सामान्य ज्ञान

केजीबी

Posted Date : 11-Oct-2018



केजीबी पूर्व सोवियत संघ की इंटेलीजेन्स संस्था थी।  11 अक्टबूर 1991 को  केजीबी ने इस संघ के विघटन से कुछ पहले अपनी सक्रियता समाप्त कर दी। 
केजीबी का गठन सोवियत संघ की कम्युनिस्ट शासन व्यवस्था का अंत करने के लिए जारी षडयंत्रों का मुक़ाबला करने के लिए किया गया था। इस संस्था का उद्देश्य कम्युनिस्ट शासन के विरोधियों का सफ़ाया करना था। केजीबी की शक्ति धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि कम्युनिस्ट पार्टी ने इससे बहुत बड़े-बड़े काम करवाना आरंभ कर दिया। 
केजीबी की समाप्ति के बाद इसके दायित्वों को दो संस्थाओं के और बी में बांट दिया गया। एक संस्था आंतरिक इंटेलीजन्स के रूप में काम करती है जबकि दूसरी संस्था का काम देश के बाहर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।
 क्या है प्रत्यार्पण संधि
प्रत्यर्पण संधि आतंकवाद से निपटने के लिहाज से तैयार की गई है और इस प्रत्यर्पण संधि में कुछ इंकार के प्रावधान भी हैं। यदि किसी व्यक्ति का प्रत्यर्पण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता हो, तो संबंधित देश प्रत्यर्पण अनुरोध को खारिज कर सकता है। इस समझौते के तहत सिर्फ हत्या और नरसंहार जैसे गंभीर अपराधों के आरोपों में बंद कैदियों का ही प्रत्यर्पण संभव होना है।  प्रत्यर्पण संधि से आपराधिक गतिविधियों पर काबू पाने में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों को मदद प्राप्त होनी है। 
समझौते के अनुसार हत्या, गैरइरादतन हत्या और अन्य गंभीर अपराधों के मामलों में आरोपी व्यक्ति इस समझौते के दायरे में आने हैं और एक वर्ष से कम के कारावास की सजा वाले अपराधी इसके दायरे में नहीं आते हैं। राजनीतिक अपराधों के आरोपी संधि के दायरे में नहीं आते हैं।
भारत के साथ कई देशों के बीच प्रत्यार्पण संधि है। थाइलैंड के साथ इसी वर्ष भारत ने यह संधि की है।  हाल ही में  बांग्लादेश के मंत्रिमंडल ने भारत के साथ प्रस्तावित प्रत्यर्पण संधि को मंजूरी दी है। अब इसे बांग्लादेश की संसद की मंजूरी मिलना बाकी है।  संधि लागू होने के बाद उल्फा के शीर्ष कमांडर अनूप चेतिया समेत बांग्लादेश की जेलों में बंद भारतीय उग्रवादियों का प्रत्यर्पण संभव हो जाएगा। 




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