संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 4 नवंबर : पाकिस्तान के ताजा उन्माद से सबक लेने की जरूरत..

Posted Date : 04-Nov-2018



पाकिस्तान में ईश्वर की निंदा के आरोप में निचली एक अदालत से सजा पाई हुई एक महिला को सुप्रीम कोर्ट ने बरी क्या कर दिया, देश में बवाल मच गया है। इस ईसाई महिला, आसिया बीबी, को मोहम्मद पैगंबर का अपमान करने के मामले में निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, और आठ बरस की लंबी अदालती लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे बेकसूर पाया। लेकिन देश में मजहबी कट्टरपंथियों ने सड़कों पर इतना बवाल किया है कि आसिया बीबी का परिवार देश छोड़कर जाने में ही अपनी हिफाजत देख रहा है, और उनका वकील भी देश छोड़कर जा रहा है। दूसरी तरफ खबर यह है कि हिंसक प्रदर्शनों को रोकने के लिए पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने कट्टरपंथियों के साथ यह समझौता किया है कि आसिया बीबी को देश छोड़कर जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। दस बरस की कैद काटकर निकलने के बाद भी यह महिला सिर छुपाए घूम रही है। यह एक अलग बात है कि सरकार उसकी हिफाजत का दावा कर रही है। सड़कों पर हो रहे हिंसक प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ भी हिंसक फतवे दे रहे हैं, और पाकिस्तान के अमन-पसंद लोगों को यह समझ आ रहा है कि वहां का ईशनिंदा कानून अल्पसंख्यकों को फंसाने का जरिया बन गया है, और साथ ही वह मुस्लिमों को और अधिक हिंसक-कट्टरपंथी बना रहा है। इस बीच फैसला देने वाले वकीलों ने कहा है कि वे इस्लाम के हिसाब से फैसला नहीं देते, देश के संविधान के हिसाब से फैसला देते हैं। 
यह सिलसिला बहुत खतरनाक इसलिए है कि वहां पर बहुसंख्यक मुस्लिम समाज पूरी तरह से इस कानून को लागू करने को लेकर हमेशा हिंसक रहा, और इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ एक हथियार बनाया गया। पाकिस्तान घोषित रूप से एक इस्लामिक देश है, इसलिए वहां पर बहुसंख्यक तबका अपने धर्म को दूसरों पर थोपने को अपना हक मानता है। इस मुद्दे पर लिखना आज यहां जरूरी इसलिए है कि पाकिस्तान के ठीक पड़ोस में बसा हुआ हिन्दुस्तान तरह-तरह से बहुसंख्यक तबके की तानाशाही का खतरा झेल रहा है। न सिर्फ केन्द्र में सत्तारूढ़ गठबंधन की मुखिया भाजपा के कई नेता, कई मंत्री, और मुख्यमंत्री अयोध्या की विवादित जमीन पर मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश लाकर कानून में संशोधन के लिए खुले फतवे दे रहे हैं, और हर दिन अलग-अलग कोनों से इसके लिए बयान आ रहे हैं। भाजपा की एक भूतपूर्व सहयोगी पार्टी शिवसेना भी इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ जुटी हुई है क्योंकि 1992 में जब बाबरी मस्जिद को गिराया गया था, तब शिवसेना पहली पार्टी थी जिसके मुखिया ने सार्वजनिक रूप से इस विध्वंस की जिम्मेदारी ली थी और बयान दिया था कि बाबरी मस्जिद के गुम्बद शिवसैनिकों ने गिराए हैं। 
आज भी संवैधानिक पदों पर बैठे हुए बहुत से लोग लगातार यह बात करते हैं कि हिन्दुओं के देश भारत में अगर कानून बनाकर मंदिर नहीं बनाया जाएगा तो कहां बनाया जाएगा? इस देश पर हिन्दुओं का दूसरे धर्मों से अधिक हक गिनती मेें अधिक होने का हो सकता है, लेकिन किसी एक धर्म को दूसरे धर्म से अधिक संवैधानिक अधिकार नहीं दिए गए हैं। ऐसे में एक हिन्दू राष्ट्र बनाने की कल्पना कुछ उसी किस्म की है जिस तरह से एक मुस्लिम पाकिस्तान बनाया गया था। जो लोग यह सोचते हैं कि हिन्दुस्तान को एक हिन्दू-पाकिस्तान बनाना बेहतर होगा, उन्हें आज पाकिस्तान में चल रही धर्मान्ध और साम्प्रदायिक कट्टर-हिंसा को भी समझ लेना चाहिए, और उसके खतरों को देख लेना चाहिए। वैसे भी हाल के बरसों में भारत में जिस तरह से बहुसंख्यक तबके के धार्मिक और सांप्रदायिक उन्माद ने सड़कों पर अभूतपूर्व हिंसा दिखाई है, उससे भी यह सबक अब तक ले लिया जाना था, लेकिन लिया नहीं गया है। दुनिया के इतिहास में वे ही देश अधिक समझदार रहते हैं जो कि दूसरों के हादसों से सबक लेकर वक्त के पहले खुद सम्भल जाते हैं। भारत में धार्मिक और साम्प्रदायिक उन्माद बढ़ाने वालों को यह सोचना चाहिए कि क्या वे अपनी अगली पीढ़ी को आज के पाकिस्तान सरीखा माहौल देकर जाना चाहते हैं? आज पाकिस्तान में अधिकतर धार्मिक हत्याएं बहुसंख्यक मुस्लिम तबके के हाथों मुस्लिमों की ही हो रही है, गैरमुस्लिमों की नहीं। एक हिन्दू पाकिस्तान बनकर भारत अपनी बहुसंख्यक हिन्दू आबादी के लिए ही अधिक खतरनाक होगा।
-सुनील कुमार

 




Related Post

Comments