सोशल मीडिया

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Posted Date : 05-Dec-2018



बजरंगबली कांड खत्म हुआ...अब बजरंग दल का कांड शुरू हो चुका है!
सोमवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुई हिंसा का मामला सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले दो एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें से एक गोहत्या की घटना को लेकर है। दूसरी एफआईआर इस मसले पर हिंसा भडक़ाने वालों के खिलाफ दर्ज की गई है और इसमें बजरंग दल के एक स्थानीय नेता योगेश राज का नाम भी शामिल है। सोशल मीडिया में इस खबर के चलते कई लोगों ने बजरंग दल पर पाबंदी लगाने की मांग की है। ट्विटर हैंडल 2311अभिषेक पर प्रतिक्रिया है, अगर बजरंग दल जैसे संगठनों पर पाबंदी लग जाए तो उत्तर प्रदेश की आधी समस्याएं वैसे ही दूर हो जाएंगी।
बजरंग दल विश्व हिंदू परिषद का आनुषंगिक संगठन है, जिसे भाजपा का करीबी माना जाता है। यही वजह है कि बुलंदशहर हिंसा को लेकर सोशल मीडिया में भाजपा को आज भी जमकर घेरा गया है। फेसबुक पर विशाल विक्रम सिंह की पोस्ट है, ‘समाज में उपद्रवी हमेशा से रहे हैं पर दुखद है कि भाजपा सरकार इन उपद्रवियों का संगठन तैयार कर रही है...’ बीते दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हनुमान जी को ‘दलित’ समुदाय का बताए जाने के बाद इस बेतुके बयान पर वैसे ही बेसिर-पैर के बयान लगातार आ रहे हैं। बुलंदशहर हिंसा मामले को लेकर कई लोगों ने योगी के इस बयान का हवाला देकर भी टिप्पणियां की हैं। अनुग्रह मिश्रा ने लिखा है, ‘बजरंगबली कांड खत्म हुआ... अब बजरंग दल का कांड शुरू हो चुका है। ये भगवा वाले भी न...’
बुलंदशहर हिंसा के मामले में सोशल मीडिया पर आज आई कुछ और प्रतिक्रियाएं -
रफाल पन्सटर- बुलंदशहर जैसे मामले तब होते हैं जब प्रदेश का नेता चुनावी रैलियों में अली-बजरंगबली जैसी बातें करता है।
रिपब्लिक ऑफ फेकोस्लोवाकिया-प्रदेश में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस कमिश्नर से मैडल प्राप्त करते हुए ‘मोरल पुलिस इंस्पेक्टर’ अजय सिंह बिष्ट
ऐसी तैसी डेमोक्रेसी-कोई भरोसा नहीं कि उत्तर प्रदेश की उस भीड़ में से कोई अगले बीस वर्षों में प्रदेश का मुख्यमंत्री बन जाए।
अतुल खत्री - अगर भाजपा दीपिका पादुकोण है तो विहिप और आरएसएस सब्यसाची हैं (दीपिका पादुकोण के पसंदीदा फैशन डिजाइनर) और अगर भाजपा नेटफ्लिक्स है तो विहिप और आरएसएस राधिका आप्टे।
मंजुल-‘बजरंगबली ने पूरे भारतीय समुदाय को जोड़ा था’
‘हां, पर उनके नाम पर बने संगठन के बारे यह कहना बड़ा मुश्किल है!’ (सत्याग्रह)

 




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