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इन तरीकों को अपनाकर सुरक्षित रख सकते हैं अपने फोन का डेटा

Posted Date : 04-Aug-2018



नई दिल्ली, 4 अगस्त । मोबाइल फोन्स की अड्रेस बुक में आधार का कथित हेल्पलाइन नंबर दिखने की रिपोर्ट्स पर यूआईडीएआईकी ओर से शुक्रवार को बयान जारी होने के बाद यह मामला सुर्खियों में छाया रहा। यूजर्स ने इसे अपनी प्रिवेसी के लिए खतरा बताया, तो यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कहा कि उसने किसी भी टेलिकॉम कंपनी को अपना हेल्पलाइन नंबर यूजर्स की कॉन्टैक्ट लिस्ट में फीड करने को नहीं कहा है। इसके बाद यूजर्स को इस बात का डर सताने लगा कि इससे उनके जरूरी डेटा का गलत इस्तेमाल हो सकता है। हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप इस तरह की समस्या से बच सकते हैं। 
ऐक्सेस की जांच करें 
जब हम कोई ऐप इंस्टॉल करते हैं, तो आमतौर उसके नियम और शर्तों को ज्यादा ध्यान से नहीं पढ़ते हैं। नया ऐप इंस्टॉल होने के बाद पहली बार उसका यूज करने पर वह आपसे कुछ जरूरी ऐक्सेस मांगता है। इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। जब भी आप किसी ऐप का इस्तेमाल करने के दौरान उसे ऐक्सेस दें, तो यह जरूर देखें कि उसे क्या ऐक्सेस दे रहे हैं। सेटिंग में जाकर आप यह देख सकते हैं। 
सही ऐप का इस्तेमाल 
ऐंड्रॉयड यूजर्स तरह-तरह के ऐप इस्तेमाल करते हैं। कई बार हम जानकारी के अभाव में फेक ऐप स्मार्टफोन में इंस्टॉल कर लेते हैं, जो प्रिवेसी के लिए सही नहीं है। हमेशा सही ऐप का इस्तेमाल करें और ऐप स्टोर से बाहर का ऐप मोबाइल में इंस्टॉल न करें। 
ऐक्सेस देने से बचें 
ज्यादातर ऐप कॉन्ट्रैक्ट, मेमोरी, गैलरी, कैमरा और माइक्रोफोन का ऐक्सेस मांगते हैं। ये ऐक्सेस उन ऐप्स को ही दें, जिनका इस्तेमाल इनके बिना संभव न हो। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि वह ऐप आपके लिए कितना जरूरी है। इन बातों का ध्यान रखकर आप काफी हद तक अपने फोन का डेटा सुरक्षित रख सकते हैं। 
डेटा प्रॉटेक्शन लॉ के ड्राफ्ट बिल में प्रस्ताव
डेटा चोरी के मामले की गंभीरता को देखते हुए डेटा चोरी पर रोक के लिए ड्राफ्ट बिल तैयार किया जा चुका है। बीएन श्रीकृष्णा कमिटी ने 27 जुलाई को केंद्र सरकार को इस बिल का ड्राफ्ट सौंपा। इसमें किसी कंपनी के एग्जिक्युटिव्स की जानकारी में या उनकी लापरवाही के चलते डेटा और संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी की चोरी होने पर 5 साल जेल की सजा का प्रस्ताव सुझाया गया है। कमिटी ने सुझाव दिया है कि डेटा प्रॉटेक्शन लॉ के उल्लंघन को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाना चाहिए। 
गूगल ने मांगी माफी, महाराष्ट्र साइबर सेल की अडवाजरी 
यूआईडीएआईके कथित नंबर के फोन में इंस्टॉल पर गूगल ने बयान जारी कर माफी मांग ली है। गूगल ने कहा, हम इस कारण हुई तकलीफ के लिए माफी मांगते हैं। हम लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि यह ऐंड्रॉयड डिवाइस में अनधिकृत प्रवेश का मामला नहीं है। यूजर्स इस नंबर को मैन्यूअली डिलीट कर सकते हैं। उधर, महाराष्ट्र साइबर सेल ने शुक्रवार देर रात एक अडवायजरी जारी कर कहा कि मोबाइल में यूआईडीएआई के नाम से जुड़े नंबर को डिलिट कर दिया जाना चाहिए। (नवभारत टाईम्स)




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