विशेष रिपोर्ट

पिथौरा के नरसिंग पटेल का ‘स्मार्ट घुरुआ और डेयरी’ बना मॉडल

Posted Date : 07-Mar-2019



रजिंदर खनूजा
पिथौरा,
6 मार्च। प्रदेश सरकार नरूआ, गरूआ, घुरुवा और बारी से किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने की कोशिश में लगी हुई है। पिथौरा अर्जुनी के किसान नरसिंह का स्मार्ट घुरूआ और डेयरी किसानों के लिए एक मिशाल बनकर सामने आया है। कभी रोजाना लौ लीटर दूध उत्पादन करने वाले नरसिंह की डेयरी से आज 5 सौ लीटर दूध निकलता है, उनकी डेयरी में आज 82 गायें हैं।  वे  नई गाय तैयार कर बेचते भी हैं। गोबर खाद वन विभाग खरीदता है इससे कमाई अलग।  
नगर के समीप ग्राम अर्जुनी में एक परिवार ने 82 गाय पालकर प्रदेश के किसानों को संदेश दिया है कि यदि किसी भी कार्य को मन लगा कर किया जाए तो सफलता सुनिश्चित है।  श्वेतक्रान्ति के नारों के बीच अर्जुनी का नरसिंह पटेल परिवार कब इस नारे को क्रियान्वित कर बैठा उनको खुद को पता नहीं है है। अपने बेलर निवासी स्वर्गीय नाना निराकार पटेल से गौपालन सीखकर आज 10 गाय से शुरू किया सफर 73 गाय तक पहुंच गया है।  नरसिंह पटेल प्रतिमाह कोई 5 लाख का दूध दुग्ध सोसायटी में बेचते हैं। वे प्रतिदिन 200 लीटर दूध खुद निकालते हैं। इसके अलावा मवेशियों की देखरेख में भी लगे रहते हंै।
दूध दुहने मिल्किंग मशीन
श्री पटेल अधिक दूध देने वाली गायों से दूध निकालने मिल्किंग मशीन का उपयोग करते हैै। गायों का दूध दुहने वाली मिल्किंग मशीन का काम तो मिनटों में खत्म हो जाता है । व्यवसाय में  उनकी पत्नी सुशीला पटेल भी पूरी तरह साथ देती है। उन्होंने  मशीन लगाकर दूध निकालते हुए दिखाया। सुशीला ने बताया मेरे पति दोनों समय अकेले सौ-सौ लीटर दूध दुहते हंै इस कारण अंगूठे में गांठ पढ़ गया है। बाकी हम लोग मिल्किंग मशीन से दुहते हंै। मशीन से दुहने पर किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है लेकिन मशीन तभी फिट बैठता है जब थन में दूध भरा हो। थन के निप्पल पतले हों या मोटे हों मशीन सब को पकड़ लेता है। सिर्फ 5 मिनट में दो गायों से बीस लीटर दूध निकल आता है। 40 गायों को दुहने में दो घंटे लगते है। तीन साल पहले 57 हजार में मशीन खरीद कर लाये थे। काम को देखते हुए एक और मशीन लाएंगे।
 कर्ज लेकर बढ़ाया था व्यवसाय।
 नरसिंग ने बताया कि दस वर्ष पहले  बैंक से 40 प्रतिशत सब्सिडी में 10 गाय लोन में लिया था। उस समय मेरे पास 20 बछिया थी। बीच में गोड़बहल वन समिति द्वारा 5-5 लाख का दो बार लोन लिया था। पन्द्रह वर्ष पहले सौ लीटर दूध होता था जो आज बढक़र 500 लीटर हो गया है।   दूध की प्रतिदिन बिक्री से 17 हजार रुपये मिलते हैं। 
 आठ सौ रुपया प्रति ट्रीप के हिसाब से 1 लाख 60 हजार का खाद वन विभाग प्रति वर्ष ले जाता है। इतना ही खाद का उपयोग दो धान की फसल के लिए करते हंै। हर साल 20 तैयार बछिया बेच लेते हैं। फिर पूरा परिवार इस काम मे हाथ बटाता है।बाहर से बस गायों के लिए चालीस पचास हजार की दयाईयाँ लेनी पड़ती है। अनुभव के हिसाब से इलाज का अनुभव है। डॉक्टर की जरूरत कम पड़ती है। अब हमें मेहनत का फल मिल रहा है।
खेती में गोबर  खाद 
 10 वर्षों से उन्होंने रसायनिक खाद को छुआ तक नहीं है, गोबर के लिए उन्होंने एक घुरवा बनाया है। जहाँ गोबर खाद तैयार होती है। वही गायों के मूत्र एवम उन्हें नहलाने से बहने वाले पानी को भी वे एक डबरी बना कर वहां एकत्र करते हंै। इस पानी को वे अपने खेतों तक ले जाते है। जिससे उनकी 20 एकड़ कृषि में रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती। अपने हाथों निर्मित खाद  के भरोसे वे  खेती कर रहे हंैं।  इससे महंगे रासायनिक खाद का खर्च बचता है। वहीं खेती की उर्वरा शक्ति बढऩे के कारण फसल भी अच्छी होती है।
मृदुभाषी और चेहरे पर हर समय मुस्कान लिए नरसिंग से मिलने पहुंचे हमारे प्रतिनिधि को उन्होंने पूरी व्यवस्था के साथ बनाये गए एक बड़ी गौशाला और उसके साथ जुड़े डबरी ,गोबर से कम्पोस्ट खाद,हरा चारा और 12 एकड़ खेत से परिचय कराया। नरसिंग ने बताया बचपन से गायों के प्रति प्रेम है फिर मैंने इसमें पूरा ध्यान लगाया।10 गायें पहले थीं उनको बढ़ाते आज 82 तक पहुँच गई है। 55 गायें अभी दूध दे रही है।
जिले में प्रथम नरसिंग की डेयरी-अग्रवाल
  ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी दीपक अग्रवाल ने  बताया कि अर्जुनी के नरसिंग पटेल का ‘स्मार्ट घुरुआ और डेयरी’ जिले में प्रथम है, उन्हें पुरस्कार भी मिला है। ये एक मॉडल की तरह है। अपनी आंखों की कम रोशनी के बावजूद उनकी लगन तारीफे काबिल है। प्रभारी डॉ दीना पटेल ने बताया डेयरी उद्यमिता विकास योजना में मिलने वाली 12 लाख की राशि के तहत नरसिंग का चयन भी किया गया है। 6 माह की पहली किस्त के रूप में 6 लाख दिया गया है, जिसमें 8 गायों के लिए प्रत्येक 60 हजार, डेढ़ लाख का कोठा, 50 हजार का बोर और 3 लाख शेड के लिए शामिल है। पूरे ब्लॉक में मुढ़ीपार के भोज, गोड़बाहल के सादराम पटेल एवं भोजपुर के रोहित नायक की मिल्किंग मशीन लगी डेयरी  है।

 




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