विशेष रिपोर्ट

कसडोल के 10 हजार एकड़ में रबी धान की खेती

Posted Date : 07-May-2019



गोरेलाल तिवारी
अनुदान योजना का लाभ राजादेवरी कसडोल विकासखण्ड का वनों से आच्छादित राजादेवरी के 42 गांव तथा अभ्यारण्य क्षेत्र के 15 ग्रामों में छुटपुट हुई रबी फसल धान की हरियाली स्वाभाविक रूप से देश के उन्नत प्रांत पंजाब को याद दिलाती है ।उक्त क्षेत्र की हरियाली जहां भीषण तपन पर ठंडकता आत्मा को तृप्त करती है वहीं पूरे क्षेत्र की हरियाली अच्छी फसल की जगी उम्मीद ने किसानों को प्रफुल्लित कर दिया है। 
कसडोल, 7 मई।  विकास खण्ड के 230 ग्रामों जिसमें नगरपंचायत कसडोल एवम टुंड्रा सहित 110 ग्राम पंचायत शामिल हैं। इसमें राजादेवरी क्षेत्र के 42 गांव तथा अभ्यारण्य क्षेत्र बार कोठारी के करीब 15 गांव में रबी फसल धान की खेती हुई है। क्षेत्र में अनाज की रबी फसल धान ,गेहूं की खेती के अलावा दलहन तिलहन की खेती पर भी किसानों ने ध्यान दिया है। 

कृषि विभाग  के अनुसार कसडोल क्षेत्र में 11हजार एकड़ में धान की खेती के अलावा करीब 3हजार एकड़ से अधिक कृषिभूमि में गेहूं की फसल किसानों ने लिया है । गेहूं के फसल की कटाई मिजाई का काम सम्पन्न हो गया है । कृषि विभाग ने कहा है कि दलहन तिलहन की भी करीब 1500 एकड़ में खेती होने का अनुमान है । इसमें मैदानी क्षेत्रों के ग्राम मोहतरा चरौता छेछर ,भडरा,सिनोधा ,कोसमसरा सेमरिया मालिडीह नवापारा नारायणपुर खैरा, बरबसपुर आंवराई अर्जुनी आदि करीब 50 ग्रामों में भी छुटपुट दलहन तिलहन के अलावा गेहूं धान की खेती हुई है । एक अनुमान के अनुसार मैदानी क्षेत्रों के ग्रामों जिसमें टुंड्रा इलाके के कुछ ग्राम भी शामिल है एक हजार से अधिक कृषि भूमि में धान की खेती हुई है ।

धान की हरियाली 
कृषि विकास खण्ड कार्यालय से मिंली जानकारी के अनुसार कसडोल विकास खण्ड क्षेत्र के राजा देवरी 42 गांव तथा बार कोठारी अभ्यारण्य क्षेत्र के बार ,चरौदा,मुड़पार ,पांडादाह ,दोन्द ,लाटा दादर ,मोहदा, ढेबी, ढेबा, लोरिद खार ,अकलतरा देवगांव गबोद आदि करीब 15 ग्रामों में भी रबी फसल धान की खेती किया गया है । उक्त ग्रामों सहित राजादेवरी क्षेत्र के 42 गांव में कई गई सर्वेक्षण किसानों से की गई जानकारी तथा कृषि विभाग ने 10 हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि में रबी फसल धान की खेती हुई है । 

