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बुलंदशहर हिंसा: क्या पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत के मामले का इज्तिमा से कोई संबंध है?

Posted Date : 04-Dec-2018



सत्याग्रह ब्यूरो
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सोमवार को भीड़ की हिंसा में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत के मामले को सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक रंग दिए जाने की कोशिश की जा रही है। इस काम में मीडिया का एक हिस्सा भी हाथ बंटाता दिख रहा है। दरअसल इस घटना के कुछ ही देर बाद एक दक्षिणपंथ समर्थक चैनल के संपादक ने ट्वीट करके यह जताने की कोशिश की कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत का संबंध बुलंदशहर में चल रहे इज्तिमा से है। नीचे आप उनके ट्वीट देख सकते हैं।
पहले ट्वीट में सुदर्शन चैनल के संपादक सुरेश चव्हाणके इस घटना को ‘बुलंदशहर_इज्तिमा का बवाल’ बता रहे हैं। इज्तिमा का मतलब मुस्लिम समाज के लोगों के एक जगह इक_ा होने से है। यह सम्मेलन या कार्यक्रम धार्मिक शिक्षा सीखने-सिखाने के लिए आयोजित किया जाता है। बहरहाल, पुलिस इंस्पेक्टर की मौत की घटना को इज्तिमा से जोड़ते हुए चव्हाणके स्थानीय लोगों के हवाले से बताते हैं कि स्कूलों में बच्चे फंस गए, कई लोग जंगल में रह गए और कइयों ने घर के दरवाजे बंद कर लिए।
वहीं, दूसरे ट्वीट में सुरेश चव्हाणके सुबोध कुमार की मौत के मामले से कहीं और पहुंच जाते हैं। वे हैशटैग प्तबुलंदशहरइज्तेमा लिखकर कहते हैं कि इस सम्मेलन के आयोजक ‘तब्लीगी जमात’ सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर पहले से है। आगे उन्होंने और आरोप भी लगाए हैं जिन्हें आप ट्वीट में (ऊपर) पढ़ सकते हैं।
लेकिन बुलंदशहर की पुलिस ने सुदर्शन चैनल के संपादक के ट्वीट को खारिज किया है। उसने अपने ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट किया है। इसमें पुलिस ने बाकायदा चव्हाणके के ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा है, ‘कृपया भ्रामक खबर न फैलाएं। इस घटना का इज्तिमा कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है। इज्तिमा सकुशल सम्पन्न समाप्त हुआ है। उपरोक्त घटना इज्तिमा स्थल से 45-50 किलोमीटर दूर थाना स्याना क्षेत्र में घटित हुई है जिसमें कुछ उपद्रवियों द्वारा घटना कारित की गई है। इस संबंध मे वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।’ नीचे पुलिस के ट्वीट को देखा जा सकता है।
साफ है कि मुस्लिम समुदाय के कार्यक्रम को जबरदस्ती इस घटना से जोड़ा जा रहा है। उधर, इस घटना की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन कर दिया है। उसकी रिपोर्ट में क्या जानकारी सामने आएगी यह अभी देखने वाली बात है। हालांकि पुलिस की शुरुआती जांच के आधार पर कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि यह पूरा हंगामा एक साजिश के तहत किया गया हो सकता है।
हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट में पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि घटनास्थल के नजदीक खेत में दिखावे के लिए गाय के अवशेष जगह-जगह लटका कर रखे गए थे। रिपोर्ट में अधिकारियों और पुलिस सहित ग्रामीणों के भी बयान दर्ज किए जाने की बात कही गई है। इस बारे में रिपोर्ट में लिखा है, ‘महाव गांव में घटनास्थल पर पहुंचने वालों में सबसे पहले प्रशासनिक अधिकारियों में स्याना तहसीलदार राजकुमार भास्कर थे। उनका कहना है कि ईख के कई खेतों में गोवंश कटान कर रखा था। गाय के सिर और खाल आदि अवशेष गन्ने पर लटका रखे थे जो दूर से ही दिख रहे थे। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति गोकशी करेगा तो वह अवशेषों को इस तरह से नहीं लटकाएगा। आरोपी यही चाहेगा कि किसी को इस बात का पता नहीं चले। ऐसे में अधिक संभावना यही है कि सिर्फ माहौल को भडक़ाने के लिए गोकशी की गई हो।’
ये तथ्य जानने के बाद इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर आ रही किसी भी जानकारी को दो बार चेक किया जाना चाहिए। सुरेश चव्हाणके के ट्वीट या तो इस गलती का नतीजा हैं या फिर जानबूझकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश।

 




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