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सनातन पर उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी से उत्तर भारत में सियासी बवाल लेकिन दक्षिण भारत में कैसी प्रतिक्रिया है?
05-Sep-2023 7:01 PM
सनातन पर उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी से उत्तर भारत में सियासी बवाल लेकिन दक्षिण भारत में कैसी प्रतिक्रिया है?

photo : twitter

- मुरलीधरन काशीविश्वनाथन

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान से विवाद की आँच उत्तर भारत तक पहुँच गई है.

दरअसल, बीते शुक्रवार यानी एक सितंबर को मार्क्सवादी पार्टी से जुड़ा संगठन तमिलनाडु प्रगतिशील लेखक और कलाकार संघ की ओर से चेन्नई के कामराजार एरिना में सनातन उन्मूलन सम्मेलन का आयोजन किया गया था.

इसमें भाग लेते हुए उदयनिधि स्टालिन ने भारतीय मुक्ति संग्राम में आरएसएस का योगदान शीर्षक से व्यंग्यचित्रों वाली एक पुस्तक का विमोचन किया. उन्होंने सनातन धर्म और बीजेपी को लेकर भी भाषण दिया था.

उदयनिधि स्टालिन ने अपने संबोधन में कहा था, "इस सम्मेलन का शीर्षक बहुत अच्छा है. आपने 'सनातन विरोधी सम्मेलन' के बजाय 'सनातन उन्मूलन सम्मेलन' का आयोजन किया है. इसके लिए मेरी बधाई. हमें कुछ चीज़ों को ख़त्म करना होगा.''

''हम उसका विरोध नहीं कर सकते. हमें मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना वायरस इत्यादि का विरोध नहीं करना चाहिए."

"हमें इसका उन्मूलन करना चाहिए. सनातन धर्म भी ऐसा ही है. तो पहली चीज़ यही है कि हमें इसका विरोध नहीं करना है बल्कि इसका उन्मूलन करना है. सनातन समानता और सामाजिक न्याय के ख़िलाफ़ है. इसलिए आपलोगों ने सम्मलेन का शीर्षक अच्छा रखा है. मैं इसकी सराहना करता हूँ."

"फासीवादी ताक़तें हमारे बच्चों को पढ़ने से रोकने के लिए कई योजनाएं लेकर आ रही हैं. सनातन की नीति यही है कि सबको नहीं पढ़ना चाहिए. एनईईटी परीक्षा इसका एक उदाहरण है."

उनकी इन्हीं बातों को सनातन धर्म के विरोध और उसे ख़त्म करने के संबोधन के तौर पर पूरे देश में बताया जा रहा है. इसकी शुरुआत भारतीय जनता पार्टी के आईटी विंग के प्रमुख अमित मालवीय ने दो सितंबर को की.

उन्होंने दो सितंबर उदयनिधि स्टालिन के भाषण का एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि 'उदयनिधि ने "भारत में सनातन धर्म का पालन करने वाले 80 प्रतिशत लोगों को ख़त्म करने" का आह्वान किया था.'

विरोध में आगे आई बीजेपी

इसके बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस बयान को लेकर कई बयान सामने आए. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उदयनिधि के भाषण की निंदा की.

राजस्थान के डूंगरपुर में एक जनसभा में अमित शाह ने कहा, "भारतीय गठबंधन की दो सबसे बड़ी पार्टियों डीएमके और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बेटे सनातन धर्म को ख़त्म करने की बात कर रहे हैं. क्या आप सनातन धर्म को ख़त्म करने के लिए तैयार हैं?"

देश भर के हिंदू संगठनों के तमाम नेताओं और सदस्यों ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर उदयनिधि के बयान की निंदा की.

तमिलनाडु में बीजेपी के मौजूदा राज्य सचिव ए. अश्वत्थामन ने राज्यपाल आरएन रवि से उदयनिधि के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति मांगी. वहीं दिल्ली में विनीत जिंदल ने उदयनिधि के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस में चार धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराई है.

वहीं कई मीडिया आउटलेट्स ने उदयनिधि के संबोधन की आलोचना करते हुए लिखा है कि इससे आने वाले दिनों संयुक्त विपक्ष यानी इंडिया गठबंधन को नुकसान हो सकता है.

कई टीवी चैनलों पर इस तरह के डिबेट प्रोग्राम भी प्रसारित हुए हैं. लेकिन यह सब केवल उत्तर भारत में देखने को मिला है.

जहाँ तक तमिलनाडु की बात है तो वहाँ लंबे समय से सनातन विरोधी राजनीति चली आ रही है. उदयनिधि के इस भाषण को उसी के एक हिस्से के तौर पर देखा गया है.

