसकी कीमत सवा लाख तक होती है। 
औरंगाबाद की प्रणाली प्रकाश करंडे पिछले 3 सालों से फेंसिंग से जुड़ी हुई है। स्कूल नेशनल में कांस्य पदक पाने के अलावा इटली में वल्र्ड फेंसिंग चैंपियनशिप में भागीदारी निभा चुकी प्रणाली का कहना है कि फेंसिंग से जहां एकाग्रता बढ़ती है वहीं स्पर्धा में मिली हार खिलाड़ी के लिए सबक होता है। प्रणाली ने बताया नेशनल के लिए तो देश में किट उपलब्ध हो जाते हैं, लेकिन इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए विदेश से किट मंगाना पड़ता है। 
महाराष्ट्र की कशिश भरार ने फेंसिंग की राष्ट्रीय स्पर्धा में स्वर्ण पदक प्राप्त कर अपनी पहचान बनाई है। साई में रोजाना प्रेक्टिस करने वाली कशिश कहती है इस खेल से फिजिकल फिटनेस, एकाग्रता बढ़ती है। 

 




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