विशेष रिपोर्ट

महासमुंद/रायपुर,  धनेन्द्र, चुन्नीलाल में कांटे की टक्कर, कांग्रेस को कर्जमाफी, धान-बोनस से नफे की उम्मीद, भाजपा को मोदी का सहारा
महासमुंद/रायपुर, धनेन्द्र, चुन्नीलाल में कांटे की टक्कर, कांग्रेस को कर्जमाफी, धान-बोनस से नफे की उम्मीद, भाजपा को मोदी का सहारा
Date : 15-Apr-2019

कल थमेगा चुनावी शोर
उत्तरा विदानी
महासमुंद/रायपुर, 15 अप्रैल (छत्तीसगढ़)।
महासमुंद लोकसभा में प्रचार खत्म होने में 24 घंटे बाकी रह गए हैं। ऐसे में दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। दोनों ही दल के प्रत्याशी पहली बार चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस को राज्य सरकार किसान हित में लिए गए फैसले से फायदे की उम्मीद है, तो भाजपा को मोदी फैक्टर का सहारा है। 
भाजपा ने दो बार के सांसद चंदूलाल साहू की टिकट काटकर खल्लारी के पूर्व विधायक चुन्नीलाल साहू को मैदान में उतारा है। जबकि कांग्रेस ने अभनपुर के विधायक धनेन्द्र साहू को टिकट दी है। धनेन्द्र साहू प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। लिहाजा, वे यहां पहचान के मोहताज नहीं हैं और पार्टी के छोटे-बड़े पदाधिकारी से परिचित हैं। चुन्नीलाल के चुनाव प्रचार की कमान पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने संभाल रखी है और वे लगातार दौरा भी कर रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा से परे बहुजन समाज पार्टी और निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। लेकिन मुकाबला दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है। 

महासमुंद लोकसभा में साहू समाज के मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है। इसके साथ-साथ आदिवासी, कुर्मी और अनुसूचित जाति के मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। दोनों ही प्रत्याशी साहू समाज से आते हैं। ऐसे में समाज का वोट बंटना तय है। इन सबके बीच शहरी इलाकों में मोदी फैक्टर हावी दिख रहा है। यहां के ज्यादातर लोग नरेन्द्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहते हैं। कुल मिलाकर भाजपा प्रत्याशी चुन्नीलाल साहू को मोदी फैक्टर से बड़े फायदे की उम्मीद है। शुरूआती दौर में अपने नाम और पहचान के आधार पर धनेन्द्र साहू भारी दिख रहे थे, लेकिन प्रचार के अंतिम चरण में मुकाबला कांटे का हो गया है। भाजपा प्रत्याशी चुन्नीलाल की स्थिति धमतरी, कुरूद व बिन्द्रानवागढ़ में अच्छी दिख रही है, तो कांग्रेस प्रत्याशी को महासमुंद जिले की विधानसभाओं महासमुंद, सराईपाली, बसना और राजिम से बढ़त मिलने की उम्मीद है। जबकि खल्लारी में दोनों बराबरी में दिख रहे हैं। 
पिछले लोकसभा चुनाव में भी महासमुन्द जिले के सभी सीटों पर भाजपा के विधायक होते हुए भी भाजपा प्रत्याशी बढ़त नहीं मिली थी। राजिम में भी भाजपा विधायक होने के बावजूद चंदू साहू अजीत जोगी से पीछे चलते रहे और गरियाबंद, बिन्द्रानवागढ़, धमतरी के बूते चुनाव मात्र 12 सौ वोट से जीत सके थे। इस बार महासमुन्द जिले के सभी सीटें कांग्रेस के कब्जे में है। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी को जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। मतदाता खामोश है, लेकिन किसानों के बीच कहीं न कहीं, धान का समर्थन मूल्य 25 सौ रूपए प्रति क्विंटल करने के साथ-साथ बोनस से राज्य सरकार से खुश हैं। 

इससे धनेन्द्र साहू को फायदा मिल सकता है। धनेन्द्र के  सामने समस्या यह है कि भाजपा के लोग उन्हें बाहरी करार दे रहे हैं, जिसे लेकर उन्हें  सफाई देनी पड़ रही है। समाज के कई प्रमुख लोग चुन्नीलाल के माहौल बना रहे हैं, जिससे उन्हें दिक्कत हो रही है। भाजपा के पक्ष में प्रचार के लिए केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह आ चुके हैं। जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल धनेन्द्र साहू के पक्ष में आधा दर्जन से अधिक चुनावी सभा को संबोधित कर चुके हैं। बहरहाल, दोनों की बीच हार-जीत का अंतर कम मतों से होने का अनुमान है। 

 

 

 

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