विचार / लेख

 स्मृति राजनीति में हुईं ‘ग्रेजुएट’
स्मृति राजनीति में हुईं ‘ग्रेजुएट’
Date : 26-May-2019

ज्योति यादव

भले ही स्मृति ईरानी लगातार आलोचना का शिकार होती हैं लेकिन इन्सटाग्राम पर वो एक नेता की नहीं एक मिलेनियल की जिंदगी जीती हैं।

 2014 लोकसभा चुनाव समय था। प्रियंका गांधी के एक रोड शो के दौरान एक पत्रकार ने स्मृति ईरानी को लेकर सवाल पूछ लिया। प्रियंका गांधी ने जवाब दिया- कौन। स्मृति? ये लाइन मुस्कुराती हुई प्रियंका की तस्वीर के साथ अखबारों की फ्रंट पेज हेडलाइन बनी। 
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान स्मृति ईरानी ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘2014 में प्रियंका गांधी मेरा नाम नहीं जानती थीं और आज वो अपने पति से ज्यादा मेरा नाम लेती हैं।’
अमेठी में गांधी परिवार का किला भेदा

2014 में स्मृति ईरानी राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ रही थीं। ‘कौन। स्मृति’ कहकर भले ही प्रियंका गांधी ने स्मृति के अस्तित्व को खारिज़ करने की कोशिश की हो मगर अब गांधी परिवार के किले को भेद कर स्मृति ने अपना नाम प्रियंका को ज़रूर रटवा दिया है। इसके साथ ही मिर्जा गालिब का एक शेर प्रासंगिक हो गया है-

हर बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज ए गुफ्तुगू क्या है
अमेठी लोकसभा सीट से स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को करीब 55 हजार वोटों से हराया है। इस सीट से राहुल गांधी लगातार तीन बार सांसद रहे हैं। इससे पहले उनकी मां सोनिया गांधी इस सीट से जीती थीं। राजीव गांधी भी इस सीट से तीन बार जीते थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी इस सीट से हार गई थीं। स्मृति ने राहुल गांधी को हराने के बाद दुष्यंत कुमार की लिखी ये कविता ट्वीट की-

कैसे आकाश में सुराख नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो

टीवी सीरियल्स से राजनीति तक का सफर
क्योंकि सास भी कभी बहू थी से पॉपुलर हुईं देश की बहु के रूप में हर घर की पहुंची स्मृति ईरानी 2003 में भाजपा से जुड़ीं। 2005 में कॉफी विद करण शो में स्मृति ने बताया था कि कैसे लोग उनके किरदार तुलसी से भावनात्मक रूप से जुड़ गए थे। तुलसी ऐसी बहू का किरदार था जो एक बार मन में कुछ ठान ले वो पूरा करके ही दम ले। ‘तुलसी’ ने अमेठी में जीतकर इस बात को साबित भी कर दिखाया है।
2002 के गुजरात दंगों के बाद 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा पार्टी हार गई थी। स्मृति भाजपा की टिकट पर दिल्ली में चांदनी चौक लोकसभा से चुनाव लड़ीं और हार गईं। इसके बाद उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा छेड़ा। स्मृति ने नरेंद्र मोदी पर भाजपा पार्टी और अटल बिहारी वाजपेयी की छवि खराब करने का आरोप लगाया था। स्मृति ने ये घोषणा तक कर दी थी कि अगर 25 दिसंबर तक नरेंद्र मोदी अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो वो आमरण अनशन पर बैठ जाएंगी।  गौरतलब है कि 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिवस होता है। बाद में पार्टी के कहने पर उन्हें अपना बयान वापस लेना पड़ा था।
उसके बाद उनका राजनीतिक ग्राफ महाराष्ट्र में भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष से होते हुए राष्ट्रीय महिला मोर्चे की अगुवाई करने तक पहुंचा। साल 2011 में वो गुजरात से राज्यसभा सांसद चुनी गईं। उसके बाद उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने का मौका मिला। टीवी की दुनिया से आईं स्मृति के बोलने का अंदाज फिल्मी और अलग था। इस बात का उदाहरण 2016 में संसद में हुई एक बहस थी जब उन्होंने रोहित वेमुला मामले पर टीवी सीरियल्स वाले अंदाज में मायावती से कहा था, ‘अगर मायावती मेरे जवाब से संतुष्ट नहीं हुई तो मैं अपना सिर काटकर आपके चरणों में रख दूंगी।’

