संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय 2 जुलाई : सुनामी-सफलता के बाद चुप रहना मुमकिन तो है, लेकिन...
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय 2 जुलाई : सुनामी-सफलता के बाद चुप रहना मुमकिन तो है, लेकिन...
Date : 02-Jul-2019

दिल्ली से भाजपा संसदीय दल की एक बैठक के बाद उसमें शामिल हुए एक सांसद राजीव प्रसाद रूड़ी ने मीडिया से कहा कि कैलाश विजयवर्गीय के बेटे विधायक आकाश विजयवर्गीय के मामले में प्रधानमंत्री नाराज हैं, और उन्होंने कहा है कि ऐसा व्यवहार मंजूर नहीं किया जा सकता चाहे वह किसी का बेटा हो, या सांसद हो। रूड़ी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने नाम लिए बिना कहा कि अहंकार नहीं होना चाहिए, ठीक से व्यवहार करना चाहिए, और ऐसे लोग पार्टी में नहीं होने चाहिए। अलग-अलग मीडिया पर प्रधानमंत्री की कही गई बताते हुए कुछ बातें सामने आई हैं, लेकिन भाजपा के किसी अधिकृत प्रवक्ता ने इस बारे में कुछ कहा नहीं है। जो भी हो, इस घटना को हुए इतने दिन हो चुके हैं, और अफसरों की पिटाई के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया के साथ जो बदसलूकी की उसको भी कई दिन हो चुके हैं, और जेल से रिहाई के बाद इस विधायक बेटे ने फिर से जो अहंकार दिखाया है, उसके समर्थकों ने खुशी में जो गोलीबारी की है, उसे भी कुछ दिन हो गए हैं, ऐसे में अगर कार्रवाई नहीं होती है, तो प्रधानमंत्री के नाम से कही जा रही ऐसी बातों का कोई खास मतलब नहीं है।
 
इस बीच उत्तरप्रदेश से भाजपा की एक महिला पदाधिकारी का एक बयान फेसबुक पर हंगामा कर गया जिसमें उसने हिन्दू मर्दों का आव्हान किया था कि वे टोली बनाकर मुस्लिम घरों में घुसें, और उनकी मां-बहन से बलात्कार करें, और उन्हें काटकर  सार्वजनिक जगह पर टांग दें। इस पोस्ट पर जब बड़ा बवाल हुआ, तो भाजपा की महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस बारे में लिखा कि इस महिला को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। लेकिन महिला अध्यक्ष के ट्वीट से परे नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, या कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी.नड्डा के कोई बयान इस बारे में नहीं आए हैं। यह मामला न सिर्फ एक भयानक साम्प्रदायिक हिंसा को भड़काने का है, बल्कि भारतीय कानून के तहत लंबी कैद वाला जुर्म भी है। इस पर भी अगर पार्टी कुछ नहीं कहती है, तो इससे बाकी उन तमाम लोगों का हौसला बढ़ता है जो कि ऐसी ही हिंसक बातें रात-दिन लिखते हैं, रेप के फतवे जारी करते हैं, असहमत लोगों की बच्चियों से रेप की धमकी पोस्ट करते हैं, और अपने पेज पर फख्र से यह दावा भी करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हें फॉलो करते हैं। 

इस बात में अब कुछ नया नहीं रह गया है क्योंकि यह बात देश भर में जगह-जगह हर दिन सैकड़ों बार की जा रही है, और देश की हवा में जहर घोला जा रहा है। दरअसल पहाड़ सी बड़ी चुनावी जीत किसी भी पार्टी को ऐसा मगरूर कर सकती है कि उसे अपने मुजरिमों पर कोई भी कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है क्योंकि जनता ने उसे इतना बड़ा समर्थन ऐसे लोगों के बावजूद दिया है। यह बात तकनीकी रूप से, और आंकड़ों के मुताबिक सही हो सकती है, लेकिन भाजपा हो, या मवालियों वाली कोई दूसरी पार्टी, उसे यह भी सोचना चाहिए कि जिस दिन उनकी पार्टी की चुनाव में किसी से कांटे की टक्कर होगी, उस दिन क्या बल्ला खाए हुए लोग, रेप की धमकियां झेल रहे लोग, ऐसे लोगों का वोट क्या कोई फर्क नहीं करेगा? जब समंदर से सुनामी-लहरें उठती हैं, तो वे सारी असहमति और सारे विरोध को बहा ले जाती हैं। लेकिन जिस दिन चेन्नई जैसे शहर में एक घड़े पानी के लिए कई किलोमीटर लंबी कतार आधे-आधे दिन खड़ी रहती है, उस दिन एक-एक बूंद पानी का महत्व समझ आता है। भाजपा को, या हम फिर कहेंगे, कि मवालियों वाली किसी भी पार्टी को ऐसे दिन का सोचकर भी रहना चाहिए जिस दिन उन्हें एक-एक वोट के लाले पड़ सकते हैं। हिन्दुस्तान सहित दुनिया के तमाम लोकतंत्रों में ऐतिहासिक बहुमत से आई हुई पार्टियों को सुनामी की लौटती लहरों के साथ समंदर में जाकर डूबते भी देखा है, और वैसे दिन ऐसे बल्लों की मदद से डूबने से बचना मुमकिन नहीं होता। जब बड़े नेता अपनी पार्टी को दूसरे नेताओं के कुकर्मों की चर्चा भर करके छोड़ देते हैं, तो वह जुबानी खानापूरी मानी जाती है, कोई कार्रवाई नहीं मानी जाती है। भाजपा लोकसभा चुनाव में जिस दर्जे की विजेता रही है, उसके चलते वह ऐसा कर तो सकती है, लेकिन लोकतंत्र में तमाम फतवे, तमाम बल्लागर्दी, तमाम गौगुंडई अच्छी तरह दर्ज भी होते रहते हैं। 
-सुनील कुमार

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