संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय 26 अप्रैल : बलात्कारी-आसाराम का बेटा भी बलात्कारी साबित
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय 26 अप्रैल : बलात्कारी-आसाराम का बेटा भी बलात्कारी साबित
Date : 26-Apr-2019

बलात्कार के जुर्म में कैद काट रहे एक वक्त बापू कहलाते और आज आसाराम नाम के आम कैदी के बेटे को भी बलात्कार के जुर्म में आज गुनहगार ठहराया गया है। अदालत इसकी सजा चार दिन बाद सुनाएगी। जैसा कि दुनिया आसाराम की ताकत के बारे में जानती है, निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक हर जगह देश के सबसे महंगे वकीलों में आसाराम को बचाने की, छुड़ाने की, जमानत की तमाम कोशिशें कर डाली, लेकिन उसके खिलाफ सुबूत इतने पक्के थे कि कोई ताकत काम नहीं आई, और वह जेल काट रहा है। आज गुजरात की एक जिला अदालत ने उसके बेटे नारायण साईं को एक साध्वी से बलात्कार के मामले में कुसूरवार ठहराया है। बाप-बेटे की इस जोड़ी ने 1997 से 2006 के बीच अहमदाबाद के अपने आश्रम में दो बहनों से कई बार बलात्कार किया था। बड़ी बहन से बलात्कार के जुर्म में आसाराम को कैद हुई, और छोटी बहन से बलात्कार का गुनाह अब बेटे के खिलाफ साबित हुआ है। बलात्कार में मदद करने के लिए आसाराम की बीवी और उसकी बेटी सहित चार और महिलाओं के नाम भी मुकदमे में दर्ज हैं। आसाराम को राजस्थान की एक अदालत ने नाबालिग से बलात्कार के लिए उम्रकैद सुनाई है। दिलचस्प बात यह है कि आसाराम के खिलाफ चले बलात्कार-मामले में जाने कितने ही गवाहों पर हमले हुए, और कम से कम तीन गवाहों की हत्या कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम के खिलाफ जांच को कमजोर करने के लिए गुजरात की पुलिस को भी फटकारा था। 

धर्म और आध्यात्म के नाम पर बाप-बेटे की यह टोली जाने कितने ही और बलात्कार कर चुकी होगी, लेकिन हिन्दुस्तानी अदालती ढर्रे को देखते हुए बहुत अधिक महिलाओं या लड़कियों का यह हौसला नहीं होता है कि वे पुलिस की पूछताछ और वकीलों के अदालती सवालों का सामना करते हुए समाज में भी बहिष्कार और प्रताडऩा झेलें, और जब मामला आसाराम जैसे बलात्कारी का हो तो जान का खतरा भी खुलकर सामने आया ही है। ऐसे में जिन गिने-चुने लोगों ने यह हौसला दिखाया है उनकी शिनाख्त बिना भी उनकी तारीफ की जानी चाहिए कि ईश्वर के नाम बलात्कार करने वाले ऐसे अरबपति-खरबपति को उम्रकैद दिलवाने का काम उन्होंने किया है। ऐसे पाखंडी और बलात्कारी-बाबाओं का भांडाफोड़ होने से समाज में ऐसे बाकी बलात्कारियों के हाथ बाकी लड़कियों, महिलाओं, और बच्चों की दुर्गति होना कम होती है। 

लेकिन हम छत्तीसगढ़ में लगातार यह देखते हैं कि आसाराम के भक्तजन कभी सरकारी स्कूलों में आसाराम की किताबें बांटते हैं, कभी सार्वजनिक जगहों पर पंडाल लगाकर आसाराम के बैनर लगाकर कार्यक्रम करते हैं, और कभी आसाराम की शोभायात्रा निकालते हैं। सरकार को अपनी जिम्मेदारी पूरी करना चाहिए, और ऐसे सजायाफ्ता कैदियों को महिमामंडित करने की सार्वजनिक कोशिशों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। सजा पाए हुए जो कैदी हैं, उनका गौरवगान करते हुए उनके जो अनुयायी सरकारी जगह पर कार्यक्रम करते हैं, उस पर पूरी रोक लगनी चाहिए। नाबालिग बच्चों के साथ बलात्कार करने वाले ऐसे बाप-बेटे की पूजा करना भी आज जिन मूर्ख मां-बाप को सही लगता है, जो अपने बच्चों को साथ लेकर आसाराम के पर्चे बांटते हैं, उनकी समझ को धिक्कार है। चूंकि मूर्खता के खिलाफ भारत में कोई कानून नहीं बना है, इसलिए बच्चों के बलात्कारी की भक्ति करने का काम अपने बच्चों के साथ भी लोग कर सकते हैं, और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती, ऐसे बच्चों को उनके मां-बाप की मूर्खता से बचाया नहीं जा सकता। लेकिन सार्वजनिक जगहों पर जब मुजरिमों का गौरवगान किया जाए, तो उस पर रोक लगाना सरकार की जिम्मेदारी है। समाज के दूसरे तबके के लोगों को भी ऐसे बलात्कारी-बाबाओं का पर्दाफाश करने के लिए सामने आना चाहिए, और जहां कहीं आसाराम-भक्त अपने बच्चों के साथ ऐसी भक्ति दिखाते नजर आएं, समाज के दूसरे तबके के लोगों को जाकर ऐसे मां-बाप को समझाना चाहिए। यह एक सामूहिक-सामाजिक-सरोकार की बात है, और सरकार अपना जिम्मा पूरा करे, और समाज भी बलात्कारी का गौरवगान रोकने के लिए आगे आए। 

ऐसे ही बड़े-बड़े मामलों में जब अदालत से सजा होती है, तो आम लोगों का भरोसा अदालतों पर बढ़ता है कि सामाजिक और राजनीतिक ताकत से भी ऐसे पाखंडी गुरू बच नहीं सकते, और न ही देश के सबसे महंगे वकील सबसे बेबस लोगों को तोड़ सकते, अदालत का रूख मोड़ सकते। बलात्कारी-आसाराम के बलात्कारी बेटे का गुनहगार साबित होना देश के लिए एक खुशी की बात है क्योंकि समाज से ऐसे बलात्कारियों के हटने पर ही बाकी लड़कियां, महिलाएं, बच्चे सुरक्षित रहेंगे। देश के बाकी बाबाओं पर भी बारीक नजर रखने की जरूरत है, ताकि उनका कोई जुर्म हो, तो साबित हो सके।
-सुनील कुमार

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