विशेष रिपोर्ट

स्काईवॉक, यह महंगा-खरीदा, आधा-पढ़ा उपन्यास पूरा पढऩा बड़े घाटे का सौदा होगा
स्काईवॉक, यह महंगा-खरीदा, आधा-पढ़ा उपन्यास पूरा पढऩा बड़े घाटे का सौदा होगा
Date : 27-Jul-2019

स्काईवॉक, यह महंगा-खरीदा, आधा-पढ़ा उपन्यास पूरा पढऩा बड़े घाटे का सौदा होगा

सुनील कुमार
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नई प्रदेश सरकार आने के बाद से लगातार यह सवाल खड़ा है कि भाजपा सरकार ने शहर के बीच लोहे का एक ढांचा बनाकर सडक़ के ऊपर हवाई पैदलपथ बनाना शुरू किया था, उसका अब क्या होगा? कांग्रेस ने पिछले बरसों में विपक्ष में रहते हुए इस स्काईवॉक का जमकर विरोध किया था, उस पर भाजपा सरकार ने करीब 50 करोड़ खर्च किए थे, और अभी करीब 25 करोड़ की लागत बाकी है। उसका काम पिछली सरकार के रहते हुए ही निर्माण कंपनी के दीवालिया हो जाने की वजह से रूक गया था, और नई सरकार ने उस पर विचार जारी रखा है कि उसे पूरा किया जाए या उसे हटा दिया जाए। 

एक सरकार के रूप में भूपेश-सरकार के लिए यह फैसला आसान इसलिए नहीं है कि इसे हटाकर 50 करोड़ का नुकसान करने की बदनामी हाथ लगेगी, और इसे पूरा करेंगे तो और अधिक बर्बादी होगी, और यह बात भी सामने आएगी कि कांग्रेस का विरोध बोगस था। इसलिए सरकार जाहिर तौर पर सभी तबकों से, जानकारों और विशेषज्ञों से बात कर रही है। हमने भी इस अखबार में कुछ बार इस बारे में लिखा था, लेकिन कोई ठोस राय नहीं दी थी क्योंकि विशेषज्ञों को इस पर सोचना चाहिए। 

अब जब कई तबकों की राय सामने आ चुकी है, और राज्य सरकार के सामने एक कंपनी ने शहर के बीच से गुजरने वाली जी.ई. रोड पर दुर्ग से नया रायपुर तक एक हल्की ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रखा है, तो तस्वीर कुछ साफ हो रही है। इस जी.ई. रोड पर इस स्काईवॉक का हिस्सा एक किलोमीटर लंबा ही है, लेकिन इसकी वजह से इस सडक़ पर ऊपर कोई फ्लाईओवर बनना नामुमकिन हो जाता है, या ऐसी कोई ट्रेन चलने की गुंजाइश खत्म हो जाती है। इन दो किस्म की संभावनाओं को देखें तो यह बात साफ होती है कि स्काईवॉक से इस शहर को हासिल तो शायद बहुत कम होगा, लेकिन आगे की इन दो संभावनाओं के विकल्प पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। इस शहर में पिछले बरसों में दो बड़ी सडक़ें शहर के बीच बनाई गई हैं जिनसे तमाम शहर पर ट्रैफिक का बोझ कुछ कम हुआ है। लेकिन ट्रैफिक है कि इस रफ्तार से बढ़ते चल रहा है कि सडक़ों के बढऩे की रफ्तार उसका मुकाबला नहीं कर पा रही है। फिर यह भी है कि भिलाई की तरफ कुम्हारी से लेकर नया रायपुर तक जी.ई. रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होने का कोई जरिया बना नहीं है, कैनाल रोड, और एक्सप्रेस हाईवे इस सडक़ का विकल्प नहीं हैं, वे दूसरे इलाकों को जोड़ते हैं। 

ऐसे में यह बात अब साफ है कि स्काईवॉक को भूल जाना बेहतर है, और जी.ई. रोड पर भिलाई से लेकर मंदिर हसौद के पहले तक या तो एक फ्लाईओवर बनाना होगा, या फिर एक ट्रेन शुरू करनी होगी ताकि लोगों को सार्वजनिक यातायात मिले, तेज सडक़ मिले, और शहर के बीच सडक़ों पर से दबाव कम हो। स्काईवॉक के बारे में विशेषज्ञों से परे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की यह बात भी ध्यान देने लायक है कि इस शहर में 40-45 डिग्री तक जाने वाली गर्मी में इस फौलादी ढांचे के भीतर से लोग किस तरह आ-जा सकेंगे? 

भविष्य की संभावनाओं को खत्म करने का हक किसी पीढ़ी को नहीं रहता। शहर के एक छोटे से हिस्से में पैदल चलने वाले लोगों की सहूलियत के हिसाब से बनाए जा रहे स्काईवॉक से अगर हमेशा के लिए आर-पार पुल-ट्रेन की संभावना खत्म होती है तो ऐसी योजना काम की नहीं है। जिस कंपनी ने अभी छत्तीसगढ़ सरकार के सामने एक प्रस्तुतिकरण दिया है, और बिना सरकारी लागत के इसे बनाने का, और 30 बरस तक खुद टिकट लेकर उसके बाद सरकार को दे देने का जो प्रस्ताव रखा है, उससे यह बात जाहिर है कि इस सडक़ के ऊपर ट्रेन चलाना मुमकिन है, और उसका अध्ययन करके ही यह प्रस्ताव रखा गया है। 

जिस तरह किसी खरीदे गए उपन्यास को आधा पढऩे के बाद जब समझ पड़ता है कि उपन्यास बेकार है, तो दाम चुका देने की वजह से बाकी का आधा फालतू उपन्यास पढऩा समझदारी नहीं होती, उसी तरह रायपुर के इस स्काईवॉक को पूरा करना अब समझदारी नहीं दिख रही क्योंकि इसके बनने से भविष्य की संभावनाएं खत्म हो रही हैं जो कि इस शहर के लिए अधिक जरूरी हैं। राज्य सरकार को इसे हटाकर एक ट्रेन की योजना पर काम करना चाहिए जिससे शहर में गाडिय़ों की भीड़ से दम घुटना और न बढ़े। 

 

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