विशेष रिपोर्ट

हजारों जवानों की सुरक्षा में जगरगुंडा गया चावल हाट में, 1 रुपये चावल के बदले वनोपज, खरीद रहे आदिवासी

Posted Date : 09-Jul-2018



अमन सिंह भदौरिया 
दोरनापाल, 9 जुलाई (छत्तीसगढ़)। सुकमा जिला मुख्यालय से  94 किमी दूर जगरगुंडा धुर नक्सल प्रभावित इलाका है जहां हर बरस राशन की गाडिय़ां हजारों जवानों की सुरक्षा में पहुंचाई जाती हैं। वह राशन जगरगुंडा तक तो पहुंचता है मगर ग्रामीणों तक नहीं, पर खुले बाजार में वही चावल वनोपज के बदले खपाया जा रहा है। ग्रामीण 1 रुपये में मिलने वाले इस चावल को 15 से 16 रुपये में खरीदने मजबूर हैं। खाद्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं मिली है। वहीं विभाग की मानें तो पिछली बार जांच के बाद दोषियों के खिलाफ एफआईआर कराई गई थी मगर दोषियों पर कार्यवाही नहीं होती।  
मिली जानकारी के अनुसार पहले इन दुकानों का संचालन चिंतलनार में होता रहा जिसके बाद इन दुकानों को जगरगुंडा स्थान्तरित किया गया। कालाबाजारी  की  सूचना मिलते ही 'छत्तीसगढ़Ó की टीम रविवार को जगरगुंडा के साप्ताहिक बाजार में पहुंची तो मौके पर राठौर राईस मिल छिंदगढ़ का लॉट नम्बर 546 तकरीबन 50 से 60 बोरा पाया। 'छत्तीसगढ़Ó ने इससे कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य को अवगत कराया।  उनका कहना है कि जगरगुंडा के पीडीएस के मामले की जांच होगी। इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो कार्यवाही होगी।
ज्ञात हो कि बीते कई हफ़्तों से जगरगुंडा इलाके में आदिवासियों को पीडीएस का चावल नहीं मिल रहा है। हाल ही में बारिश को देख नॉन ने 4 माह का राशन भेजा था और ग्रामीणों के अनुसार उसी चावल को सेल्समेन सीधे व्यापारियों को 10 रुपये किलो की दर से बेच रहे हंै जो साप्ताहिक बाजार में पहुंच ग्रामीणों को 15 से 16 रुपये किलो में वनोपज के बदले मिल रहा है। 
कानून व्यवस्था का डर न तो सेल्समेनों में है और न वनोपज के बदले चावल खपा रहे व्यापारियों को, क्योंकि 2012 से अब तक राशन हेराफेरी के दर्जनों मामले सामने तो आये मगर जिला स्तर से लेकर प्रदेशस्तर तक जांच में स्पष्ट पाए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। कार्यवाही के नाम पर हर बार राशन की एजेंसी बदल पंचायत से मार्केटिंग और मार्केटिंग से पंचायत किया गया।
इस संवाददाता को जगरगुंडा में चल रही राशन की काला बाजारी की सूचना एक दिन पहले ही  मिल गयी कि साप्ताहिक बाजार में 8 लेम्प्सों का चावल खपाया जा रहा है। सेल्समेनों में ग्रामीणों को दिया जाने वाला राशन बेच डाला है और हर बाजार में 150 से 160 बोरा चावल खपाया जा रहा है। 
सुबह  7:30 को जगरगुंडा पहुंच जैसे ही बाजार में दाखिल हुए वैसे ही चावल से लदा एक ट्रैक्टर दिखा जो दो गल्ला व्यापारियों के गल्ले के बीच मिला। साथ ही अन्य व्यापारी के गल्ले के पास सील पैक चावल का ढेर भी मिला।  धीरे-धीरे इक्का दुक्का बोरा चावल मिलाकर लगभग 50 से अधिक सीलबंद चावल मिला।
ज्ञात हो कि  साप्ताहिक बाजार सुबह साढ़े 5 बजे ही शुरू हो जाता है और 8 बजे तक व्यापार लगभग ख़त्म भी हो जाता है। कुछ महिलाएं भी मौके पर चावल ले जाती मिलीं। उन्होंने बताया कि चावल उन्हें वनोपज के दुगुने वजन के हिसाब से साप्ताहिक बाजार से मिला।