द्रविड़ कषगम के संस्थापक नेता पेरियार ने हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ कड़े विचार व्यक्त किए थे. वे जीवन भर हिंदू धर्म के उन्मूलन, रामायण के विरोध और मंदिरों के उन्मूलन पर लेख लिखते रहे.

उनके बाद द्रविड़ कषगम और पेरियार के अनुयायी समय-समय पर ऐसे विचार व्यक्त करते आए हैं.

तमिलनाडु में सनातन विरोध

तमिलनाडु की दलित राजनीतिक पार्टी, विड़ूदलाई चिरुतैगल कच्ची (वीसीके) के मौजूदा अध्यक्ष तोल थिरुमावलवन लगातार सनातन विरोध की बात करते रहे हैं.

उन्होंने सनातन के ख़िलाफ़ कई बड़े सम्मेलन आयोजित किए हैं. 2018 में पेरियार के स्मृति दिवस पर, थिरुमावलवन ने कहा था, "सामाजिक न्याय की जीत होगी और हम उस दिन सनातन को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे".

उसके बाद, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले, थिरुमावलवन ने जनवरी में त्रिची में देसम कप्पोम नामक एक विशाल सम्मेलन आयोजित किया और कहा, "सनातन ख़त्म होने पर ही भाईचारा कायम रहेगा. सनातनी ताक़तों द्वारा इस देश को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करना हमारा कर्तव्य है."

"सनातन सिद्धांत और लोकतांत्रिक सिद्धांत के बीच दो हज़ार साल पुराना संघर्ष है. वे वर्षों पहले मौजूद सनातन सिद्धांत को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर सनातन सत्ता में वापस आते हैं, तो वर्णाश्रम और जातिगत भेदभाव फिर से अपना सिर उठाएगा."

इसी सम्मेलन में उस समय विपक्ष में रहे डीएमके के नेता एमके स्टालिन ने भी भाग लिया और भाषण दिया.

थिरुमावलवन ने 2021 विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में नारा दिया था, "आओ सनातन को जड़ से उखाड़ें, चलो लोकतंत्र की रक्षा करें." कई अन्य अवसरों पर उन्होंने पार्टी स्वयंसेवकों से वादा किया है कि वे स्वयंसेवकों के साथ मिलकर सनातन को उखाड़ फेंकेंगे.

पिछले साल भी विड़ूदलाई चिरुतैगल कच्ची (वीसीके), डीएमके और कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा थी. उस वक्त बीजेपी ने कहा था कि कांग्रेस गठबंधन की एक पार्टी सनातन धर्म के विरोध की बात कर रही है. लेकिन थिरुमावलवन के भाषणों पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिली थी.

उदयनिधि के बयान इतना विवाद क्यों?

उदयनिधि के बयान को लेकर देशव्यापी स्तर पर विरोध देखने को मिल रहा है, ऐसा क्यो हैं, यह पूछे जाने पर विड़ूदलाई चिरुतैगल कच्ची (वीसीके) के सांसद डी रविकुमार कहते हैं, "क्योंकि लोगों की बीजेपी से शिकायतें बढ़ रही हैं, उनकी सरकार पर प्रशासनिक अक्षमता के आरोप लग रहे हैं, इसलिए यह सारा विरोध लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है."

"शुरुआत में तो उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इंडिया अलायंस इस तरह एकजुट रहेगा. उन्हें लगा कि ऐसा नहीं होगा. लेकिन गठबंधन बना और लगातार आगे बढ़ रहा है और यह उनके लिए बड़ा ख़तरा है. लिहाजा लोगों का ध्यान भटकाने के लिए उन्होंने इस मुद्दे को अपने हाथ में लिया है."

जब उत्तर भारत में हर कोई उदयनिधि के बयान का विरोध कर रहा है तब डी रविकुमार कहते हैं, ''सनातन का अर्थ क्या है और इसका अर्थ क्या है, इस पर बहस उत्तर भारत में भी होने दीजिए.''

रविकुमार का यह भी मानना है कि इससे वोट बैंक की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा, "उन्होंने कर्नाटक राज्य को हिंदुत्व की प्रयोगशाला के रूप में आजमाया. लेकिन वे अगले चुनाव में ही हार गए. जब क़ीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं तो इस बात को बहस का रूप देने से कोई फ़ायदा नहीं होगा. इससे चुनाव में विपक्षी दलों को कोई नुक़सान नहीं होगा."

वैसे चुनाव नज़दीक होने के चलते भी यह तो स्वाभाविक है कि विपक्षी इंडिया गठबंधन को इससे संबंधित सवालों का सामना करना होगा. जहाँ तक कांग्रेस की बात है तो तमिलनाडु कांग्रेस के नेता उदयनिधि स्टालिन के विचारों का समर्थन करते हैं.

