सामान्य ज्ञान

कैंसर रोधी तत्व ग्लुकोसायनोलेट्स

Posted Date : 11-Feb-2019



ग्लुकोसायनोलेट्स  क्रूसीफेरस सब्जियों में पाया जाता है। कुछ विशेष और अनूठे तरह के शक्तिशाली तत्व ग्लुकोसायनोलेट्स और उनके व्युत्पाद आइसोथायोसायनेट होते हैं। इन्हे यौवन का सोता कहा जाता है। ये सल्फरयुक्त जीवरसायन यौगिक होते हैं। इन सब्जियों में तेज और कड़वी गंध सल्फर के कारण ही होती है। इन पौधों में 120 प्रकार के ग्लुकोसायनोलेट्स पाए जाते हैं।

ग्लुकोसायनोलेट्स का विघटन पौधे के ही एंजाइम मायरोसायऩेज के असर से होता है। पौधे में यह एंजाइम ग्लुकोसायनोलेट से दूर रखा जाता है। पकाने, चबाने और पाचन क्रिया से क्रूसीफेरस सब्जियों में विद्यमान ग्लुकोसायनोलेट्स का मायरोसायऩेज एंजाइम के सम्पर्क हो जाता है और ग्लुकोसायनोलेट का जलीय विघटन  हो जाता है।  चयापचय की दृष्टि से सक्रिय यौगिक जैसे इन्डोल, नाइट्राइल्स, थायोसायनेट और आइसोथायोसायनेट बनते हैं। इन्डोल-3-कार्बिनोल (इन्डोल) और सल्फोरेफेन (आइसोथायोसायनेट) आश्चर्यजनक रूप से कैंसररोधी पाए गए हैं। ये आइसोथायोयायनेट और इन्डोल यकृत में ग्लूटाथायोन-एस-ट्रांसफरेज एंजाइम तंत्र का नियंत्रण करते हैं। इसे फेज-2 एंजाइम तंत्र कहते हैं। ग्लुकोसायनोलेट्स युक्त सब्जियों के सेवन के 3-4 दिन तक ये शरीर से टॉक्सिन्स का डिटॉक्सीफिकेशन करते रहते हैं।

ये टॉक्सिन्स धूम्रपान, दवा, प्रदूषण, या शरीर में चयापचय के उत्पाद आदि किसी भी स्रोत से आ सकते हैं। ब्रोकोली में सबसे अधिक ग्लुकोसायनोलेट्स होते हैं, इसलिए अखाद्य और जंगली समझी जाने वाली ब्रोकोली अचानक कैंसररोधी क्रूसीफेरस सब्जियों की पायदान में सबसे ऊपर पहुंच गई है।




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