संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय,  27 मई : राज्य का सरकारी इलाज 5 बरस में नहीं, युद्धस्तर पर सुधारने की जरूरत..
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 27 मई : राज्य का सरकारी इलाज 5 बरस में नहीं, युद्धस्तर पर सुधारने की जरूरत..
Date : 27-May-2019

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव आए दिन किसी न किसी सरकारी अस्पताल का दौरा कर रहे हैं, बदहाली देख रहे हैं, और हालत सुधारने का बीड़ा भी उठा रहे हैं। दूसरी तरफ एक भी दिन का अखबार ऐसा नहीं है जिसमें पिछली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार की कोई न कोई खबर न छपी हो। और ये तमाम खबरें राज्य के स्तर पर, या राजधानी के एक बड़े सरकारी अस्पताल को लेकर ही हैं, न कि गांव-गांव तक बिखरे हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के बारे में। ऊपर से नीचे तक स्वास्थ्य विभाग का ढांचा राज्य बनने से लेकर अब तक जिस तरह भयानक भ्रष्टाचार का शिकार रहा है, और इसमें जिस तरह मंत्री से लेकर सचिव स्तर तक के बड़े-बड़े अफसरों का शामिल होना पहली नजर में ही दिखता है, वह बहुत भयानक है। टी.एस. सिंहदेव को यह बहुत ही बिगड़ा हुआ विभाग मिला है, और यह चुनौती भरा भी है, और संभावना भरा भी। 

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में ही हर किसी के लिए चिकित्सा सुविधा का वायदा किया था, और स्वास्थ्य मंत्री ने वैसा ही रूख दिखाया भी है। लेकिन अभी यह बात समझ से परे है कि राज्य का सरकारी चिकित्सा का ढांचा क्या ऐसी किसी योजना का बोझ उठाने के लायक है, या इसमें बुनियादी फेरबदल करके इसका बहुत विस्तार करना होगा, और एक अलग ही ढांचा खड़ा करना होगा? इसके साथ-साथ यह भी देखने-समझने की जरूरत है कि केन्द्र सरकार की बीमा योजना से क्या इस राज्य को कुछ हासिल हो सकता है, या वह इतनी भ्रष्ट हो चुकी है कि राज्य के निजी अस्पताल बीते बरसों में बिना जरूरत नौजवान महिलाओं के गर्भाशय निकालकर बिल बनाते रहे, और अभी भी दांतों के अस्पताल या क्लीनिक बच्चों के दांतों की गैरजरूरी वायरिंग करके झूठे बिल बना रहे हैं। ये तमाम बातें प्रदेश कांग्रेस के ही एक सक्रिय डॉक्टर सदस्य, डॉ. राकेश गुप्ता, लगातार उठाते रहे हैं, और आज भी इस सरकार में भ्रष्ट अफसरों की बड़ी मौजूदगी और उनकी बड़ी ताकत की बात वे उठाते ही हैं। लेकिन सरकार में भ्रष्ट लोगों का कम से कम इतना तो बोलबाला आज भी दिख ही रहा है कि ऐसे लोग नई सरकार में भी कुर्सियों पर बने हुए हैं, और कमाऊ कुर्सियों पर बने हुए हैं। दूसरी तरफ पिछले बरसों के हजारों करोड़ के जो भ्रष्टाचार खरीदी में सामने आ रहे हैं, उसके जिम्मेदार अफसर अब तक खुले घूम रहे हैं, और मेडिकल-खरीदी के खुले अपराध का कोई असर उन पर दिख नहीं रहा है। 

ऐसे में कांग्रेस सरकार प्रदेश के चिकित्सा विभाग को कैसे सुधारेगी, कैसे वह हर गरीब या हर नागरिक को इलाज दे पाएगी। भ्रष्टाचार से परे भी डॉक्टरों की सैकड़ों कुर्सियां खाली हैं। सरकार के आज के वेतनमान पर कोई काबिल डॉक्टर काम करने को तैयार नहीं हैं, कोई डॉक्टर गांवों में जाकर काम करने को भी तैयार नहीं हंै। करोड़ों की ऐसी मशीनें खरीद ली गई हैं जिनको चलाने के लिए न तो तकनीशियन हैं, और न ही उनकी जांच का मतलब निकालने वाले डॉक्टर। जो सरकारी डॉक्टर हैं, वे निजी प्रैक्टिस की शर्तों वाली सीमित प्रैक्टिस के बजाय बड़े-बड़़े अस्पताल चला रहे हैं, और सरकार उसे अनदेखा करते आई है, और आज भी कर रही है। ऐसे में नए डॉक्टरों को लाने के लिए राज्य सरकार को बाजार में डिमांड और सप्लाई का संतुलन देखना होगा। अगर कम तनख्वाह पर डॉक्टर नहीं आ रहे, तो बाजार व्यवस्था के मुताबिक उनके लिए अलग तनख्वाह तय करनी होगी। गरीबों का इलाज, गांव-गांव तक इलाज, और भ्रष्टाचारमुक्त इलाज खासा मुश्किल काम है, और इसे कामयाबी से करने में हो सकता है कि इस सरकार का बचा कार्यकाल भी कम पड़े। 

टी.एस. सिंहदेव जिस तरह दिलचस्पी से मेहनत कर रहे हैं, हो सकता है कि वे कामयाब हो जाएं, लेकिन हर दिन दसियों हजार मरीज आज भी कमजोर चिकित्सा पा रहे हैं, या चिकित्सा नहीं पा रहे हैं। इसलिए इस एक विभाग को पांच साल के कार्यकाल के हिसाब से सुधारने की धीमी रफ्तार कुछ ज्यादती होगी, और इसे युद्ध स्तर पर सुधारना चाहिए। 
-सुनील कुमार

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