सांसद कार्तिक चिदंबरम ने कहा, "सनातन धर्म तमिलनाडु में एक जाति संरचना है. इसके अलावा, इसका कोई अन्य दार्शनिक अर्थ नहीं है. उदयनिधि ने जो कहा, उसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. उन्होंने किसी जातीय समूह के विनाश का आह्वान नहीं किया."

कांग्रेस ने दिया जवाब

इस बारे में पूछे जाने पर कर्नाटक के राज्य मंत्री और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे ने जवाब दिया, "कोई भी धर्म जो समानता को बढ़ावा नहीं देता है, जो मानव गरिमा सुनिश्चित नहीं करता है, वह एक बीमारी की तरह ही है."

कांग्रेस पार्टी ने इस पर अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिक्रिया दी है. पार्टी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा, ''सर्वधर्म समाज को लेकर कांग्रेस पार्टी में सर्वसम्मति है. हमारे गठबंधन में सभी दलों को अपने विचार व्यक्त करने का पूरा अधिकार है."

उन्होंने विवाद को दरकिनार करते हुए कहा, ''हम सभी धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हैं, हम सभी की आस्थाओं का सम्मान करते हैं.''

जहां तक उत्तर भारत के कांग्रेस नेताओं की बात है तो वे इस विवाद में नहीं फंसना चाहते. उदयनिधि की राय के बारे में पूछे जाने पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा, "यह उनकी राय है. लेकिन मैं इससे सहमत नहीं हूं."

ऐसे में ज़ाहिर है कि कमलनाथ और प्रियांक खड़गे के बयान के बीच का अंतर, स्पष्टता के साथ भारतीय राजनीति में उत्तर-दक्षिण विभाजन की ओर इशारा करता है.

दक्षिण भारतीय राजनीति में, विशेषकर तमिलनाडु की राजनीति में, धर्म के आधार पर लोगों को इकट्ठा करना और उनका वोट हासिल करना एक असंभव चुनौती है.

लेकिन मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में हिंदुत्व पर हमला करके वोट हासिल करना नामुमकिन है. इसीलिए कमलनाथ के भाषण में चेतावनी छिपी हुई है.

वरिष्ठ पत्रकार आरके राधाकृष्णन कहते हैं, "द्रमुक के लोगों को पहले यह तय करना चाहिए कि वे नीतिगत राजनीति करेंगे या चुनावी राजनीति. इसका कारण यह है कि देश की मौजूदा स्थिति पूरी तरह से अलग है. पहले, यह धर्मनिरपेक्ष बनाम हिंदू था. अब यह अच्छे हिंदू बनाम बुरा हिंदू बन गया है. हिंदू धर्म ऐसा ही है. केंद्र में इसको लेकर राजनीति होने लगी है. उदयनिधि के लिए इस समय इस पर बात करना अनावश्यक है.''

पूरे मामले पर केंद्र सरकार का रुख़

वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ पत्रकार कुबेंद्रन का कहना है कि इस मामले में राष्ट्रीय मीडिया ने जिस तरह का व्यवहार किया है वह बहुत ही ख़राब रहा है.

उन्होंने कहा, "वे पहले की तरह संदेश फैला रहे हैं कि तमिलनाडु में उत्तर भारत के लोगों पर हमला किया जा रहा है. उदयनिधि ने जो कहा वह वीडियो में है. लेकिन बीजेपी वाले झूठ फैला रहे हैं कि वह सनातनियों को ख़त्म करने आह्वान कर रहे हैं. यह स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. हाल ही में कैग ने सत्तारूढ़ सरकार पर आरोप लगाए थे, अब केंद्र सरकार लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस मुद्दे को उछाल रही है."

पहले जब विड़ूदलाई चिरुतैगल कच्ची (वीसीके) के लोग बोलते थे तो बीजेपी उसे नहीं उछालती थी, लेकिन अभी इस मुद्दे को उछालने की वजहें उनके पास मौजूद हैं.

वरिष्ठ पत्रकार आरके राधाकृष्णन. कहते हैं, "द्रमुक हिंदू धर्म की वैकल्पिक विचारधारा के रूप में द्रविड़वाद की विचारधारा को बढ़ावा दे रही है. यही कारण है कि वे द्रमुक को निशाना बना रहे हैं."

वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार कुबेंद्रन के मुताबिक़ इस मामले ने अब तक राष्ट्रीय स्तर पर उदयनिधि के लिए काफ़ी प्रचार बटोर लिया है और इससे उन्हें भविष्य में काफ़ी राजनीतिक मदद मिलेगी. (bbc.com/hindi)

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