संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 12 जून : गडकरी की शानदार घोषणा के साथ बस एक दिक्कत है
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 12 जून : गडकरी की शानदार घोषणा के साथ बस एक दिक्कत है
Date : 12-Jun-2019

केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तेजी से काम करने के लिए मशहूर हैं। महाराष्ट्र में मंत्री-मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने ऐसा कर दिखाया था और उस वक्त, उसके बाद, भाजपा के कुछ राज्यों में उन्हें निर्माण विभागों के मार्गदर्शन के लिए भी बुलाया जाता रहा है। अभी उनका एक शानदार बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकार देश के बेरोजगार नौजवानों को काम देने के लिए देश भर के एक लाख किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ दो सौ करोड़ पेड़ लगाने जा रही है। उन्होंने कहा कि वे अफसरों से इसकी योजना बनाकर लेकर आने के लिए कह चुके हैं, इससे एक तरफ तो लाखों को रोजगार मिलेगा, और दूसरी तरफ पर्यावरण भी बचेगा। 

नितिन गडकरी ने दिल्ली में अभी इस बारे में कहा कि ऐसी ही एक योजना मनरेगा के तहत ग्रामीण और जिला सड़कों, और प्रादेशिक मार्गों के किनारे लागू की जा सकती है जिसमें हर बरस तीस लाख लोगों को रोजगार देने की क्षमता रहेगी। गडकरी ने कहा कि इसके लिए ग्राम पंचायतों को भी भरोसे में लिया जाएगा, और हर बेरोजगार नौजवान को पचास पेड़ों का जिम्मा दिया जाएगा जिनकी उपज से उनकी जिंदगी भी चलेगी। उन्होंने नदियों पर किए गए एक कार्यक्रम में बोलते हुए इस बात पर जोर दिया कि आज बारिश का जो साठ फीसदी पानी समंदर में चले जाता है, उसका एक चौथाई भी अगर भूजल री-चार्ज किया जा सके, तो उससे जल संकट दूर होगा, और लोगों को सिंचाई के अलावा घरेलू काम के लिए भी पानी दिया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बायोईंधन को बढ़ावा देकर पेट्रोल, डीजल, और गैस का आयात घटाने जा रही है जिससे छह लाख करोड़ रूपए सालाना बचेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका विभाग दूसरे विभागों के साथ तालमेल करके गंगा-यमुना की सफाई की योजना बना रहा है। 

इस पूरे समाचार को पढ़कर जब इसे छापने की तैयारी की जा रही थी, तब एक छोटे से तथ्य पर जानकारी गई कि यह जून 2014 में छपा हुआ है, और न कि जून 2019 में। 

इस बयान को आज पूरे पांच बरस हो चुके हैं, और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे कहीं पेड़ लगे हों ऐसा तो देखने में नहीं आया है। रोजगार गिरकर पिछले 45 बरसों में बेरोजगारी को सबसे ऊपर ले गए हैं। बेरोजगार नौजवानों को 50-50 पेड़ नहीं मिल पाए हैं, ठीक उनके खातों में 15-15 लाख रूपए की तरह। और गंगा-यमुना की सफाई पिछले पांच बरस में और घट चुकी है, और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगठन ताजा बदहाली पर फिक्र ही जाहिर कर रहे हैं। अभी तक कम से कम छत्तीसगढ़ में तो राज्य सरकार के स्तर पर ऐसी कोई भी चर्चा पिछले पांच बरस में सामने नहीं आई कि राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों के किनारे मनरेगा से वृक्षारोपण करके उन्हें बेरोजगारों को सौंपा जाएगा, और 2014 से लेकर अब तक चार बरस तक इस राज्य में भाजपा की ही सरकार थी। 

जैसा कि हमने शुरू में ही लिखा है कि नितिन गडकरी तेजी से काम करने वाले मंत्री माने जाते हैं, और उनके कई ऐसे वीडियो तैरते रहते हैं जिनमें वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपनी योजनाओं और घोषणाओं पर सौ फीसदी अमल की बात कहते दिखते हैं। ऐसे में यह बात कुछ हैरान भी करती है कि एक लाख किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ वृक्षारोपण क्यों शुरू भी नहीं हो पाया, और यह बात तो जाहिर है ही कि ऐसा नहीं हो पाया इसलिए पर्यावरण को सम्हालने पर भी कोई काम नहीं हो पाया। पिछले लोकसभा चुनाव के समय लोग इस बात को उठा भी रहे थे कि भाजपा या एनडीए के पिछले पांच बरसों के वायदों पर भी कुछ सवाल-जवाब हो जाएं कि उनका क्या हुआ है, लेकिन ये बातें हिन्दुस्तानी बॉम्बर विमानों की गडग़ड़ाहट में दबकर रह गई थीं, यह तो भला हो अंग्रेजी अखबार द हिन्दू की इस पुरानी कतरन का जिसने ठीक पांच बरस पहले आज ही के दिन गडकरी की कही इन बातों को याद दिला दिया। गडकरी की इतनी शानदार घोषणा के साथ बस यही एक दिक्कत है कि वह पांच बरस पहले की है। 
-सुनील कुमार

 

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