संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 4 दिसंबर : योगीराज का यह बदहाल बहुत हैरान नहीं करता है

Posted Date : 04-Dec-2018



उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में कल जिस तरह एक गाय मारने का आरोप लगाती हुई भीड़ ने जिस तरह वहां तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या कर दी, उस पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तो कोई फिक्र नहीं होगी, लेकिन बाकी देश को यह सोचना चाहिए कि गाय के नाम पर हिंसा और गुंडागर्दी करके गर्व महसूस करने वाले लोगों ने देश को आज यह किस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है कि एक धर्मालु-हिंदू पुलिस इंस्पेक्टर ड्यूटी करते हुए धर्मांध और हिंसक हिंदू भीड़ के हाथों मारा जाता है, और यह सब कुछ गाय के नाम पर होता है। उत्तरप्रदेश सरकार की बढ़ाई गई, सरकार की फैलाई गई साम्प्रदायिकता के उकसावे में सुलग रहा है, जल रहा है, और किसी भी दिन बड़े विस्फोट का शिकार हो सकता है। जिस तरह घोर साम्प्रदायिक हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों ने कल की इस हत्या की अगुवाई की है, उन सबके नाम पुलिस की रिपोर्ट में सामने आ गए हैं, और वे सब योगीराज में लगातार सक्रिय और सत्ता के संरक्षण में आगे बढ़ रहे संगठनों के लोग हैं।
भीड़ जब हत्यारी हो जाती है, तो उसके पीछे या तो उस देश-प्रदेश की सरकार का परले दर्जे का निकम्मापन होता है या बहुत से मामलों में यह सरकार का दिया हुआ बढ़ावा होता है। उत्तरप्रदेश में ये दोनों ही बातें दिख रही हैं। एक तरफ तो योगी आदित्यनाथ चुनाव में कम से कम चार प्रदेशों में अब तक भड़काऊ और जलाऊ भाषण देते हुए घूम रहे हैं, और दूसरी तरफ खुद उनके प्रदेश में कानून की हालत जल रही है। जिस तरह उत्तरप्रदेश का भौतिक भगवाकरण सरकारी खर्च पर किया गया है, जिस तरह उस प्रदेश को एक हिंदू राज बनाया गया है, उसे देखते हुए अब महज सुप्रीम कोर्ट से कोई उम्मीद हो सकती है कि वह देश के इस सबसे बड़े प्रदेश में लोकतंत्र वापिस स्थापित करे। कहने के लिए सुप्रीम कोर्ट पिछले महीनों में भीड़ हत्याओं को लेकर सरकारों को काफी फटकार लगा चुका है, लेकिन यह भीड़ हत्या को और चार कदम आगे बढ़ चुकी है जिसमें ड्यूटी कर रहा अच्छी साख वाला एक जिम्मेदार पुलिस इंस्पेक्टर मारा गया, और उसकी हत्या का वीडियो बनाकर हत्यारे फख्र हासिल कर रहे हैं। यह बात भी सामने आई है कि यह इंस्पेक्टर पहले एक दूसरी भीड़ हत्या की जांच कर रहा था, और ईमानदारी से कर रहा था, इसलिए उसे वहां से हटाया गया, और आज इस इंस्पेक्टर की बहन ने यह आरोप लगाया है कि उसके भाई की हत्या में पुलिस वाले भी शामिल हैं।
उत्तर भारत में ही बगल के बिहार में अनाथाश्रमों की बच्चियों से संगठित और लंबे समय से चल रहे, सत्तारूढ़ मेहरबानी वाले लोगों द्वारा बलात्कार पर सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार, उसके अफसरों, और उसकी पुलिस को इतना फटकार चुका है कि इसके बाद राज्य सरकार को बर्खास्त करना ही बाकी रह जाता है। और हफ्ते भर के भीतर पड़ोस के उत्तरप्रदेश में साम्प्रदायिक अराजकता इस कदर हावी हो गई है कि हिंदू गुंडों ने हिंदू इंस्पेक्टर की ही हत्या कर दी। सुनने वालों को इस बात में साम्प्रदायिकता नजर नहीं आएगी, लेकिन यह पूरा मुद्दा किसी गाय को मारने के आरोप में एक साम्प्रदायिक तनाव खड़ा करने के अलावा और कुछ नहीं था। जिस राज्य का मुख्यमंत्री अपने राज्य में साम्प्रदायिकता के बीज बोने के लिए सरकारी खर्च करने के बाद दूसरे राज्यों में घूम-घूमकर नफरत फैला रहा है, उस राज्य का यह हाल बहुत हैरान नहीं करता है।
- सुनील कुमार 




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