विशेष रिपोर्ट

आशावाद की नई कविता

Posted Date : 11-Jul-2018



एक था जगरगुण्डा
बस्तर में जन्मे, पले, बढ़े  राजीव रंजन प्रसाद का बस्तर के इतिहास, साहित्य, संस्कृति और पुरावैभव पर निरंतर लेखन जारी है। इसी क्रम में नक्सलियों की उपराजधानी कहे जाने वाले जगरगुंडा के ताजा हालात पर उनका समापन आलेख।

जगरगुण्डा, दर्द की अनंत कथा से आशावाद की नई कविता बनने की ओर अग्रसर है। यह परिक्षेत्र एक जीवित उदाहरण है जो स्पष्ट कर सकता है कि सशस्त्र क्रांति अब दूर की कौड़ी क्यों है और उसके कारण किस तरह की सामाजिक-आर्थिक त्रासदी से दो-चार होना पड़ सकता है। जगरगुण्डा ने सलवाजुडुम के दौरान और उसके पश्चात की परिस्थितियों में जो कुछ भुगता है उसकी भरपाई संभव नहीं, लेकिन बहुत कुछ अवश्य सीखा जा सकता है। जगरगुण्डा की परिस्थितियाँ सत्तर के दशक में बस्तर के अंदरूनी परिक्षेत्रों में लागू की गई उस ट्राईबलआईसोलेशनथ्योरी को नकारती है जिसकी भूमिका थी कि जहाँ सड़के पहुँचती है, उसकी बीमारी साथ पहुँचती है। एक पूरी सामाजिकता को अलग-थलग रखने की बौद्धिकता ने बस्तर को न केवल माओवाद की सौगात दी थी अपितु इसी कारण जगरगुण्डा जैसी परिस्थितियाँ भी उत्पन्न हुई हैं। माओवादियों ने भी आईसोलेशनथ्योरी को ही अपना हथियार बनाया था और अब जगरगुण्डा को ही सकारात्मक उदाहरण की तरह लिया जा सकता है कि दो ओर से सड़कें बन जाने के पश्चात यहाँ की परिस्थितियाँ किस तेजी से बदलने लगी हैं।  
सुखद है कि दशकों से नक्सलवादियों की दहशत से बंद हो गया दंतेवाड़ा-जगरगुण्डा मार्ग अब लगभग पूरा हो गया है। इस मार्ग से यदि जगरगुण्डा पहुँचना हो तो दंतेवाड़ा से अरनपुर तक सीधा और मैदानी रास्ता है लेकिन यहाँ से आगे बढ़ते ही नयनाभिराम घाटियाँ समुपस्थित होती हैं। अरनपुर से कोंडासामली तक का रास्ता बेहद घुमावदार, रोमांचित करने वाला किन्तु सुन्दर है। अरनपुर से आगे घाट की ओर बढ़ते ही पडऩे वाले पहले सीआरपीएफ कैम्प का नाम शहीद जवान कमल सिंह के नाम पर कमल कैम्प रखा गया है। कमल सिंह अरनपुर-जगरगुण्डा मार्ग निर्माण के दौरान गश्त करते हुए नक्सलियों द्वारा लगाये गये प्रेशरबम की चपेट में आकर शहीद हो गये थे। शहीद जवानों के नाम पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कैम्प का होना निश्चय ही एक अच्छी पहल है। यद्यपि अब अनेक सीआरपीएफ कैम्प के आगे शहीद जवानों की स्मृति में स्तम्भ उनके नामोल्लेख के साथ भी खड़े किये गये हैं। बस्तर का यह वर्तमान किसी दौर में दर्द भरे इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा।
बहुत कम ही लोग जानते हैं कि सुंदरतम घाटियों वाले बस्तर में अरनपुर अपनी दम-खम के साथ उपस्थिति दर्ज कराने में सक्षम है। आकाशनगर, कैलाशनगर, केशकाल जैसे क्षेत्रों से दीख पड़ती नैसर्गिक सुन्दरता के समतुल्य और कई मायनों में उससे भी अधिक रम्य है अरनपुरघाटी। घाटी की लम्बाई-चौडाई ही नहीं अपितु गहराई भी दर्शनीय है तथा ऊपर से निहारने पर भय पैदा करती है। इस स्थान की दुर्गमता देख कर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्यों नक्सली यहाँ लंबे समय तक अपनी उपस्थिति बनाये रखने में सफल हुए थे। अरनपुर घाटी की सबसे महत्वपूर्ण बात है जैव-विविधता जिसके दर्शन अब अन्यत्र कम ही होते हैं। बांस के दूर दूर तक फैले हुए झुरमुट और सूंड की तरह हिलते सियाड़ी के दोमुहे पत्तों वाले पेड़ की लतिकाओं के बीच बहुत सी वन-औषधियाँ अपना स्थान बनाए हुए हैं। 
यह घाटी निश्चय ही पादप-विज्ञानियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम है। अरनपुर घाटी उन विद्यार्थियों के लिये लाभप्रद है जो वनस्पति विज्ञान के निकटवर्ती महाविद्यालयों में अध्येता हैं। यह घाटी प्रकृति प्रेमियों के लिये एक वरदान है चूंकि यहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त की दृश्यावलियाँ मसूरी अथवा नैनीताल से कम नयनाभिराम नहीं हैं। यदि पर्यटन विकास के दृष्टिगत अरनपुर घाटी के विषय में योजना बनाई जाये, घुमावदार मार्ग पर अवलोकन स्थल निर्मित किए जायें, भ्रमणार्थियों के लिये कुर्सियाँ आदि लगवाई जाये तो पूरे क्षेत्र का कायाकल्प हो सकता है।
मुझे अपने दौरे में कोण्डासामली से वापस लौटना पड़ा था, तब वहाँ पुल का काम चल रहा था। यहाँ से केवल कुछ सौ मीटर की दूरी पर ही जगरगुण्डा की अवस्थिति है। सुखद अहसास के साथ वापस लौटा हूँ कि आशा की किरणें घटाटोप अंधकार तक पहुँच गई हैं। जगरगुण्डा की परिस्थ्तियाँ सामान्य होते ही दंतेवाड़ा से दोरनापाल पहुँचने के लिये छोटा और वैकल्पिक मार्ग आरंभ हो जायेगा जो आवागमन और कारोबार के लिये अच्छी खबर है। जगरगुण्डा का पुनर्निर्माण नक्सलगढ़ की उपराजधानी के ध्वस्त होने की भी कथा है जिसे रणनीतिक तरीके से हासिल किया गया है। इसी तौर की प्रतिलिपि कर अबूझमाड़ और दक्षिण-बस्तर के अन्य अंदरूनी क्षेत्रों पर प्रशासनिक पहुँच हासिल की जा सकती है।
 उम्मीद है कि शीघ्र ही बीजापुर की ओर से भी सड़क जगरगुण्डा तक पहुँचेगी और पूरी तरह है अंचल अपने पुराने दिनों की निश्चिंतता और सम्पन्नता को हासिल कर लेगा। 

 




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