विचार / लेख

देश और दुनिया इस हफ्ते

Posted Date : 11-Jul-2018



प्रकाश दुबे
दिल्ली और देहात 
दिल्ली के वातानुकूलित टीवी स्टूडियो में किसान की खुशखबरी की खबर आ रही थी। सौ किलोमीटर दूर रेवाड़ी के ताकड़ी गांव में चारपाई पर बैठे योगेन्द्र यादव से टीवी पत्रकार ने कहा-अब तो खुश हो जाइए। किसानों को बाजिव दाम दिलाने स्वराज पार्टी के नेता यादव गांव-गांव भटक रहे हैं। किसान बता चुके थे-न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी का पता ही नहीं है। बाजरा का एमएसपी गत वर्ष 1450 रु था। किसानों को 11 सौ मिले। अब एमएसपी 1950 रु क्विंटल किया गया है। अफसर बहाने बनाकर कई फसलों की खरीदी टाल देते हैं। टीवी वालों को यादव कैसे बताएं कि किसान और सरकार दो अलग अलग देशों में बैठे हैं? इंडिया बनाम भारत। शायद दो अलग अलग दुनिया में।              
 सपनों की सैर 
 जल-जहाज खरीद कर लाओ। सड़क देश की खाली कर बैठ क्रूज में मजे उड़ाओ। यह कविता नितीन गडकरी ने नहीं लिखी है। करना यही चाहते हैं।( रेल छोड़कर) जल-थल परिवहन की कमान गडकरी संभाल रहे हैं। जहाजरानी निगम को दस अरब रुपए की भारी रकम का जुगाड़ कराने गडकरी एक शर्त पर तैयार हैं। यूनान अभी कड़की में है। जल-जहाजों का बेड़ा बेचने की नौबत है। यूनान से जहाज खरीदो। भारत में जल परिवहन के लिए भाड़े पर दो। सागरमाला परियोजना नाम का सपना पूरा करने में जुटे गडकरी का दूसरा सपना है कि लोग सड़क मार्ग से चलना बंद करें। इथेनाल से लेकर सागर सैर का सपना देखने के बाद पेट्रोल कीमत में बढ़ोत्तरी की शिकायत मत करना।     
  नौका डूबी बाढ़ में  
जम्मू-कश्मीर में सिंचाई और बाढ़ राहत की मद के करोड़ों रुपए अनखर्चे रहे। श्रीनगर में झेलम और नहरों से जल निकासी के लिए 24 करोड़ रु मिले थे। चार बरस से जमा हैं। पीडीपी और भारतीय जनता पार्टी की मिली जुली सरकार की मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी बनती है। जांच की मांग उठने पर भाजपा के (अब पूर्व) मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी और राज्यपाल सचिवालय की ठंडी हवा में गरिष्ठï ज्ञान वितरित करने वाले चपेट में आएंगे। राज्य को अंगुली पर नचाने वाले केन्द्रीय राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह और राम माधव जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।       
 गणित और समीकरण  
कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने मिली जुली सरकार का बजट पेश किया। बजट भाषण में कहा कि कांग्रेस राज में सिद्घरामैया बजट पेश कर चुके हैं। मैं सिर्फ कुछ नए प्रस्ताव शामिल कर रहा हूं। मुख्यमंत्री के रिश्तेदार शिक्षा मंत्री कम पढ़े लिखे हैं। उनका गणित कमजोर हो सकता है। अपमान से लाल पीले हो रहे सिद्घरामैया सहित कांग्रेस के गले यह दलील नहीं उतरी। उतरे भी कैसे? सिद्घरामैया ने 16 फरवरी को दो लाख करोड़ रूपये का बजट पेश किया था। महज कुछ नए प्रस्तावों वाला कुमारस्वामी का बजट- आकार मात्र 9 हजार करोड़ रूपये अधिक है। कांगेस और जनता एस का सत्ता-समीकरण जम गया। खजाने के खर्च को लेकर आपस में गणित सही नहीं बैठ रहा।         
(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)

 




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