विशेष रिपोर्ट

जांजगीर-चांपा में इस बार भी त्रिकोणीय मुकाबला, प्रचार सिर्फ नगरीय इलाकों में

Posted Date : 16-Apr-2019



बसपा की दमदारी से भाजपा उम्मीद से, कांग्रेस में एकजुटता 

गोरेलाल तिवारी
जांजगीर-चांपा/कसडोल, 16 अप्रैल।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित जांजगीर-चांपा लोकसभा में वैसे तो कांग्रेस, भाजपा और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है, लेकिन बसपा के वोट भाजपा और कांग्रेस में जीत-हार तय करेंगे। चुनाव प्रचार खत्म होने में पांच दिन बाकी हैं, लेकिन प्रचार सिर्फ नगरीय इलाकों तक ही सीमित है। गांवों में चुनाव प्रचार का शोर-गुल गायब है। 

जांजगीर चांपा संसदीय क्षेत्र में दर्जन भर प्रत्याशी मैदान में हैं। यहां 23 तारीख को मतदान होगा। शहर और ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं की बैठकों का सिलसिला तो चला है किंतु ग्रामीण अंचलों में कांग्रेस, बसपा और भाजपा तीनों पार्टियों की मतदाताओं के सम्पर्क का सिलसिला अथवा सामूहिक प्रचार का सिलसिला सुनियोजित ढंग से शुरू नहीं हुआ है। यहां कांग्रेस से रवि भारद्वाज, भाजपा से पूर्व सांसद गुहाराम अजगले और बसपा से दाऊराम रत्नाकर मुख्य मुकाबले में हैं। 

जांजगीर संसदीय सीट पर हालांकि उक्त तीनों पार्टी जीत का दावा कर रही है किंतु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जबरदस्त सफलता से पूरे संसदीय क्षेत्रों के सभी 8 विधानसभा में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में सक्रियता ज्यादा दिख रही है। संसदीय क्षेत्र में चुनावी माहौल ठंडा पड़ा हुआ है और ऐसा प्रतीत होता है कि आखिरी समय तक यही स्थिति रहने वाली है ।
बसपा प्रत्याशी दाऊराम रत्नाकर के पक्ष में बसपा सुप्रीमो मायावती और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सभा हो चुकी है। यहां जांजगीर-चांपा, अकलतरा में भाजपा और चंद्रपुर, कसडोल, बिलाईगढ़ व सक्ति में कांग्रेस के विधायक हैं। जबकि  पामगढ़ और जैजैपुर में बसपा के विधायक हैं। बसपा यहां सभी सीटों पर प्रभाव है। बसपा के संस्थापक स्व. कांशीराम पहला चुनाव जांजगीर-चांपा सीट से लड़े थे। यहां बसपा उम्मीदवार को एक लाख के आसपास वोट मिलते रहे हैं। इस बार बसपा उम्मीदवार दाऊराम रत्नाकर ज्यादा वोट पाने की कोशिश कर रहे हैं। 

उनका कई इलाकों में अच्छा प्रभाव भी है। कांग्रेस प्रत्याशी रवि भारद्वाज क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं। उनके पिता परसराम भारद्वाज अविभाजित मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे  हैं और पांच बार सांसद रह चुके हैं।  उनके समर्थक तकरीबन हर गांव में हैं। और इसका फायदा रवि को मिल रहा है। पूर्व विधायक महंत रामसुंदर दास ने चर्चा में बताया कि सभी 8 विधान सभा क्षेत्र में प्रत्याशी का पदाधिकारियों के साथ प्रारम्भिक जनसम्पर्क हो गया है। बताया गया कि किसान ऋण मुक्ति तथा 25 सौ रुपये धान का भाव दिए जाने से कांग्रेस के प्रति जनता का रुझान बढ़ा है। जो निश्चित ही जीत के रूप में परिणाम सामने आएगा ।कांग्रेस के लाल लक्ष्मण सिंह भटगांव, मनबोधी देवांगन टुंड्रा, योगेंद्र विमल देवांगन कटगी, मनीष मिश्रा अशोक यादव ,गणेश जायसवाल पलारी का भी कहना है कि ग्रामीण अंचलों में कार्यकर्ताओं का सम्पर्क शुरू हो गया है ।

पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा ,जनता कांग्रेस के तालमेल से अस्त व्यस्त हो गया है। कसडोल बसपा की सीट पर अंतिम समय में जनता कांग्रेस से परमेश्वर यदु को भी खड़ा कर दिया गया। जिसके कारण पूरा समीकरण ही बिगड़ गया। इसी तरह अकलतरा विधानसभा में बसपा का मजबूत गढ़ बना हुआ था। जहां बसपा के चिन्ह पर ऋचा जोगी को खड़ा कर दिया गया । जिसका अंजाम यह हुआ कि उक्त सीट भाजपा की झोली में चली गई। यही वजह है कि बसपा प्रत्याशी दाऊ राम रत्नाकर को नाराज पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं को संगठित करनें में दिक्कत हुई है। बसपा जमीनी कार्यकर्ताओं से सराबोर है ,जो उत्साहित तथा जुझारू टीम है । किंतु परेशानी यह है कि जनता कांग्रेस जोगी के काफी संख्या में थोक के भाव में कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। बसपा नेताओं का कहना है कि यदि जोगी कांग्रेस के लोग तथा स्वयं अजीत जोगी खुद सक्रिय हो जाए तो परिणाम पक्ष में आ सकता है। पर श्री जोगी ने सिर्फ मायावती के साथ ही मंच साझा किया। इसके बाद से प्रचार से दूर हैं। 

दूसरी तरफ, दो बार की सांसद कमला पाटले की टिकट कटने से उनके समर्थकों में नाराजगी है। जिसमें हेलीकॉप्टर प्रत्याशी पूर्व के सांसद गुहाराम अजगले को घोषित किया गया। इसको लेकर पार्टी का एक खेमा अभी भी नाराज है। यहां चुनाव संचालन की जिम्मेदारी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल संभाल रहे हैं। ऐसे में भाजपा को बसपा व कांग्रेस के बीच की लड़ाई में फायदें की उम्मीद है। अजा वोट कांग्रेस का परम्परागत वोट रहा है, लेकिन पिछले सालों से बसपा ने इसमें पकड़ बनाई है और यही वजह है कि अजा वोटरों के छिटकने से कांग्रेस लगातार हारती चली गई। पर इस बार भाजपा में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं होने से कांग्रेस को फायदा दिख रहा है। हालांकि गावों में भी मोदी फैक्टर दिख रहा है। इससे भाजपा को नैय्या पार होने की उम्मीद दिख रही है। बहरहाल, तीनों दलों के बीच नजदीकी मुकाबले के चलते हार-जीत का अंतर कम मतों से होने का अनुमान है। 




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