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लंबी उम्र जीना है तो फोन से बनाएं दूरी
लंबी उम्र जीना है तो फोन से बनाएं दूरी
Date : 02-May-2019

नई दिल्ली, 30 अप्रैल 2019 । अगर मोबाइल से जरा भी देर दूर नहीं रह पाते और ज्यादा इस्तेमाल के बाद इस आदत को कम करने का सोचते हैं तो ऐसा आज ही शुरू कर दीजिए। कई साक्ष्यों से यह बात सामने आई है कि जितना वक्त हम अपने स्मार्टफोन पर बिताते हैं उससे हमारी नींद, सेल्फ स्टीम, रिलेशनशिप, याद्दाश्त, अलर्टनेस, क्रिएटिविटी, प्रॉडक्टिविटी समस्या का समाधान करने और फैसला लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है। 

इसके साथ ही स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम करने की एक बड़ी वजह यह है कि ज्यादा इस्तेमाल से आपकी उम्र घट रही है। दरअसल स्मार्ट फोन हमारे शरीर का स्ट्रेस बढ़ाने वाला हारमोन यानि की कॉर्टिसॉल बढ़ता है। कॉर्टिसॉल हमारी हेल्थ के लिए नुकसानदायक है और साथ ही हमारे जीवन को भी कम करता है। 

बढ़ रहा है फोन का अडिक्शन 
फोन के डिसकशंस का बायोकेमिकल इफेक्ट डोपामीन पर केंद्रित रहता है। यह केमिकल आदतें डालने और अडिक्शन बढ़ाने के लिए होता है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि डोपामीन की वजह से ही हम फोन के अडिक्टेड होते जा रहे हैं वहीं फोन की वजह से हमारा कॉर्टिसॉल बढऩा ज्यादा खतरनाक है। 

ग्लोबल डेटा रिसर्च फर्म 1 द्वारा किए गए एक स्टडी में सामने आया कि रिलेशनशिप में रहने वाले एक तिहाई लोगों को लगता है कि उनका पार्टनर उनको इग्नोर करता है। इसकी वजह है आपका स्मार्टफोन। आपके जिस समय और अटेंशन का हकदार आपका पार्टनर है, वह समय अब आपका स्मार्ट फोन ले रहा है। अगर आपका फोन भी आपके रिश्ते पर हावी हो रहा है तो आपको खुद से ये सवाल पूछना चाहिए।

आप अपना खाली समय कैसे बिताते हैं? क्या आपके एक हाथ में कॉफी का कप होता है और दूसरे में मोबाइल? या फिर आप फोन पर अपनी फवरिट सीरीज देखते हैं। अगर खाली समय में आपकी ऐक्टिविटीज आपके फोन के इर्द-गिर्द घूमती है तो यह आपके लिए चेतावनी है। इससे पहले कि मोबाइल आपके रिश्ते में दरार डाल दे, आपको सावधान हो जाना चाहिए।

आप अपने पार्टनर की बातों का जवाब किस तरह देते हैं? क्या आप उन्हें पूरी बात समझाते हैं या फिर सिर्फ 'हम्म्म्म' जैसे छोटे शब्दों में देते हैं। अगर आप अपनी बातें कम शब्दों में खत्म कर देते हैं तो आपको ध्यान देना चाहिए कि क्या आप ऐसा फोन में व्यस्त रहने की वजह से करते हैं?

क्या आप घर की छोटी-छोटी चीजें भूल जाते हैं? आपके पार्टनर ने घर आते वक्त आपको कुछ लाने के लिए कहा था और आप भूल गए या परिवार के किसी सदस्य को बर्थडे, ऐनिवर्सरी विश करना भूल गए। इस तरह की आदत अगर धीरे-धीरे आपके रिश्ते पर हावी होने लगे तो आपको ध्यान देना चाहिए कि क्या इस आदत की वजह आपका फोन तो नहीं है।

क्या आप पार्टनर के साथ टीवी या मूवी सिर्फ उन्हें कंपनी देने के लिए देखते हैं। मूवी के समय भी आप फोन में लगे हुए हैं और इस बात से बेखबर है कि आपके सामने क्या हो रहा है तो यह आपके पार्टनर को काफी परेशान कर सकता है।

क्या आप अपने पार्टनर को बात दोहराने के लिए कहते हैं क्योंकि आपने पहली बार में ध्यान नहीं दिया। आपको समझने की जरूरत है कि आपके पार्टनर को आपके अटेंशन की जरूरत है आपके फोन को नहीं। खुद से पूछिए, आपसे प्यार कौन करता है, आपका पार्टनर या फोन?

आज के समय में स्मार्टफोन से दूर रहना मुश्किल है लेकिन आप अपने लिए कुछ रूल बना सकते हैं। बेड पर जाने से पहले फोन स्विच ऑफ कर दें। जब तक बहुत जरूरी न हो ऑफिस के कॉल्स घर पर न अटेंड करें और पार्टनर के साथ रहने पर फोन को अवॉइड करें।


कॉर्टिसॉल एक ऐसा हॉरमोन है जो शरीर में अचानक किसी ट्रिगर से हमारा बचाव करता है जैसे ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट या ब्लड शुगर बढऩे पर। लेकिन हमारा शरीर तनाव की स्थिति में भी कॉर्टिसॉल रिलीज करता है जैसे जब आप नाराज बॉस का मेल चेक करने के लिए फोन देखते हैं। प्रफेसर डेविड ग्रीनफील्ड बताते हैं कि अगर फोन आपके आसपास है या आपको इसकी आवाज भी सुनाई दे जाए तो आपका कॉर्टिसॉल लेवल बढ़ जाता है। 

ऐसे जान ले सकता है कॉर्टिसॉल का बढ़ता लेवल 
ऐसा होने पर थोड़ी देर के लिए भले आपको अच्छा लगे पर लंबे समय में इसके नतीजे घातक हो सकते हैं। जब भी आप फोन चेक करते हैं तो कुछ न कुछ स्ट्रेस देने वाला आपका इंतजार कर रहा होता है, इससे आपका कॉर्टिसॉल बढ़ता है फिर आप कुछ चेक करते हैं और फिर आपका मन फोन चेक करने का करता है। यह साइकल चलती रहती है, इससे लगातार कॉर्टिसॉल लेवल बढ़ता जाता है। और कॉर्टिसॉल लेवल के लगातार बढ़ते रहने से डिप्रेशन, मोटापा, मेटाबॉलिक सिन्ड्रोम, टाइप 2 डायबीटीज, फर्टिलिटी इश्यूज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, डिमेंशिया और स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। (नवभारत टाइम्स)

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