विशेष रिपोर्ट

46सौ करोड़ के 19सौ टेंडर ठेकेदारों ने भरे एक ही कम्प्यूटर से!

Posted Date : 10-Jan-2019



रायपुर, 10 जनवरी (छत्तीसगढ़)। पिछली सरकार में प्रदेश के सरकारी टेंडरों में भारी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि करीब 19 सौ से अधिक टेंडरों में ठेकेदारों द्वारा एक ही कम्प्यूटर का उपयोग कर ऑनलाइन टेंडर भरा गया। करीब 46 सौ करोड़ के इन टेंडरों में ठेकेदारों द्वारा कार्टेल बनाकर टेंडर हासिल किया गया। महालेखाकार ने इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की अनुशंसा की है। 
रिपोर्ट में यह कहा गया कि प्रदेश में चिप्स के ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली के जरिए ऑनलाईन टेंडर का नियम है। यह तथ्य प्रकाश में आया है कि विभागों द्वारा चिप्स के चार मॉड्यूल को आंशिक रूप से अपनाया गया है। शेष चार मॉड्यूल का कस्टमाइजेशन के अभाव में उपयोग नहीं हो रहा था। यह बात सामने आई है कि पीडब्ल्यूडी ठेकेदारों को भुगतान के लिए ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली का उपयोग न कर ई-वक्र्स पोर्टल का उपयोग किया जा रहा था। 
यह कहा गया कि प्रणाली में सुधार नहीं होने के कारण ई-वक्र्स पोर्टल का उपयोग किया गया। इसी बीच राज्यशासन की सशक्त समिति के एक निर्देश के आधार पर चिप्स ने ऑनलाईन प्रसंस्करण के लिए निविदाओं की प्रारंभिक सीमा 20 लाख से घटाकर 10 लाख करने के लिए सभी विभागों को निर्देशित किया था, लेकिन पीडब्ल्यूडी और डब्ल्यूआरडी के प्रमुख अभियंताओं ने अपने संभागों में 10लाख और उससे अधिक मूल्य के सभी टेंडरों को नवीन ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली के माध्यम से आमंत्रित करने के निर्देश जारी नहीं किए। इसके परिणाम स्वरूप मई-2016 और जून-2017 के बीच सभी 48 पीडब्ल्यूडी संभागों और 18 डब्ल्यूआरडी संभागों ने 108 करोड़ 35 लाख के 658 टेंडर मैनुअल रूप से आमंत्रित कर दिए। जिनमें से प्रत्येक में 10 लाख से 20 लाख के बीच थी। इस तरह नवीन ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली को अंदेखा किया गया। 
डब्ल्यूआरडी सचिव ने कहा कि अभिरूचि की अभिव्यक्ति और आरएफपी के माध्यम से कराए गए कार्यों के अतिरिक्त 10 लाख से ऊपर की कोई भी निविदा मैनुअल रूप से जारी नहीं की गई थी। महालेखाकार ने डब्ल्यूआरडी सचिव के जवाब को गलत ठहराया है। यह बताया कि मई-2016 और जून-2017 के बीच डब्ल्यूआरडी द्वारा 34 निविदाएं मैनुअल रूप से आमंत्रित की गई थी। जिनमें प्रत्येक 10 लाख से अधिक मूल्य की थी। इसका विभाग की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं किया जा सका। एक तथ्य यह भी है कि ठेकेदारों द्वारा विभागीय अधिकारियों के साथ एक ही कम्प्यूटर का उपयोग किया गया और समान प्राथमिक और साझेदार की ईमेल आईडी का प्रयोग किया गया। महालेखाकार की रिपोर्ट के आधार पर डब्ल्यूआरडी द्वारा बाद में टेंडर को निरस्त किया जाना, इसका प्रमाण भी है। 
महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि 17 विभागों द्वारा 4601 करोड़ के 1921 टेंडरों में अधिकारियों और निविदाकारों द्वारा एक ही मशीन का उपयोग किया गया है। इसकी पूरी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की अनुशंसा की है। 

 




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