क्योंकि स्मृति ईरानी कभी ग्रेजुएट नहीं थीं...
स्मृति ईरानी की डिग्री को लेकर शुरू से ही विवाद रहा है। एक चुनावी शपथपत्र में उन्होंने कहा था कि वो दिल्ली विश्वविद्यालय से 1996 से आर्ट्स में ग्रेजुएट हैं। जबकि एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उन्हें येल यूनिवर्सिटी से डिग्री मिली हुई है। एक दूसरे शपथ पत्र में उन्होंने कहा कि 1994 में वो दिल्ली के ओपन लर्निंग स्कूल से बीकॉम पास की है। लेकिन इस बार इस डिग्री विवाद को विराम देते हुए नामांकन में बताया है कि वो ग्रेजुएट नहीं हैं।

विवादों से घिरा रहा कार्यकाल

2014 में अमेठी में राहुल से हारने के बाद उन्हें राज्यसभा से सांसद बनाया गया। इसके बाद उन्हें मानव संसाधन मंत्रालय की कमान सौंपी गई। डिग्री विवाद के चलते उनको ये मंत्रालय दिए जाने पर जमकर आलोचना हुई। लगातार हो रहे विवादों के बाद 2016 में उन्हें मानव संसाधन मंत्रालय से हटाकर टेक्सटाइल मिनिस्ट्री दे दी गई। यहां भी हुए विवादों के बाद उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय दे दिया गया। खबरें आईं थी कि उनके काम करने के तरीके से परेशान होकर कई आएएस अपना तबादला कराना चाहते हैं।

कार्यकाल के अलावा स्मृति के चरित्र को लेकर अक्सर अफवाहें उड़ाई जाती रही हैं। समाजवादी पार्टी के नेता आजमखान ने नरेंद्र मोदी और स्मृति ईरानी के घर के बीच किसी सुरंग के होने जैसे बुतके बयान दिए हैं। बाकी महिला नेताओं की तरह ही स्मृति की राह भी आसान नहीं रही है। लेकिन अमेठी में पिछले पांच साल से लगातार जाकर उन्होंने वहां की जनता के बीच अपनी जगह बनाई है। एक अखबार की रिपोर्ट की मानें तो वो पिछले पांच साल से अमेठी में 38 बार गई हैं।

इन्स्टाग्राम पर मिलेनियल्स वाली लाइफ

भले ही स्मृति ईरानी लगातार आलोचना का शिकार होती हैं लेकिन इन्सटाग्राम पर वो एक नेता की नहीं एक मिलेनियल की जिंदगी जीती हैं। उनका इंन्सटाग्राम बॉलीवुड स्टार्स के साथ ली गई तस्वीरों और खुद के लिए मजाकिया लहजे में आंटी नेशनल जैसे कैप्शंस से भरा हुआ है। एक कॉर्पोरेट कर्मचारी की तरह उन्हें मंडे को दफ्तर जाने से कोफ्त होती है। संसद में ज्यादा बोल लेने पर सोशल मीडिया पर तैर रहे मीम वो शेयर करती हैं। स्मृति के निजी जीवन को लेकर भी तमाम तरह की अफवाहें उड़ती रहती हैं। स्मृति के पति पारसी हैं और स्मृति हिंदुत्व पर खुलकर बोलती हैं। ऐसे में उनकी राजनीति पर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं।

कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना

 

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