विशेष रिपोर्ट

डीएमएफ से किसानों को मुफ्त देने थे नलकूप-पंप, वसूले 15 हजार, दिए घटिया सामान

Posted Date : 08-Jan-2019



किसी ने बकरे बेच दिए तो किसी ने कर्ज करके, घटिया पंप की मरम्मत करते निकल रहा दम

बैकुंठपुर, 8 जनवरी (छत्तीसगढ़)। कोरिया जिले में डीएमएफ की राशि से किसानों के नाम पर योजना बनी। किसानों के  हर समूह को 1 लाख 36 हजार रू की राशि से नलकूप और पंप लगाकर देना था। पर किसानों से बोर खनन के नाम पर 15 हजार रुपये वसूले गए। एक किसान ने तो अपने बकरे बेचकर रुपये दिए तो एक ने कर्ज करके। वहीं घपला इस तरह कि एकल किसानों को समूह बना दिया गया। लगाए गए पंप इतने घटिया कि इसकी मरम्मत में ही किसान का दम निकल रहा है, काफी खर्च कर चुके हैं। इस मामले में बड़ी बात यह भी है कि जिस विभाग को इस कार्य की जिम्मेदारी दी गई है उसे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है। पिछले वर्ष 46 किसानों का, और इस वर्ष 84 किसानों का चयन किया गया है। दोनों वर्ष की राशि 1 करोड़ 76 लाख 80 हजार होती है। 
इस संबंध में कलेक्टर नरेंद्र दुग्गा का कहना है कृषि विभाग के ई एंड एम के द्वारा करवाया जा रहा है। पैसे लेना गलत है, मैं इसकी जांच करवाऊंगा।
वहीं कृषि संचालक डीके रामटेके का कहना है हमारे पास कई किसानों के फोन आ रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष का भी फोन आया था, हमने किसी  को भी नलकूप खनन का कार्यादेश नहीं दिया है। सूची के किसानों के नाम तो विभाग ने ही दिए होंगे, पर कौन खोद रहा है इसकी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं है। 
खडग़वां के विकास खंड कृषि विस्तार अधिकारी श्री मिश्रा का कहना है कि मैंने 2 जनवरी 2018 को आयोजित बैठक में किसानों के यहां की जा रही बोंरिग के संबंध में कृषि संचालक, एसडीओ सभी को बताया कि उनके क्षेत्र में ऐसा बीते वर्ष भी हुआ था और इस वर्ष भी जारी है। सभी ने मामले में अनभिज्ञता जताई। उन्हें भी इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। हमारे पास और किसान आ रहे हैं, बोरिंग करने वाली कंपनी इसे कृषि विभाग से करना बता रही है। इधर, सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता चंद्रभूषण चक्रधारी का कहना है कि मामले में वो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से शिकायत करेंगे। उन्होंने जिला प्रशासन से वर्तमान में हुए 84 किसानों के बोरिंग की राशि के भुगतान पर रोक की मांग की है। नहीं लगाए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिला प्रशासन ने 2017-18 में डीएमएफ के तहत कृषि विभाग को खडगवां के बचरापोडी क्षेत्र में 46 किसानों का नलकूप खनन और सबमर्सिबल पंप स्थापना की योजना बनाई, इसके लिए प्रत्येक किसान के लिए 1 लाख 36 हजार रू की राशि रखी गयी। जिसमें कुल 62 लाख 56 हजार रू की राशि स्वीकृत की गई, परन्तु इसकी जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों को नहीं दी गई, न ही किसी भी प्रकार का पत्राचार किया गया। बस, बोंरिग कम्पनी का एक व्यक्ति अपने को जिले के आला अधिकारी का व्यक्ति बताकर किसानों के पास पहुंचे। ग्राम बचरा के उदरसाय बताते हैं रात में बोरिंग की गाड़ी लेकर आए और कहा कि 15 हजार दो बोरिंग करना है। उनकी पत्नी बताती है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने 4 बकरे रखे थे उन्हें  बेचकर 15 हजार रू गाड़ी वाले को देना पड़ा। वहीं दो से ज्यादा बार पंप खराब हो चुका है, उनका समूह बंद हो चुका है। 
यहीं के अमीर साय बताते हैं कि उन्होंने 14 हजार रू ही दिए क्योंकि उनके पास एक हजार कम था, पंप एक बार खराब हुआ है उनका कोई समूह नहीं है। यहीं के गुलाब सिंह बताते हैं कि उन्होंने 15 हजार रू जुगाड़ करके गाड़ी वाले को दिए। 
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डायमंड कम्पनी के नाम से डुप्लिकेट पंप लगा दिया है, 4 बार से ज्यादा बार खराब हो चुका है, अभी तक वो पंप को बनवाने में 12 हजार से ज्यादा खर्च कर चुके हैं। वहीं ग्राम तोलगा के जंगसाय के दोनों पुत्रों ने बताया कि उनसे भी 15 हजार रू नगद लिया गया, बताया गया कि 15 हजार में पंप की खुदाई हो रही है। सभी किसानों ने बताया कि बमुश्किल 150 से 200 फीट की खुदाई की गई और एक-एक केसिंग पाईप डाला गया। वहीं इस वर्ष अभी 84 किसानों के घर जा जाकर पंप की खुदाई जारी है। इसके लिए 1 करोड़ 14 लाख 24 हजार रू की स्वीकृति डीएमएफ के तहत ही दी गई है। 
समूह के नाम पर स्वीकृति
डीएमएफ की राशि किसानों के नाम पर खर्च करने के लिए इस नलकूप खनन के लिए किसानों का समूह दिखाया गया, परन्तु मौके पर किसी भी किसान का कोई समूह नहीं है, किसान बताते हैं कि वे किसी भी समूह में खेती नहीं करते है, सब अपने अपने खेत में सब्जी और धान उगाते हैं। उनसे जो राशि ली गई है उन्होंने खुद दी है, ना कि समूह के माध्यम से। 
खनन राशि पीएचई से ज्यादा  
वर्ष 2015-16 में तत्कालिन जिला प्रशासन ने डीएमएफ के तहत जो नलकूप खनन की स्वीकृति प्रदान की थी वो 1 लाख 20 हजार रू की थी, दूसरी ओर वर्तमान जिला प्रशासन 16 हजार रू ज्यादा की राशि देकर 1 लाख 36 हजार में स्वीकृति प्रदान कर रहा है, तब इसकी खुदाई  पीएचई विभाग कर रहा था। बीेते दो साल से इसका जिम्मा कृषि विभाग को दिया गया है, जबकि विभाग का कहना है कि वह खुदाई नहीं कर रहा है।
नहीं है कृषि विभाग में ई एंड एम विभाग
निर्माण एजेन्सी में इलैक्ट्रिक लाईट एंड मशीनरी विभाग अलग होता है, लोक निर्माण विभाग, आरईएस और जल संसाधन विभाग का अपना ई एंड एम विभाग अलग है, जो भवनों , डेमों में इलेक्ट्रिक लाईट एंड मशीनरी से जुड़े कार्य करता  है, इसके अलग अधिकारी होते हंै। परन्तु कृषि विभाग में ई एंड एम विभाग नहीं है, कृषि उपसंचालक ने भी कहा कि ऐसा कोई विभाग कृषि विभाग में नहीं है। 




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