विशेष रिपोर्ट

सरकारी एप्लीकेशन भी आपके फोन पर पूरा काबू करना चाहता है!

Posted Date : 03-Aug-2018



विशेष संवाददाता
रायपुर, 3 अगस्त (छत्तीसगढ़)। आज जब पूरी दुनिया में यह बहस छिड़ी हुई है कि फेसबुक या गूगल जैसी वेबसाईटों को इस्तेमाल करने वाले लोगों की कौन-कौन सी जानकारियां इन कंपनियों के कम्प्यूटरों पर दर्ज होती हैं, और उनमें से किसका क्या इस्तेमाल होता है, तब भारत में सरकार की बहुत सी वेबसाईटें इस्तेमाल करने के पहले गैरजरूरी निजी जानकारी मांगती हैं, या कम्प्यूटर-फोन पर अपनी पकड़ बनाने की इजाजत मांगती हैं, जिसके बाद ही लोग उनका इस्तेमाल कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीनों के रिकॉर्ड देखने के लिए, छत्तीसगढ़ भुइयां, नाम का एक मोबाइल एप्लीकेशन बनाया है। इसे फोन पर मुफ्त में डाऊनलोड तो किया जा सकता है, लेकिन इसे इस्तेमाल करने के पहले यह एप्लीकेशन कई तरह की इजाजत मांगता है जिसके बाद ही वह काम करेगा। अगर यह इजाजत नहीं दी जाती है तो कोई भी जानकारी नहीं देखी जा सकती।
अब अगर किसी को किसी खसरा नंबर की जानकारी देखनी है, तो उसके लिए उसे इस एप्लीकेशन को अपने मोबाइलफोन की तस्वीरों, उस पर की वीडियो या ऑडियो फिल्म, और फाईलों तक पहुंचने की इजाजत इस एप्लीकेशन को देनी होगी। इसके अलावा इसे फोटो खींचने और वीडियो रिकॉर्ड करने की इजाजत भी देनी होगी। इसके साथ-साथ यह एप्लीकेशन फोन की टेलीफोन कॉल को मैनेज करने की इजाजत भी मांगता है। जब ये सारी इजाजत दी जाती है तो ही यह एप्लीकेशन काम करना शुरू करता है। 
यह हैरानी की बात है कि एक सरकारी जनसुविधा का एप्लीकेशन किसी के मोबाइलफोन पर इतने किस्म का नियंत्रण हासिल करके क्या करेगा? 
इसी तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक निजी मोबाइल एप को देखें तो वह भी फोन पर तस्वीरों, वीडियो या संगीत, और सभी फाईलों तक पहुंच मांगता है।

इस बार में छत्तीसगढ़ सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स मामलों की एजेंसी चिप्स के सीईओ एलेक्स पॉल मेनन से पूछा गया कि सरकारी एप्लीकेशन इस्तेमाल करके जमीनों के रिकॉर्ड चाहने वाले लोगों को पहले अपने फोन का सारा काबू इस एप्लीकेशन को देने की अनिवार्यता क्यों रखी गई है तो उन्होंने इसकी जानकारी न होने की बात कही, और पता लगाकर बताने को कहा। लेकिन कई दिनों बाद भी उनकी तरफ से इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।




Related Post

Comments