पूरा राजा देवरी क्षेत्र की मनमोहक हरियाली तपती धूप में ठंडक हवा शुकुन देने लगती है । राजदेवरी 42 गांव जोंक नदी के बीचों बीच दो भागों में बंटी हुई है । जिसके पूर्वी जोंक के अंतर्गत थरगांव कुशगढ़ ,कुशभांठा ,बरपानी, सोनपुर नगरदा नगेड़ी ,नगेड़ा,छाता बिलारी ,कुरमाझर आदि पंचायतों सहित 20 गांव करीब आते हैं । इसी तरह पश्चिमी जोंक के अंर्तगत चांदन देवरी, देवगांव, बाघमाडा, देवरूनग छतवन रिकोकला अमरूवा दुमरपाली रंगोरा चेचरापाली ,बया कोसम सरा, धमलपुरा,कोरकोटी पंचायत सहित 22 गांव आते हैं । हालात का जायजा लेने पर उन्नत कृषक विजय बरिहा ,इंद्रजीत पटेल ग्राम देवगांव ,मुन्नालाल नायक ,घूरऊठाकुर चान्दन, प्रदीप नायक सुखरी ,दरसराम नेताम छतवन ,भोजराम यादव ,उमाशंकर यादव ,बादल प्रधान ,लक्ष्मण पटेल ग्राम रंगोरा ,सन्तोष पटेल लक्षमी लाल नायक चेचरापाली नें बताया है कि रबी फसल धान अच्छी पैदावार होने की उम्मीद जगी है।

 दलहन तिलहन खेती बोर से
 राजा देवरी क्षेत्र का 42 गांव तथा बार,कोठारी वनक्षेत्र के 15-20 ग्रामों में निजी बोर भूमि गत जल स्रोत के माध्यम से ही ब्यापक स्तर पर रबी फसल धान,गेहूं,दलहन तिलहन की खेती होते आ रही है । हरेभरे जंगलों ,पहाड़ों की वादियों से घिरे इस क्षेत्र में जोंक नदी ,कन तरा नाला सहित छोटे बड़े नदी नालों का प्रचुर जल स्रोत है । यही वजह है कि खरीफ फसल धान को अंतिम पानी की जरूरत पड़ती है तो किसान बोर की सिंचाई से पूरा करते हैं पिछले 3 दशक से जहां प्रारम्भ में मध्यम वर्गीय कृषक ही बोर उत्खनन कराकर रबी फसल लेते थे ।किंतु प्रदेश और केंद्र सरकार की कृषि उन्नत कृषि अनुदान योजना का लाभ सीमांत और लघु कृषक भी पिछले 3 दशक से लेने लगे हैं। राजादेवरी क्षेत्र में विद्युतीकरण का जाल बिछा हुआ है । यही वजह है कि लगातार बोर की संख्या में इजाफा हो रहा है। क्षेत्र के किसानों  के अनुसार करीब 3500 बोर कनेक्शन खेतों में होने का अनुमान है। इसी तरह वन क्षेत्र जहां अभ्यारण्य बार कोठारी परिक्षेत्र के ग्रामों में सौर ऊर्जा बोर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिसकी संख्या लगातार बढ़ रही है।

रबी फसल का आकर्षण बढ़ा 
कसडोल विकासखण्ड कृषि विकास अधिकारी नें समय से पूर्व वांच्छित धान गेहूं दलहन तिलहन बीजों को उपलब्ध कराया गया है जिसके कारण ब्यापक स्तर पर रबी फसल की खेती संम्भव हुई है। इसी तरह जिला सहकारी बैंक शाखा कसडोल एवम टुंड्रा के अंतर्गत 14 कृषि साख समितियों के गोदामों में खाद की व्यवस्था की गई थी। पूरे क्षेत्र की धान फसल में हरियाली छाई हुई है। इस साल दिसंबर  में मौसम की बेरुखी की वजह से जमीन गीली रहने के कारण धान बोनी का काम जनवरी तक 70 प्रतिशत ही हो पाई थी। शेष 15 फरवरी तक पूरा कर लिया गया है। धान में ज्यादातर दूध भराई तथा धान की बालियां निकलनी शुरू हो रही है । किसानों का कहना है कि अधिकतर जल्द पकने वाली अर्ली व्हेराईटी का धान ज्यादा बुवाई किया गया है । फसल में बीमारी से निजात मिंली है , किंतु लो वोल्टेज एवम बिजली घण्टों तक बंद रहने की समस्या से किसान चिंतित हैं । राजदेवरी क्षेत्र तथा अभ्यारण्य क्षेत्र में यदि जल स्रोत को एनीकटों के माध्यम से संरक्षण मिल जाय तो रबी फसल की खेती में बेतहाशा वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 

 

 




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