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'विद्यासागर प्रतिमा बादलों की आड़ लेकर तोड़ते तो किसी को पता नहीं चलता!'
'विद्यासागर प्रतिमा बादलों की आड़ लेकर तोड़ते तो किसी को पता नहीं चलता!'
Date : 16-May-2019

कोलकाता में मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली के दौरान उनकी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं के बीच भारी झड़प हुई थी। सोशल मीडिया में कल से ही इस घटना को लेकर दोनों पार्टियों के नेता और समर्थक एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। इस बीच ट्विटर पर देश के सबसे बड़े समाज सुधारकों में गिने जाने वाले ईश्वर चंद्र विद्यासागर ट्रेंडिंग टॉपिक में शुमार हुए हैं। दरअसल कल भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ताओं की झड़प के दौरान कुछ उपद्रवी तत्वों ने विद्यासागर कॉलेज में लगी उनकी मूर्ति तोड़ दी थी।
सोशल मीडिया पर एक बड़े तबके ने इस घटना पर आक्रोश जताते हुए इस समाज सुधारक के कामों को गिनाया है। वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष का ट्वीट है, 'ईश्वर चंद्र विद्यासागर एक सुधारक थे, विद्वान थे और बंगाली पुनर्जागरण के पथ प्रदर्शक थे। बंगालियों के सामने उनकी प्रतिमा को तोडऩा दिखाता है कि जिसने भी यह काम किया है वह उनके बारे में कुछ नहीं जानता या फिर उसे बंगाल और इसकी मूल भावना की कोई कद्र नहीं है।Ó
मीडिया में आई कुछ खबरों के मुताबिक विद्यासागर की मूर्ति को भाजपा समर्थकों ने तोड़ा है और इस हवाले से फेसबुक-ट्विटर पर पार्टी और उसके पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को जमकर घेरा जा रहा है। दूसरी तरफ भाजपा समर्थकों ने टीएमसी कार्यकर्ताओं को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। सोशल मीडिया में इस पूरे घटनाक्रम पर आई कुछ और अहम प्रतिक्रियाएं :
द मंक- जय श्री 'रामÓ के नारों के बीच 'ईश्वरÓ चंद्रजी की ही मूर्ति तोड़ दी। अब समझ जाइए 'भारतÓ माता की जय के नारों के बीच ये क्या तोडऩे का प्रयत्न कर रहे हैं।
अनुपम गुहा- विद्यासागर मूर्तियों में नहीं बसते। जहां जाति का विरोध होता है, विद्यासागर वहां बसते हैं। जहां पितृसत्ता के खिलाफ लड़ाई होती है, विद्यासागर वहां बसते हैं। जहां भूखों को खाना और बच्चों को शिक्षा मिलती है, विद्यासागर वहां बसते हैं। जहां भी दमन है उसके खिलाफ संघर्ष कीजिए, मूर्ति की चिंता मत कीजिए।
ऐसी-तैसी डेमोक्रेसी- मूर्ति तोडऩी ही थी तो बादलों में छुपकर जाना चाहिए था न चौकीदारों को!
सिद्धार्थ भाटिया- मुझे इस बात में कोई हैरानी नहीं हुई कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ी। विद्यासागर बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे, उच्च शिक्षा प्राप्त थे और सुधारवादी थे, विधवाओं के पुनर्विवाह की बातें करते थे... इन सबसे संघ (आरएसएस) को नफरत है।
सुयश सुप्रभ- संघियों (आरएसएस के कार्यकर्ता) की गलती नहीं है। विद्यासागर में 'विद्याÓ देखते ही उनका हाथ लाठी की तरफ बढ़ गया।
मनु पंवार- शास्त्रों में लिखा है, जब ये समाज सुधर कर ओवरफ्लो करने लगेगा तो समाज सुधारकों की प्रतिमाएं तोड़ी जाने लगेंगी। (सत्याग्रह ब्यूरो)

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