सोशल मीडिया

'प्रोपेगेंडा का एक छोटा-सा कदम नमो टीवी भारत के उत्तर कोरिया बनने की दिशा में एक बड़ी छलांग है'

Posted Date : 04-Apr-2019



नमो टीवी को लेकर चुनाव आयोग के सवाल पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के जवाब की चर्चा आज सोशल मीडिया पर कई लोगों ने की है। मंत्रालय के मुताबिक नमो टीवी कोई लाइसेंस प्राप्त चैनल नहीं बल्कि विज्ञापन प्लेटफॉर्म है और इसके लिए उसे सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। यह चैनल बीते हफ्ते लॉन्च हुआ है और इसके बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के विरोधी सोशल मीडिया पर इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रहे हैं और आज भी ऐसा हुआ है। एक ट्विटर हैंडल पर प्रतिक्रिया है, 'नमो टीवी का प्रसारण हो सकता है, प्रधानमंत्री पर बनी फिल्म पर भी रोक नहीं! यह आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है पर रफाल घोटाले से जुड़ी किताब के प्रकाशन पर रोक, यह कैसा दोहरा रवैया है चुनाव आयोग का?'

इसी मामले से जुड़ी एक और खबर भी सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है जिसके मुताबिक नमो टीवी के पास प्रसारण लायसेंस नहीं है और यहां तक कि इस प्लेटफॉर्म ने इसके लिए आवेदन भी नहीं दिया था। इस खबर पर पत्रकार शिवम विज की तंजभरी प्रतिक्रिया है, '...मोदी देश की कानून-व्यवस्था से ऊपर हैं।'
सोशल मीडिया में इन खबरों पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :
शुभम सिंह- जब से नमो टीवी चालू हुआ है, बच्चों ने कार्टून नेटवर्क देखना बंद कर दिया!
स्वाति चतुर्वेदी- मुझे लगता था कि मोदी सरकार के गैरकानूनी कामों के बारे में सुनकर मुझे अब कोई झटका नहीं लग सकता, लेकिन जिस तरह नमो टीवी के प्रसारण के लिए अनुमति से जुड़े नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं, वो अकल्पनीय है। क्या हम उत्तर कोरिया में रह रहे हैं?
शकुनि मामा- नमो टीवी प्रोपेगेंडा की दिशा में एक छोटा-सा कदम है पर भारत के उत्तर कोरिया बनने की राह में बड़ी छलांग है।
दिलीप सी मंडल- बीजेपी ने एक और टीवी चैनल लॉन्च कर दिया। नमो टीवी और कई और चैनल पहले से जो कर रहे थे, उसके लिए एक और चैनल की जरूरत क्यों पड़ी? पब्लिक टीवी देख-देखकर पगला जाएगी। (सत्याग्रह ब्यूरो)




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