विचार / लेख

विदेशी अखबार मोदी की जीत को कैसे देखते हैं?
विदेशी अखबार मोदी की जीत को कैसे देखते हैं?
Date : 26-May-2019

अभय शर्मा

वाशिंगटन पोस्ट से लेकर ग्लोबल टाइम्स तक दुनिया के तमाम बड़े अखबारों ने लोकसभा चुनाव में फिर नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत पर टिप्पणी की है।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की एक बार फिर केंद्र की सत्ता में वापसी हुई है। भारत के चुनाव पर दुनिया भर की निगाहें लगी हुई थीं। भारतीय मीडिया के साथ-साथ विदेशी मीडिया ने भी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत को बड़े पैमाने पर कवर किया है। आइये जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत को विदेशी मीडिया में किस तरह से देखा जा रहा है।

वाशिंगटन पोस्ट
अमरीका अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने ‘राष्ट्रवाद की अपील के साथ मोदी ने जीता चुनाव’ शीर्षक के साथ लिखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी ने दुनिया के सबसे बड़े चुनाव में भारी जीत हासिल की। इस जीत से साफ़ है कि मतदाताओं ने मोदी की शक्तिशाली और गर्वान्वित हिंदू की छवि पर मुहर लगा दी है।

अखबार ने लिखा है कि पांच साल पहले एक चाय बेचने वाले के बेटे नरेंद्र मोदी जब पहली बार केंद्रीय सत्ता में आए थे तो लोगों ने उन्हें बदलाव की इच्छा के साथ वोट दिया था। लोगों में विश्वास था कि वे एक अरब से अधिक लोगों के इस देश को बदल सकते हैं, अर्थव्यवस्था को बेहतर कर सकते हैं और लाखों नौकरियां पैदा कर सकते हैं।

अखबार आगे लिखता है कि लोगों की ये उम्मीदें पांच साल में पूरी नहीं हुईं, फिर भी लोगों ने नरेंद्र मोदी को चुना क्योंकि वे मतदाताओं को राष्ट्रवादी संदेश देने में सफल रहे। इस बार उन्होंने भारत के लोगों को यह भरोसा दिला दिया कि वह एकमात्र ऐसे उम्मीदवार हैं जो देश की रक्षा करेंगे और आतंकवाद से लड़ेंगे।
वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक नरेंद्र मोदी की जीत उस धार्मिक राष्ट्रवाद की जीत है जिसमें भारत को धर्मनिरपेक्षता की राह से अलग हिंदू राष्ट्र के तौर पर देखा जाने लगा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स
अमरीकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने नरेंद्र मोदी की जीत पर अपनी एक विशेष रिपोर्ट को ‘भारत के  नरेंद्र मोदी की चुनाव में ऐतिहासिक जीत’ शीर्षक के साथ छापा है। इस रिपोर्ट में ही लिखा है कि मोदी ने पूरे चुनाव प्रचार में खुद को भारत का चौकीदार बताया, जबकि उनके पहले कार्यकाल में भारत के अल्पसंख्यकों ने खुद को असुरक्षित ही महसूस किया।

न्यूयॉर्क टॉइम्स की इस रिपोर्ट में आगे लिखा है, ‘नरेंद्र मोदी ने अपने पहले पांच सालों में अरबपतियों को फायदा पहुंचाया, जनता के सामने अपनी कमजोर पारिवारिक पृष्ठभूमि का बखान किया। उन्होंने आर्थिक विकास को लेकर बहुत कुछ बोला, लेकिन देश के नौजवानों को नौकरी नहीं दे पाए। लेकिन, इन सभी बातों के बावजूद नरेंद्र मोदी अगर फिर बड़े बहुमत के साथ सत्ता में आये हैं तो इसका कारण हिंदू राष्ट्रवाद है।’ अखबार के मुताबिक नरेंद्र मोदी की जीत उनके विवादित हिंदू राष्ट्रवाद, लोकलुभावन विनम्रता और गरीबों के लिए कुछ योजनाओं- जैसे कि लाखों नए शौचालयों का निर्माण करवाने की वजह से हुई है।

