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पीर पंजाल रेल सुरंग
पीर पंजाल रेल सुरंग
Date : 11-Jul-2019

पीर पंजाल रेल सुरंग, कश्मीर घाटी को जम्मू क्षेत्र से जोडऩे वाला एक रेल मार्ग है।  भारतीय रेलवे ने हाल ही में इसका निर्माण पूरा किया है।   जम्मू-क्षेत्र और कश्मीर घाटी को जोडऩे वाली यह पहली रेललाइन है और इसके लिए पीर पंजाल पहाडिय़ों के नीचे से होकर रेल संपर्क बनाया गया है, जो हर मौसम में खुला रहेगा है।
इस रेल लाइन के चालू हो जाने से दोनों क्षेत्रों के बीच सडक़ संपर्क 35 किलोमीटर की दूरी घटकर 17.7 किलोमीटर रह गई है।  कश्मीर घाटी रेलवे कुल 119 किलोमीटर लंबी आधुनिक रेल लाइन है, जो अक्तूबर 2009 में चलने लायक बन गई थी। घाटी के दूसरे सिरे पर काजीगुंड है, जो पश्चिमी कश्मीर स्थित बारामूला को काजीगुंड से जोड़ता है। इस रेल लाइन को पीर पंजाल पहाडिय़ों से होकर बढ़ा देने से जम्मू क्षेत्र काजीगुंड बनिहाल से जुड़ गया है। 28 दिसंबर 2012 को इस रेल खंड पर पहली बार परीक्षण के तौर पर रेल चलाई गई। इस खंड की लंबाई 17.7 किलोमीटर है। यह रेल खंड 11.2 किलोमीटर लंबा है, जिसके नीचे पीर पंजाल पहाडिय़ों से होकर टी-80 सुरंग बनाई गई है, जिससे कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र के बीच सीधा रेल संपर्क कायम हो गया है। इस रेल खंड को बनाने के लिए लगभग 11.78, 500 घन मीटर मिट्टी काटनी और हटानी पड़ी। खंड पर सुरंग की अधिकतम गहराई 15.20 मीटर है, जबकि तटबंध 16.70 मीटर के हैं। इस खंड पर 39 पुल बनाये गये हैं, जिनमें से दो बड़े पुल हैं, 30 मामूली पुल हैं, 7 रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज हैं।
 इस रेल खंड का निर्माण कार्य पूरा करने पर 1691.00 करोड़ रुपए खर्च आया है। हर 62 मीटर की दूरी पर लायनीयर फायर दिशा में सी सी टीवी कैमरे लगाये गये हैं, जो अति आधुनिक किस्म के हैं। रेल खंड पर हर एक सौ 25 मीटर की दूरी पर आग बुझाने की व्यवस्था है और इसके लिए फायर हाइड्रेंट लगाये गये हैं। हर ढाई सौ मीटर की दूरी पर इमरजेंसी टेलीफोन केंद्र बनाये गये हैं, जो संचार सक्षम हैं। इसके अलावा हर 250 मीटर की दूरी पर आग बुझाने के यंत्र और आग की चेतावनी देने के यंत्र लगे हैं। हर 5 सौ मीटर की दूरी पर हवा की क्वालिटी की जांच करने की व्यवस्था है। हर पचास मीटर की दूरी पर सुरक्षित निकल जाने के लिए रास्ता बताने के संकेत दिए गये हैं। इनमें इमरजेंसी लाइटिंग और सामान्य लाइटिंग व्यवस्था है। पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी लगाया गया है। खराब हवा निकालने के लिए सुरंग में 25 पंखे लगाये गये हैं।  
यह रेल खंड जम्मू-कश्मीर राज्य के पहाड़ी इलाके में पड़ता है। यहां से होकर गुजरना परिवहन प्रदान करने वालों के लिए हमेशा चुनौती रहा है। अन्य जो कारक इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर परिवहन में मुश्किलें पैदा करते हैं, वे हैं भौगोलिक अस्थिरता, भूकंप का खतरा और दो पहाडिय़ों के बीच गहरी खाई। यह सभी किसी भी निर्माण प्रक्रिया को बहुत मुश्किल बना देती हैं। क्षेत्र में लंबे समय तक रुक-रुक कर बारिश और बर्फबारी होती रहती  है, जिससे जन-जीवन कठिन हो जाता है।  
 इस रेल खंड के चालू हो जाने से जम्मू क्षेत्र को कश्मीर घाटी से जोडऩे का एक सौ 14 वर्ष पुराना सपना पूरा हो गया है। सबसे पहले 1898 में महाराजा प्रताप सिंह ने जम्मू को कश्मीर घाटी से रेल लाइन के जरिए जोडऩे के बारे में छानबीन कराई थी।
 

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