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'रंग आ जाते मुट्ठी में जुगनू बन कर...' पढ़ें अफ़ज़ाल फ़िरदौस के शेर
30-Nov-2021 10:04 AM (61)
 'रंग आ जाते मुट्ठी में जुगनू बन कर...' पढ़ें अफ़ज़ाल फ़िरदौस के शेर

अक्सर ज़िंदगी में कई तरह के हालातों का सामना करना पड़ता है. कभी खुशी, तो कभी गम महसूस करना लेकिन उस अहसास को बयान न कर पाना, ऐसा बहुत लोगों के साथ होता है. जब बेचैनियों का बोझ ज्यादा बढ़ जाता है तो हालात से मिलते-जुलते अल्फ़ाज़ और उनसे बुना जाल मरहम का काम करता है. कई ऐसे बेहतरीन शायर हैं जो अलग-अलग हालातों को बयान करने का काम बहुत बखूबी करते हैं. आज पढ़ें, पाकिस्तानी उर्दू शायर अफ़ज़ाल फ़िरदौस कि कुछ क्लासिक चुनिंदा शेर-ओ- शायरियां 

जिस को मेरी हालत का एहसास नहीं उस को दिल का हाल सुना कर रोना क्या

इस तरह सताया है परेशान किया हैगोया कि मोहब्बत नहीं एहसान किया है

दीवारों में दर होता तो अच्छा थाअपना कोई घर होता तो अच्छा था

ऐ मेरे मुसव्विर नहीं ये मैं तो नहीं हूँये तू ने बना डाली है तस्वीर कोई और

रंग आ जाते मुट्ठी में जुगनू बन करख़ुशबू का पैकर होता तो अच्छा था

अब अश्क तिरे रोक नहीं पाएँगे मुझ कोअब डाल मिरे पाँव में ज़ंजीर कोई और

(news18.com)

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