डॉन
पाकिस्तान के सबसे प्रमुख अंग्रेजी अखबार डॉन ने भारतीय चुनाव को विशेष तरजीह दी है। अखबार ने भाजपा की जीत पर लिखा है, ‘भारत में इस बार चुनाव के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा का रहा। जनता ने इस मुद्दे पर आक्रामक भाषण देने वाले मोदी को अजेय जादूगर के तौर पर देखा। बालाकोट एयरस्ट्राइक के कोरियोग्राफर के तौर पर खुद को स्थापित करते हुए मोदी ने बंटे हुए विपक्ष को पूरी तरह कुचल कर रख दिया।’
डॉन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत पर संपादकीय भी लिखा है। इसमें लिखा है, ‘बड़े-बड़े पंडितों के वे दावे फेल हो गए, जो कहते थे कि आर्थिक चुनौतियों के चलते मोदी की चमक इस बार फीकी पड़ जाएगी। निश्चित ही ये नतीजे चौंकाने वाले हैं, देखकर निराशा भी होती है कि किस तरह मतदाताओं को लुभाने के लिए धार्मिक घृणा और संप्रदायवाद की राजनीति का फायदा उठाया जा सकता है।’

संपादकीय में आगे लिखा है कि नरेंद्र मोदी का पूरा चुनाव प्रचार मुस्लिम और पाकिस्तान विरोध पर केंद्रित था और इस प्रचार की शुरुआत में भारत सरकार ने राष्ट्रवाद की भावना को भडक़ाने के लिए ही पाकिस्तान के अंदर हवाई हमले किए थे।
ग्लोबल टॉइम्स
चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टॉइम्स ने भाजपा की जीत को ऐतिहासिक बताते हुए लिखा है, ‘1984 के बाद भारत में पहली बार किसी पार्टी ने लगातार दो बार पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई है। नरेंद्र मोदी की जीत से भारत के वित्तीय बाजारों में भारी उछाल आया है क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि उनकी सरकार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाएगी।’

अखबार ने आगे लिखा है इस बड़ी जीत के बाद अब नरेंद्र मोदी के लिए चुनौतियां शुरू होने वाली हैं। मोदी सरकार के लिए अगले कुछ वर्षों में सबसे बड़ी चुनौतियां रोजगार, कृषि और बैकिंग सेक्टर होंगे। 
ग्लोबल टाइम्स ने यह भी लिखा है कि जीत के बाद मोदी ने सबको साथ लेकर चलने की बात की है। लेकिन उनके लिए देश को एकजुट करना शायद मुश्किल होगा क्योंकि इस बार भाजपा चुनाव अभियान काफी विभाजनकारी था। इससे अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय यह सोचने पर मजबूर हुआ है कि उन्हें दूसरे दर्जे के नागरिक के रूप में देखा जा रहा है।

द गार्डियन
ब्रिटेन के प्रमुख अखबार ‘द गार्डियन’ ने भारत के लोकसभा चुनाव नतीजों पर लिखा है कि मोदी की असाधारण लोकप्रियता के चलते भारतीय राजनीति अब हिंदू राष्ट्रवाद के एक नए युग में प्रवेश कर गई है। गार्डियन ने अपने एक संपादकीय में नरेंद्र मोदी की जीत पर काफी तीखी टिप्पणी की है। इसके मुताबिक ब्रेक्जिट, डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी की सफलता का बीज स्थानीय नस्लवाद और असमानता द्वारा बोया गया है।
‘द गार्डियन’ के ही एक अन्य संपादकीय में लिखा गया है कि भारत की आत्मा के लिए नरेंद्र मोदी की जीत बुरी है। अखबार ने साफ़ तौर पर लिखा है कि दुनिया को एक और लोकप्रिय राष्ट्रवादी नेता की जरूरत नहीं है, जो अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक मानता हो। (सत्याग्रह)

 

 

 

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