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क्या मोदी सरकार ने वोडाफोन-आइडिया के विलय को मंजूरी दे दी है?

Posted Date : 10-Jul-2018



नई दिल्ली, 10 जुलाई। यह खबर सोमवार शाम से बड़ी तेजी से सामने आई है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों वोडाफोन और आइडिया के विलय को मंजूरी दे दी है। हालांकि इसके साथ सूत्रों के हवाले कुछ खबरें ऐसी भी आई हैं जिनमें बताया गया है कि अभी अंतिम तौर पर देश में दूरसंचार क्षेत्र के इस सबसे बड़े सौदे को मंजूरी नहीं दी गई है। बल्कि सूत्रों की मानें तो दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन पर कुछ शर्तें लगाई हैं उन्हें पूरा करने पर ही सौदे को मंजूरी दी जाएगी।
दूरसंचार विभाग ने सौदे की अंतिम मंजूरी से पहले वोडाफोन से 7,200 करोड़ मांगे हैं। इनमें 3,900 करोड़ नगद और 3,300 करोड़ बैंक गारंटी के तौर पर जमा कराने को कहा गया है। यह पैसे एक बार में जमा किए जाने वाले स्पेक्ट्रम शुल्क के रूप में लिए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक 4.4 मेगाहर्ट्ज तक की एयरवेव्ज वोडाफोन से आइडिया सेलुलर के नाम ट्रांसफर करने के एवज में नगद शुल्क लिया जा रहा है। इसके अलावा 4.4 मेगाहर्टज से ऊपर की एयरवेव्ज के लिए बैंक गारंटी मांगी गई है।
सूत्र बताते हैं कि इसके अलावा दूरसंचार विभाग के पास अभी वोडाफोन इंडिया की जो बैंक गारंटी है उसे भी आइडिया सेलुलर को अपनी बैंक गारंटी से बदलना (रिप्लेसमेंट) होगा। वोडाफोन इंडिया को लिखित वादा भी करना होगा कि अदालत में विचाराधीन पिछले बकाये (टैक्स आदि) से संबंधित मामलों में अगर उसके खिलाफ फैसला आया तो वह निर्धारित पूरी रकम चुकाएगी। दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि वोडाफोन-आइडिया जब इन शर्तों को पूरा कर देंगे उनके विलय को मंजूरी मिल जाएगी।
इकॉनॉमिक टाईम्स में छपी खबर की मानें तो वोडाफोन-आइडिया के विलय की सशर्त मंजूरी प्रधानमंत्री कार्यालय के सीधे दखल के बाद ही मिल सकी है। बताया जाता है कि बीते कुछ वर्षों में दूरसंचार क्षेत्र में देश का यह सबसे बड़ा सौदा होगा। इसके बाद जो कंपनी बनेगी वह देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी होगी। फिलहाल करीब 15 साल से देश में भारती-एयरटेल देश की नंबर-एक दूरसंचार कंपनी बनी हुई है। अभी आइडिया दूरसंचार क्षेत्र में नंबर-दो तथा वोडाफोन तीसरे नंबर पर काबिज हैं। (लाइव मिंट)




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