विशेष रिपोर्ट

कसडोल के ढाई हजार एकड़ में गेहूं की बंपर फसल

Posted Date : 07-Mar-2019



धान से कम लागत और ज्यादा आमदनी से किसानों ने अपनाया 
गोरेलाल तिवारी

कसडोल, 5 मार्च (छत्तीसगढ़)। क्षेत्र में रबी फसल गेहूं की अच्छी पैदावार देखकर किसान खुश हैं । कम लागत पर अच्छी आमदनी होने की आस से किसानों में धान की अपेक्षा अनाज में गेहूं की खेती के प्रति किसानों का आकर्षण बढ़ा है। कसडोल तहसील क्षेत्र में इस साल सर्वाधिक 2 हजार से ढाई हजार एकड़ में खेती का अनुमान है । जिसके आगामी वर्ष में खेती का रकबा और बढऩे की उम्मीद बनी है । कृषि विभाग नेे भी धान और गेहूं की अच्छी फसल पर सन्तोष ब्यक्त किया है । 
कसडोल तहसील क्षेत्र में रबी फसल के लिए राजादेवरी 42 गांव में रबी फसल धान और गेहूं के साथ साथ दलहन-तिलहन की खेती सर्वाधिक मात्रा में होती आ रही है । इस क्षेत्र में भूमिगत जल स्रोत की अधिकता से निजी बोर की व्यापकता है। जिसमें लगातार वृद्धि होती जा रही है। एक अनुमान के अनुसार राजा देवरी क्षेत्र के 42 गांव में करीब 3500 भूमिगत बोर होंगे। शासन की कृषि विकास नीति के तहत अनुदान का लाभ अब मध्यम वर्गीय किसानो के अलावा लघु एवं सीमांत किसानों ने भी लाभ लेना शुरू किया है। यही वजह है कि उक्त क्षेत्र में तो विगत तीन चार दशकों से भूमि गत सिंचाई का रकबा तो बढ़ता ही जा रहा है अपितु तहसील क्षेत्र के 230 ग्रामों में रबी फसल कई खेती निजी सिचाई बोर के माध्यम से विस्तार साफ झलकने लगा है। 
कसडोल क्षेत्र में कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 1 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में गेहूं की फसल किसानों ने लिया है । मैदानी क्षेत्र में भी लगातार भूमिगत बोर की संख्या में ईजाफा होता जा रहा है। जिसका प्रमाण मैदानी क्षेत्र के किसान भी लाभ लेने लगे हैं ।मैदानी क्षेत्र के गांव कसडोल मोहतरा धौराभांठा छेछर भदरा, चिचपोल, चरौदा, खरहा, बम्हनी आदि करीब 100 ग्रामों में छुटपुट 500 एकड़ कृषि भूमि रकबा में गेहूं की खेती किया गया है। मैदानी क्षेत्र के गेहूं फसल में कहीं दानें लग रहे हैं तो कहीं दानें निकल कर पकने लगे हैं। एक सर्वेक्षण के मुताबिक तथा कृषि विभाग के अनुसार मार्च तक गेहूं की फसल पूरी तरह काट लिए जाएंगे । कैम्पा के माध्यम से बार नवापारा कोठरी अभ्यारण्य के 22 ग्रामों सोनाखान, अर्जुनी महराजी के 30 ग्रामों में भी सौर ऊर्जा से शासन द्वारा वनवासी किसानों को बोर सिंचाई का लाभ दिया गया है जहां किसान रबी फसल का लाभ ले रहे हैं ।
राजा देवरी में रकबा बढ़ा
क्षेत्र के किसान कृषि विभाग के सलाह पर अमल करते हुए एवम सिंचाई संकट के मद्देनजर इस साल धान की बजाय गेहूं की खेती में ज्यादा ध्यान दिया है। कृषि विभाग कसडोल द्वारा ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से रबी फसलों की डिमांड सूची पहले ही तैयार कर बीजों का भंडारण कर लिया था। यही वजह है कि गेहूं की खेती दिसम्बर में ही खत्म कर ली गई थी। गेहूं का रकबा राजादेवरी क्षेत्र के पूर्वी जोंक इलाके के बिलारी, छाता, कुरमाझर, नगेड़ी, नगेड़ा, नगरदा, थरगांव, कुशगढ़, कुशभांठा,  सोनपुर आदि पंचायतों तथा आश्रित 20 ग्रामों में खरीफ फसल की बारिश कम होने तथा जोंक नदी के ऊपरी भाग होनें से जल स्रोत नींचे होने की आशंका से कम सिचाई लागत फसल गेहूं की खेती किसानों ने किया है । जिसकी अच्छी पैदावार से खुश भी देखे गए हैं।  इसी क्षेत्र के पश्चिमी जोंक के ग्राम पंचायत देवरी, गोलाझर, चांदन, रिकोकला, छतवन, अमरुआ, दुमरपाली, रंगोरा, बया, कोरकोटी, कोसमसरा, धमलपुरा आदि के आश्रित 22 ग्रामों में अधिकांश जगह गेहूं की खेती हुई है । कुल मिलाकर राजादेवरी 42 गांव तथा जंगल बार इलाके के कुछ ग्रामों को मिलाकर 1500 से 2000 एकड़ और कुल मिलाकर दो से ढाई हजार एकड़ कृषि भूमि में गेहूं की खेती हुई है ।

 




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