विशेष रिपोर्ट

काँकेर लोस चुनाव दिलचस्प मोड़ पर, दोनों पार्टियों ने झोंकी ताकत

Posted Date : 13-Apr-2019



भाजपा को मोदी के नाम का मिल रहा लाभ, नमक-चना बंद करने से कांग्रेस की मुसीबत बढ़ी  
काँकेर, 13 अप्रैल
। काँकेर लोकसभा चुनाव में इस बार का चुनाव बड़ा ही दिलचस्प हो चूका है कांग्रेस भाजपा के दोनों उम्मीदवार की किस्मत का फ़ैसला अब बेहद करीब हो चला है जहां भाजपा को अब महज प्रधानमंत्री मोदी का ही सहारा दिख रहा है आम जनों की एक ही राय बनती दिख रही है कि नरेंद्र मोदी को पुन: प्रधानमंत्री बनाना है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की सरकार छत्तीसगढ़ में होने के बावजूद कांग्रेस की मुश्किलें कम होती नहीं दिखाई दे रही हंै। 

एक ओर जिले के अधिकांश किसानों के कर्जमाफी की समस्याओं से उभर भी नही पाई है कि गरीबों को दिए जाने वाली खाद्यान्न प्रणाली के तहत नमक और चना को बंद किए जाने से गरीबों के भारी विरोध से भी कांग्रेस  की मुसीबत कम होती दिखाई नहीं दे रही है ऐसी स्थिति में कांग्रेस व भाजपा के बीच मुकाबला बड़ा ही रोचक होने की उम्मीदें  जताई जा रही है। 
काँकेर लोकसभा हर हाल में दोनों राजनीतिक पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है यानी काँकेर लोकसभा सीट 10 सालों से भाजपा के कब्जे में है। दूसरी ओर कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ऊर्जा से लबरेज कांग्रेस के पदाधिकारियों ने अपनी पूरी ऊर्जा फूंक कर लोकसभा सीट जिताने पसीना बहा रहे हैं लेकिन अपने ही पार्टी के पदाधिकारियों की अनदेखी के चलते युवा कार्यकर्ताओं में पार्टी के लिए काम में कोताही बरती जा रही है। 

पार्टी नेताओं के तालमेल
से बिगड़ सकता है  खेल 

 प्रत्याशी भले ही लोगो से मिलजुलकर डोर टू डोर जनसंपर्क करने में कोई कसर तो नही छोड़ रहे है लेकिन दोनों पार्टियों के जिला पदाधिकारी और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं में आपसी तालमेल नहीं होने के चलते चुनाव में ठीक तरह से कोई भी कार्यकर्ता काम नहीं करने की जानकारी  मिली है। यही स्थिति कांग्रेस में भी आसानी से देखी जा सकती है । 
जनसंपर्क के दौरान महज मु_ी भर कार्यकर्ता शामिल हो रहे हंै जिसके चलते लोगों में यह कयास लगाए जा रहे हंै कि मु_ी भर कार्यकर्ताओं के सहारे पार्टी फ़तेह हासिल कैसे कर पाएगी।
पूछपरख कम होने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी
लोकसभा चुनाव में चुनाव संचालन कर रहे लोगों में कार्यकर्ताओं की अनदेखी से दोनों राष्ट्रीय पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ताओं में जमकर नाराजग़ी देखी जा रही है। आलम यह है कि कार्यकर्ताओ में जो जुनून बीते विधानसभा चुनाव के दौरान देखा गया था वह उत्साह  नहीं है। जो दोनों पार्टियों के लिए बड़ी मुसीबत पैदा कर सकता है। बहरहाल वक्त रहते नाराज़ कार्यकर्ता और जिला पदाधिकारी को मना लिए जाने के संकेत मिल रहे हैं।

 चना-नमक बंद करने से कांग्रेस की मुसीबत बढ़ी 
लोकसभा चुनाव में इस बार छत्तीसगढ़ में वर्तमान सरकार के घोषणा पत्र के अनुसार 10 दिनों के भीतर किसानों के कर्जमाफी करने के वादे जिले के अधिकांश किसानों के कजऱ्माफ नहीं हो सका है। आए दिन किसान अपने कर्जमाफी को लेकर बैक के चक्कर लगा रहे हैं और बैंकों से किसानों को लगातार कजऱ् के नोटिस मिलने से किसानों में कांग्रेस के खिलाफ जमकर आक्रोश देखा जा रहा है। कर्जमाफी की आग अभी ठंडी भी नही हो पाई है कि  गरीब परिवार जिन्हें गुलाबी राशन कार्ड में सस्ते दामों में चावल शक्कर मिट्टी तेल चना और मुफ्त में नमक पिछ्ली सरकार द्वारा दिया जा रहा था लेकिन अचानक कांग्रेस ने गरीबों को नमक व चना को बंद करने से गरीबों में कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश भड़का हुआ है। मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर के आसपास मालगांव , कोडेजंगा, ठेलकबोड, कोकपुर, मनकेशरी के बीपीएल कार्डधारी कादिर खान, मुकेश सिन्हा, कैलाश ,नरेश, सुरेश, इंद्रा बाई, जयबती ने बताया कि बीते सरकार द्वारा गरीबों को राशन दिया जा रहा था। कांग्रेस सरकार ने चना नमक को बंद कर दिया है आज नमक चना को बंद किया है। कल राशन को बंद कर देंगे। गरीबों की सरकार बताने वाली कांग्रेस भी जुमलेबाज सरकार निकल गई।

 




Related Post

Comments