सेहत / फिटनेस

आनुवांशिक कारणों से होती है हीमोफीलिया की समस्या

Posted Date : 15-May-2019



हीमोफीलिया रक्त संबंधी विकार है जो खून का थक्का बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। यह महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में आम है। जो लोग इससे पीडि़त होते हैं उनमें चोट लगने या सर्जरी के दौरान रक्तस्त्राव अधिक मात्रा में और काफी देर तक होता है। कभी-कभी तो रक्तस्त्राव बिना चोट लगे भी हो जाता है, लेकिन यह समस्या सामान्य हीमोफीलिया में नहीं बल्कि गंभीर हीमोफीलिया से पीडि़त लोगों में दिखाई देती है।
कौन से लक्षण हीमोफीलिया के संकेत हो सकते हैं ?
अगर मरीज की स्थिति गंभीर है तो स्वत रक्तस्त्राव हो सकता है। जिसके लक्षण हैं चोट या कट लगने या सर्जरी के बाद से अत्यधिक रक्तस्त्राव होना। जोड़ों जैसे घुटनों, कोहनियों और कंधों में गर्माहट, सूजन और दर्द का अनुभव होना। यह बच्चों में ज्यादा देखने को मिलता है। टीकाकरण के बाद असामान्य रक्तस्त्राव, मूत्र या मल में रक्त, अज्ञात कारण से नकसीर, नवजात शिशुओं में अतिसंवेदनशीलता विकसित होना आदि।
इसके क्या कारण हैं ?
जब रक्तस्त्राव होता है, तब हमारे शरीर की लाल रक्त कणिकाएं एक साथ आकर इस ब्लड को रोकने के लिए एक थक्का बना लेती हैं। यह प्रक्रिया कुछ निश्चित रक्त कणिकाओं द्वारा होती है। हीमोफीलिया तब होता है जब इन क्लॉटिंग फैक्टर्स में से किसी की कमी होती है। यह एक आनुवांशिक रोग है, जो बच्चों को उनके माता-पिता से होता है। इसके 70 फीसदी मामले आनुवांशिक होते हैं। लेकिन लगभग 30 प्रतिशत लोगों में यह डिस्ऑर्डर जेनेटिक चेंज (स्वत म्यूटेशन) के कारण होता है।
हीमोफीलिया को नियंत्रित रखने के लिए कारगर उपाय ?
अभी तक इसका कोई स्थायी उपचार नहीं है। लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर हीमोफीलिया से पीडि़त लोग सक्रिय जीवन जी सकते हैं। नियमित रूप से एक्सरसाइज, स्वीमिंग, साइक्लिंग और पैदल चलने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जोड़ों की सुरक्षा होती है। फुटबॉल, हॉकी या पहलवानी, उन लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है जिन्हें हीमोफीलिया है। कुछ निश्चित दर्द निवारक और रक्त को नियंत्रित करने वाली दवाएं लेने के साथ चोट से बचाव जरूरी हैं।




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