विशेष रिपोर्ट

दोरनापाल, बुनियादी सुविधाओं से वंचित मरईगुड़ा
दोरनापाल, बुनियादी सुविधाओं से वंचित मरईगुड़ा
Date : 26-Apr-2019

न पेंशन, न शौचालय, न सिलेंडर, न आवास, न रोजगार, न बिजली 
62 में 50 परिवार के पास राशनकार्ड नहीं, वनोपज से राशन

अमन सिंह भदौरिया 
दोरनापाल, 26 अप्रैल (छत्तीसगढ़)। सुकमा जिले में बेरोजगारी व पलायन की समस्या से सबसे ज्यादा जूझ से कोंटा ब्लॉक में कल जिस बिरला पंचायत के मरईगुड़ा राजस्व में समाजसेवियों के प्रयास से 25 आदिवासी परिवार 15 साल बाद अपने गृह ग्राम लौटे।  जिस गांव को इस परिवार ने 15 साल पहले छोड़ शांति का जीवन जीने तेलंगाना में बसेरा किया उस गांव की पड़ताल में उस वक्त छत्तीसगढ़ की टीम भी पहुंची। ये गांव एर्राबोर से 8 किमी अंदर है  यहां पहंचने के लिए  कच्चे रास्ते हैं । गांव में पहुंचते ही छत्तीसगढ़ ने गांव में एक चौपाल लगाई जिसमे समस्याओं का अंबार निकला।

बिरला पंचायत अंतर्गत मरईगुड़ा राजस्व के मुखिया सोढ़ी जोगा बताते है कि गांव में लगभग 62 परिवार है जिसमे लगभग 200 सदस्य हैं और इनमें केवल 12 परिवार के पास राशनकार्ड है 50 परिवार सालों से पीडीएस योजना से वंचित है 50 बच्चे जिनमें 1 कुपोषित है । गांव में पक्का स्कूल भवन नही 2006 में नक्सलियों ने तोड़ दिया था जिसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर झोपड़ी का स्कूल बनाया जिसमे 8 बच्चे अध्ययनरत है शेष 42 बच्चे बाहर आश्रम पोटाकेबिन में पढ़ रहे हैं । शिक्षक भी यहां सप्ताह में केवल 2 दिन स्कूल पहुंचते हैं। गांव में 40 वृद्धा व विधवा हैं मगर अब तक एक को भी पेंशन नही मिल रहा। बिजली नहीं तो अंधेरे में रात गुजारना पड़ता है कि मड़कम सोमा ने बताया कि सुजला योजना के तहत साल भर पहले गांव में लगभग 50 सोलर के सेट लगाए गए थे पर वो कुछ महीने में ही खराब हो गए फिर इसे देखने तक कोई नहीं आया।
रोजगार नहीं
आम तौर पर बेरोजगारी पूरे भारत की समस्या है मगर नक्सलप्रभावित जिले के तौर पर जाना जाने वाले सुकमा में आदिवासियों के पास रोजगार के अवसरों की कमी यहां की प्रमुख समस्या है । क्योंकि अशिक्षित वर्ग केवल वनोपज और खेतीबाड़ी पर निर्भर है । ऐसे में जीवनशैली में सुधार और पेट पालने खाली समय ज्यादातर आदिवासी तेलंगाना में मिर्ची तोडऩे मजदूरी करने जाते हैं । जोगा ने बताया कि हम मनरेगा के तहत भी काम करना चाहते हैं अगर प्रशासन अवसर दे तो कई परिवार को पलायन से रोका जा सकता है। काम न मिलने से ही हमे बाहर राज्यों में जाना पड़ता है । वनोपज से गुजारा होना मुश्किल है। ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़   के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार से ये अपील की है कि उनके लिए रोजगार के अवसर दिए जाएं इसमे आने वाली कमियों को दूर किया जाए तो पलायन को रोका जा सकता है।
 राशन कार्ड न आधार कार्ड
ग्रामीणों से जब  मूलभूत योजनाओं के लाभ के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि गांव में 62 परिवार है जिनमें केवल 12 परिवार ही राशन की योजना का लाभ ले रहा है । क्योंकि बाकी परिवारों के पास सालों से राशनकार्ड नहीं है। मुखिया जोगा ने बताया कि 3 साल पहले सभी के पास राशनकार्ड थे पर सेल्समैन दीपक द्वारा राशन दुकान में ही कार्ड जमा करवा लिया गया था तब से अब तक राशन कार्ड नहीं मिला और जब ग्रामीणों द्वारा सचिव से राशनकार्ड बनवाने को कहा जाता है तो कलेक्ट्रेट जाकर राशन कार्ड बनवा लो ये जवाब मिलता है। 

