विशेष रिपोर्ट

रायपुर, सुप्रीम कोर्ट से मंजूर कैम्पा के करोड़ों रुपयों की अफसरों ने की राजधानी रायपुर में बर्बादी और अफरा-तफरी
रायपुर, सुप्रीम कोर्ट से मंजूर कैम्पा के करोड़ों रुपयों की अफसरों ने की राजधानी रायपुर में बर्बादी और अफरा-तफरी
Date : 25-May-2019

सुप्रीम कोर्ट से मंजूर कैम्पा के करोड़ों रुपयों की अफसरों ने की राजधानी रायपुर में बर्बादी और अफरा-तफरी

तिलक देवांगन
रायपुर, 25 मई (छत्तीसगढ़)।
महाराजबंध तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के नाम पर वन विभाग ने साढ़े 5 करोड़ रूपए फूंक दिए, पर काम पूरा नहीं हो पाया। हाल यह है कि वन विभाग निर्माण कार्य को पूरा बताकर तालाब को नगर निगम को सौंपने के लिए तैयार है, लेकिन निगम उसे अपने कब्जे में लेने के लिए तैयार नहीं है। निगम का कहना है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी काम थोड़ा बहुत ही हुआ है। निगम के पदाधिकारी इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। यह पूरा मामला देश में पेड़ों की कटाई के एवज में सुप्रीम कोर्ट में जमा कराई गई रकम का है जो कि राज्यों को वृक्षारोपण के लिए कैम्पा योजना के तहत आबंटित की जाती है।

करीब डेढ़  साल पहले वन विभाग ने कैम्पा मद की राशि से शहर के महाराजबंध तालाब के लिए करीब साढ़े 7 करोड़ मंजूर कर वहां संरक्षण, संवर्धन व सौंदर्यीकरण का काम शुरू कराया था, लेकिन अधिकांश काम अब भी अधूरे पड़े हैं। खासकर तालाब सफाई, गार्डन, नाली, चारदीवारी, पाथवे, लाइटिंग, ड्रेनेज सिस्टम, घाट निर्माण, बैठक व्यवस्था व टायलेट, पानी शुद्धिकरण उपकरण काम अभी भी अटका हुआ है। जबकि इस तालाब का संरक्षण, सौंदर्यीकरण तेलीबांधा तालाब की तरह होना था। तत्कालीन वन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने उस समय पद पर काबिज सीसीएफ अरुण पांडेय व रायपुर डीएफओ उत्तम गुप्ता को बुलाकर जमकर फटकार लगाई थी। उन्होंने लोगों और निगम पदाधिकारियों की शिकायत पर स्वीकृत राशि से तालाब संरक्षण और सौंदर्यीकरण का काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए थे, पर वन विभाग ने इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं कराया। जमीनी स्तर पर तालाब का हाल बेहाल हो गया है। 

बताया गया कि जानकारी के मुताबिक तालाब सौंदर्यीकरण के लिए कैम्पा मद से करीब 7 करोड़ 41 लाख खर्च की योजना बनाई थी। इस पर 5 करोड़ से अधिक रुपये खर्च कर दिए गए हैं। दिसंबर 2018 तक की जानकारी के हिसाब से मंजूर राशि में से करीब पौने 3 करोड़ खर्च होना बाकी है। तत्कालीन वन मंत्री, विधायक श्री अग्रवाल को तालाब सौंदर्यीकरण में भारी गड़बड़ी की शिकायत मिली है। दूसरी ओर लगातार शिकायत के बाद वन विभाग ने अब नगर निगम को एक पत्र लिखकर तालाब को वापस निगम को सौंपने की बात कही है। पत्र में कहा गया है कि तालाब सौंदर्यीकरण को लेकर विवाद चल रहा है, ऐसे में वहां आगे काम कराना मुश्किल है, पर निगम फिलहाल तालाब को अपने कब्जे में लेने के लिए तैयार नहीं है। निर्माण कार्यों पर एनजीटी की रोक भी लगी हुई है। 

निगम जोन-6 कमिश्नर विनय मिश्रा का कहना है कि निगम पदाधिकारियों, पार्षदों व क्षेत्र के लोगों की शिकायत मिल रही है कि तालाब का काम पूरा नहीं हो पाया है। दूसरी ओर वन विभाग, तालाब का काम पूरा कराने के बजाय उसे वापस निगम को सौंपने की तैयारी में है। निगम कमिश्नर को वहां से एक पत्र भी लिखा गया है, जिसमें विवाद के चलते काम पूरा न कराने और निगम को सौंपने की बात कही गई है। उनका कहना है कि तालाब में करोड़ों रुपये फूंक दिए गए है, पर वहां काम पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में निगम फिलहाल उसे अपने कब्जे में लेने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि निगम की ओर से वहां फिर से करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे। 

निगम जोन छह अध्यक्ष सालिक सिंह ठाकुर का आरोप लगाते हुए कहना है कि तालाब सौंदर्यीकरण में भारी गड़बड़ी हुई है। तालाब के तीन ओर पाथवे का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। लाइटिंग, नाली अधूरी है। लोहे की लगी ग्रिल पुरानी हो चुकी है या जंग लगकर टूट रही है। जलकुंभी ऊपर से हटा दिए गए हैं। तालाब सीमांकन का काम पूरा नहीं हो रहा है। वन विभाग को सीमांकन करा कब्जा हटाने की मांग की जा रही है, पर वहीं से प्रतिवेदन नहीं भेजा जा रहा है। ऐसे में तालाब के एक ओर कब्जा बना हुआ है। नाप-जोख के हिसाब से जिस ओर कब्जा है, वहां तालाब में 20 फीट तक कब्जा है।  उनका कहना है कि वन विभाग आधे-अधूरे सौंदर्यीकरण वाले तालाब को निगम को सौंपने का प्रयास कर रहा है, लेकिन निगम उसे अपने कब्जे में लेने के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि वहां करीब साढ़े  5 लाख खर्च किए गए हैं, पर काम कहीं नहीं दिख रहा है। ऐसे में निगम को वहां सौंदर्यीकरण व अन्य कार्यों के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने होंगे और निगम ऐसा नहीं चाहता। उन्होंने तालाब सौंदर्यीकरण व सीमांकन आदि में गड़बड़ी की जांच की मांग की है। 

 

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