विशेष रिपोर्ट

पहले दौर की डेढ़ दर्जन सीटों में से दर्जन भर पर मुकाबला आमने-सामने

Posted Date : 03-Nov-2018



शशांक तिवारी
रायपुर, 3 नवंबर (छत्तीसगढ़)। विधानसभा की पहले चरण की 18 में से 11 पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। सिर्फ कोंटा सीट ही ऐसी है, जहां कांग्रेस और भाजपा से परे अन्य दल के प्रत्याशी की दमदार मौजूदगी दिख रही है। यहां तीनों में से कौन बाजी मारेगा, यह अनुमान लगा पाना फिलहाल कठिन दिख रहा है। इससे परे 6 सीटों पर जोगी पार्टी-बसपा गठबंधन और सीपीआई के प्रत्याशी अच्छे- खासे वोट बटोरने की स्थिति में दिख रहे हैं।  
बस्तर संभाग और राजनांदगांव जिले की विधानसभा सीटों पर 12 तारीख को मतदान होगा। पहले चरण की सीटों पर कांग्रेस और भाजपा ने अपनी ताकत झोंक दी है। भाजपा ने यहां आक्रामक प्रचार की रणनीति बनाई है और प्रचार के लिए केंद्रीय मंत्रियों को उतारा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी रविवार को बस्तर आने वाले हैं। कांग्रेस भी प्रचार में ज्यादा पीछे नहीं है। कांग्रेस के बड़े नेता अलग-अलग क्षेत्रों में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे हैं। बसपा-जोगी पार्टी गठबंधन का भी प्रचार चल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी लगातार चुनावी सभा को संबोधित कर रहे हैं। 
पिछले चुनाव में कांग्रेस को पहले चरण की 18 में से 12 सीटों पर जीत मिली थी। भाजपा को मात्र 6 सीटें मिली थी। इस बार भी पहले चरण की सीटों पर कांग्रेस अपनी बढ़त बरकरार रखने के लिए भरसक मेहनत कर रही है। फिलहाल पहले चरण की सीटों में प्रचार-प्रसार का आंकलन करने पर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि कोंटा ही एकमात्र ऐसी सीट है जहां कांग्रेस के कवासी लखमा, भाजपा के बारसे धनीराम और सीपीआई के पूर्व विधायक मनीष कुुंजाम के बीच बराबरी का मुकाबला दिख रहा है। कोंटा में भाजपा, छिंदगढ़ में कांग्रेस और सुकमा इलाके में सीपीआई की पकड़ मजबूत दिख रही है। यहां मुकाबला त्रिकोणीय हैं। ऐसे में ऊंट किस करवट पर बैठेगा, इसका अंदाज लगा पाना फिलहाल मुश्किल है। कोंटा से परे भानुप्रतापपुर, दंतेवाड़ा, खैरागढ़, मोहला-मानपुर, डोंगरगढ़ और खुज्जी में अन्य दलों की दमदार मौजूदगी दिख रही है। जबकि  राजनांदगांव, डोंगरगांव, बीजापुर, चित्रकोट, बस्तर, जगदलपुर, कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, केशकाल, अंतागढ़ में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर के आसार दिख रहे हैं। 
जोगी पार्टी-बसपा गठबंधन के साथ-साथ सीपीआई कुल मिलाकर 5 और एक जगह डोंगरगढ़ में निर्दलीय उम्मीदवार जीत-हार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। जोगी पार्टी के उम्मीदवार पूर्व सांसद देवव्रत सिंह खैरागढ़ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और वे यहां काफी कुछ वोट बटोरने की स्थिति में दिख रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा के असंतुष्ट नेताओं का साथ उन्हें मिल रहा है। कांग्रेस से मौजूदा विधायक गिरवर जंघेल और भाजपा के पूर्व संसदीय सचिव कोमल जंघेल मुकाबले में हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में किसान संघ से जुड़े लोगों का समर्थन गिरवर के पक्ष में दिख रहा है। ऐसे में यहां मुकाबला कांटे का हो चला है। 
मोहला-मानपुर में वैसे तो कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है, लेकिन जोगी पार्टी के उम्मीदवार संजीत ठाकुर ने दोनों के नाक में दम कर दिया है। जाति समीकरण के लिहाज से कांग्रेस की स्थिति यहां मजबूत दिख रही है। इसी तरह भानुप्रतापपुर सीट से कांग्रेस के मनोज मंडावी और भाजपा के देवलाल दुग्गा के बीच मुकाबले में आम आदमी पार्टी के कोमल उपेंडी और जोगी पार्टी के मानक दरपट्टी निर्णायक भूमिका में दिख रहे हैं। उपेंडी को आम आदमी पार्टी ने सीएम प्रोजेक्ट किया है। इसके अलावा खुज्जी से जोगी पार्टी के उम्मीदवार जनरैल सिंह भाटिया, कांग्रेस प्रत्याशी छन्नी साहू और भाजपा के डॉ. नीरेंद्र साहू के बीच जगह बनाने की कोशिश कर रहे है। दंतेवाड़ा सीट से सीपीआई के नंदराम सोरी भी कांग्रेस की देवती कर्मा और भाजपा के भीमा मंडावी के बीच मुकाबले में हैं। पिछले चुनाव में भी सीपीआई उम्मीदवार ने यहां दस हजार से अधिक मत पाए थे। सीपीआई का ग्रामीण इलाकों में अच्छा आधार है। इस बार भी सीपीआई उम्मीदवार अच्छे-खासे मत पाने की स्थिति में दिख रहे हैं। इन सबके बावजूद मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच में ही है।  
डोंगरगढ़ सीट मेें कांग्रेस और भाजपा के बीच निर्दलीय उम्मीदवार तरूण हथेल दमदार मौजूदगी का अहसास करा रहे हैं। तरूण नगर पालिका के अध्यक्ष हैं और वे निर्दलीय ही अध्यक्ष बने थे। उनका प्रचार-प्रसार ग्रामीण इलाकों में भी बेहतर ढंग से चल रहा है। बहरहाल, तीसरे दलों के उम्मीदवार जीत-हार में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। 




Related Post

Comments