संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 14 सितंबर : एक इंसान जो मिसाल है...

Posted Date : 14-Sep-2018



अमिताभ बच्चन के ट्वीट देखें तो हैरानी होती है कि यह इंसान है या बुलडोजर? सुबह कभी तीन बजे तो कभी चार बजे का किया हुआ ट्वीट पढऩे मिलता है कि अभी-अभी केबीसी की शूटिंग, और फिर उसके बाद किसी एक साऊंड स्टूडियो से रिकॉर्डिंग करके लौट रहे हैं, और कुछ घंटे के भीतर फिर काम पर निकलना है। अमिताभ की उम्र 75 बरस हो गई है, और वे तरह-तरह के हादसों में कभी जानलेवा जख्मों से उबरकर मौत के मुंह से निकलकर आए हैं, तो कभी किसी और बुरी बीमारी से उनके जिंदा बचने की उम्मीद कम थी। आज भी वे मांसपेशियों की एक गंभीर बीमारी के शिकार हैं, लेकिन काम का उनका जज्बा, उनकी मेहनत, और बिना थके आगे चलते जाने का उनका मिजाज देखने लायक है। अलग-अलग देशों में, अलग-अलग मौसमों में, कभी बर्फीली आधी रात में सड़कों पर, तो कभी किसी गर्म देश में, उनके रात और दिन कैसे और कहां गुजरते हैं, यह देखना भी हैरानी खड़ी करता है। 
उनकी मिसाल लेकर यहां पर लिखने का मकसद यह है कि यह वह इंसान है जो जब फिल्म उद्योग में पहुंचा था, तो दुबले बदन पर खजूर के पेड़ सरीखी ऊंचाई देखकर फिल्म निर्माताओं ने कहा था कि नीचे से पैर एक फीट कटवाकर आएं। उस वक्त तक किसी ने ऐसा ऊंचा अभिनेता देखा नहीं था, और उस वक्त की किसी अभिनेत्री के साथ अमिताभ की जोड़ी की कल्पना भी नहीं हो पाती थी। लेकिन वहां से चला कामयाबी का सफर एक वक्त उनकी अपनी कंपनी के दीवालिया हो जाने तक जारी रहा, और वे कर्ज में लद गए। उस वक्त का देश का सबसे ताकतवर, इंदिरा-राजीव का परिवार उनका एकदम करीबी था, लेकिन जाहिर है कि उन्होंने कर्ज चुकाने के लिए उस वक्त प्रधानमंत्री-परिवार की मदद नहीं ली, और मेहनत करके अपने दम पर उस मुसीबत से बाहर निकले। 
आज आसमान छूती कामयाबी, और आसमान से भी ऊंची शोहरत के चलते हुए भी अमिताभ बच्चन के काम करने का जो फौजी अनुशासन है, वह देखने लायक है। जो फिल्म और टीवी उद्योग कामयाबी के साथ-साथ आने वाली बददिमागी के लिए बदनाम हैं, जहां कपिल शर्मा जैसे लोग एक-दो बरस की कामयाबी के नशे में धुत्त होकर धंधे से बाहर ही हो जाते हैं, वहां किसी ने कभी भी अमिताभ के काम पर न पहुंचने के बारे में नहीं सुना, और न ही किसी से उनकी बदसलूकी सुनी। जब परिवार में इतनी मेहनत से कमाई की जरूरत नहीं रह गई है, तब भी एक मशीन जैसी ताकत से अमिताभ रात-दिन मेहनत करते हैं, और उनको देखकर देश के बाकी लोग बहुत कुछ सीख भी सकते हैं। समाज के भले के लिए अमिताभ के किए हुए बहुत अधिक काम बहुत अधिक याद नहीं पड़ते, लेकिन किस इंसान के व्यक्तित्व और उनकी सोच में कमी या खामी नहीं रहती है। ऐसे में अमिताभ की जिंदगी के उतार-चढ़ाव बाकी उन लोगों को एक हौसला दे सकते हैं जो कि अपनी जिंदगी से थके हुए हैं, निराश हैं, या बेजा आदतों में डूबे हुए हैं। अमिताभ बच्चन किसी भी नशे से दूर रहकर जिस चौकन्नेपन के साथ अपने आपको पल-पल काम के लिए तैयार रखते हैं, उस रूख को देखकर भी कई पीढिय़ां बहुत कुछ सीख सकती हैं।
- सुनील कुमार 




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