4 महीने के अग्रिम स्टॉक से भी हेरफेर
नाम न बताने की शर्त पर स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि 4 माह के अग्रिम स्टॉक से भी सेल्समेनों द्वारा हेर फेर किया जा रहा है। बारिश को देखते हुए नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा जगरगुंडा समेत अन्य राशन की दुकानों में राशन का कोटा पहुंचा दिया था। 
 ग्रामीणों के अनुसार सेल्समेनों द्वारा 4 माह के स्टॉक से बड़ी मात्रा में चावल और अन्य राशन बेच डाला है। एक माह का राशन बांटने के बाद ही सेल्समेनों ने चावल बेचा जो साप्ताहिक बाजार तक पहुंचा और ग्रामीण वही राशन साप्ताहिक बाजार से लेने को मजबूर हंै। बताया जा रहा है कि सेल्समेनों द्वारा प्रति किलो 10 रुपये बेचा गया है ।  
नागरिक आपूर्ति निगम के अनुसार 7-8 मई को 4 माह जून से सितम्बर तक का आबंटन जारी कर  4 ट्रक में 17 टन, नॉन की 3 ट्रक में 10 टन व 2 ट्रक में  50 टन राशन जगरगुंडा भेजा गया था । जिसमें 3433 क्विं. चावल, 124 क्विं. शक्कर, 249 क्विं. चना, 205 क्विं. नमक भेजा गया था। 
राशन कार्ड नहीं
रविवार बाजार आये दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास राशन कार्ड नहीं है इस वजह से भी कई लोगों को राशन बाजार से वनोपज के बदले 15 रूपये किलो खरीदना पड़ता है। जबकी पंचायतों में  खाद्य विभाग द्वारा सैकड़ों राशन कार्ड बनाए गए हंै जिनके नाम पर प्रतिमाह राशन का आबंटन भी जारी होता है। बावजूद कइयों ने कहा कि अपना राशन कार्ड आज तक नहीं देखा।  
नाम न बताने की शर्त पर जगरगुंडा व चिंतलनार के कुछ  ग्रामीणों ने बताया कि जगरगुंडा की 8 राशन की दुकान कुन्देड, मिलमपल्ली, सुरपनगुड़ा, पेंटाचिमली, सिलगेर, कोंडासांवली, गुमोड़ी,गोंदपल्ली के सेल्समेन  मनमानी कर रहे हंै। कुछ दिन पहले ही राशन की गाडिय़ों में भर भर कर राशन लेम्प्सों में उतरा है। कई घरों में 50-50 बोरा चावल तक तलाशी के दौरान मिल सकता है।  वहीं छोटी-बड़ी गाडिय़ों में भी राशन जगरगुंडा चिंतलनार से कुछ लोग बाहर ले जाते हैं। नक्सल इलाका होने की वजह से खाद्य विभाग के लोग भी गांव तक सर्वे करने नहीं आते कि राशन का वितरण सही तरीके से हो रहा है या नही ।
जगरगुंडा के सुकलाल कश्यप का कहना है कि 4 माह का राशन आया था 1 माह का बाँटा गया फिर  स्थानीय व्यापारियों को 20-20 और 50-50 बोरा चावल बेचा गया है।  सेल्समेन अपनी मनमानी करते हैं । रविवार को भी बहुत सारा सोसाइटी का चावल बाजार में खपाया गया। चावल वनोपज के बदले महुआ 2 किलो, टोरा 1 किलो के हिसाब से ग्रामीणों को चावल मिलता है।
कोई कार्रवाई नहीं
 प्रदेश महासचिव युवा कांग्रेस दुर्गेश राय का कहना है कि इसमें खाद्य विभाग की लापरवाही है जो मामले को नजर अंदाज कर रही है सही तरीके से मॉनिटरिंग नहीं कर पा रही है। जिला मुख्यालय में बैठ औपचारिकता निभा रही है कहीं न कहीं खाद्य विभाग की मिलीभगत है।  युवा कांग्रेस ने इसकी जांच कर इससे पहले रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी सरकार की गैरजिम्मेदारी की वजह से आज सेल्समेनों व चावल माफियाओं के हौसले बुलंद हैं आज तक जांच के बाद कोई कार्यवाही नहीं हुई। 




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