सोढ़ी जोगा ने बताया उक्त योजना से वंचित परिवार एर्राबोर साप्ताहिक बाजार से पीडीएस का सरकारी चांवल गल्ला व्यापारियों से वनोपज के बदले खरीदते हैं । 'छत्तीसगढ़' ने मौजूद सेल्समैन से जब पूछताछ कि तो उसने बताया राशनकार्ड तो बन जाएगा पर ग्रामीणों के पास आधारकार्ड नहीं है । वहीं ग्रामीणों ने ये भी बताया कि कई ऐसे परिवार हैं जिनके पास आधार कार्ड नहीं जब सचिव से गांव में आधारकार्ड  बनाने वाले को बुलवाकर आधारकार्ड बनवाने को कहा जाता है तो जवाब में मिलता हैं कि बहुत काम हो जाता है समय नहीं मिल पाता है।
मूलभूत योजनाओं का लाभ नहीं  
बिरला पंचायत के मरईगुड़ा राजस्व में  कई योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है कोंटा ब्लॉक को ओडीएफ घोषित किया गया है पर इस गांव में एक भी शौंचालय नही ग्रामीण खुले में शौच को मजबूर हैं । पक्के छत का वादा प्रधानमंत्री आवास योजना अब तक इस गांव में नहीं पहुंच पाई सभी कच्चे मकान है केवल फॉर्म भराया गया । सुजला योजना के तहत गांव में अब तक एक भी घरों तक गैस सिलेंडर नही पहुंची महिलाएं लकड़ी से धुंए में खाना पकाती हैं । पेंशन योजना का भी लाभ यहां नही मिल पा रहा है । गांव में 4 हैंडपंप हैं जिसमे से 2 में आयरनयुक्त गन्दा पानी आता है । 2 अन्य में अब तक चबूतरा निर्माण नही हुआ। मनरेगा के तहत काम करना चाहते हैं ग्रामीण । सोलर 6 माह में खराब चिमनी के सहारे रात काट रहे हैं।  स्कूल भवन नही तो झोपड़ी में स्कूल संचालित है।

आंध्र से लौटे ग्रामीण  माड़वी गंगा वर्ष 2006 सलवाजुड़ुम हुआ तो पहले के लोग आंध्र चले गए वहां भी जमीन नही मिला। वापस आकर अच्छा लगा । आंध्र में भी तकलीफ हुई वहां जमीन भी नही मिला आंध्र में मजदूरी करके पेट पाल रहे थे पर वहां अधिकार नही दिया जा रहा है । वापस आकर यहां खेतीबाड़ी करेंगे। रोजगार मिला तो जरूर करेंगे।

मुखिया ,मरईगुड़ा सोढ़ी जोगा का कहना था कि हमारे गांव में मूलभूत समस्याए है बेरोजगारी प्रमुख है। योजनाओं से ग्रामीण वंचित हैं राशन नही मिल पाता । शासन प्रशासन से अपील है कि गांव की समस्या पर गौर कर समस्या को दूर करें रोजगार देवें ताकि पलायन को रोका जा सके हम मनरेगा में भी काम करने को तैयार हैं अवसर मिल जाए।

पेंशन के लिए जो पात्र हैं उनको पेंशन मिलेगा। राशनकार्ड के लिए ग्रामीणों के पास आधारकार्ड नही है योजना से वंचित परिवार गल्ला व्यापारियों से जो राशन खरीद रहे होंगे वो मरईगुड़ा पंचायत का नही होगा बाकी पीडीएस का चांवल होगा तो वो जानें। सचिव मेरे सामने ही बैठा है  मैं उससे बात करता हूँ क्या मामला है योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को उनकी पात्रता के हिसाब से दिया गया है और जिन्हें नहीं मिल रहा उन्हें भी जल्द दिया जाएगा।  
बीएस मंडावी, जनपद सीईओ

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