संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 28 जुलाई : इस बदनामी से सरकार  समय रहते सम्हल जाए
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 28 जुलाई : इस बदनामी से सरकार समय रहते सम्हल जाए
Date : 28-Jul-2019

छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य विभाग की सेहत कुछ ठीक नहीं चल रही है। पिछली रमन सरकार के वक्त इस विभाग के जितने घोटाले सामने आए, उससे अधिक अभी तक दबे हुए हैं। लेकिन उन घोटालों की जांच की सुर्खियों के बीच भूपेश बघेल सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में जो चल रहा है, उसमें फिर नया घोटाला होते दिख रहा है। वैसे तो स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव बड़े जानकार और तजुर्बेकार माने जाते हैं, और उनकी साख भी ठीक बताई जाती है, लेकिन विभाग में एक अदना से अफसर को लेकर जो खींचतान चल रही है, वह हक्का-बक्का करने वाली है। 

खुद कांग्रेस पार्टी के एक बड़े कार्यकर्ता और कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ के नेता डॉ. राकेश गुप्ता रमन सरकार के वक्त से पिछले बरसों में स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार को लेकर सड़क से लेकर मीडिया तक लड़ाई लड़ रहे थे। कांग्रेस पार्टी ने भी अपने मंच से उस लड़ाई को आगे बढ़ाया था। उस वक्त स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर काम कर रहे एक अफसर पर सैकड़ों करोड़ के स्वास्थ्य बीमा में भयानक भ्रष्टाचार का आरोप डॉक्टरों के संघ ने भी लगाया था, नर्सिंग होम एसोसिएशन ने भी लगाया था, और अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस संविदा-अफसर के भ्रष्टाचार की बात उठाई थी। अभी कुछ सामाजिक कार्यकर्ता इस अफसर को दुबारा संविदा पर रखने के खिलाफ हाईकोर्ट तक गए हैं, और स्वास्थ्य विभाग के भीतर मंत्री और आईएएस अफसरों के बीच इस संविदा अफसर को आगे जारी रखने के मुद्दे पर ऐसी भयानक लड़ाई छिड़ी है कि उसे बचाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री विभाग की एक आईएएस अफसर के खिलाफ कई तरह की जांच शुरू करवा चुके हैं। 

अभी तक जो कागजात हमारे सामने आए हैं, उनसे एक बात साफ है कि इस संविदा अफसर की रमन सरकार में नियुक्ति ही गलत हुई थी, और वर्तमान सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव एक प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर उस विवादास्पद अफसर को जारी रखने के लिए किसी भी हद तक जाते हुए दिख रहे हैं। यह बात हैरान करने वाली है क्योंकि टी.एस. सिंहदेव को भ्रष्टाचार के आरोपों वाले लोगों को इतना खुलकर आगे बढ़ाते लोगों ने देखा नहीं था, और उनसे उम्मीद भी नहीं थी। अभी इस सरकार को आए एक बरस भी पूरा नहीं हुआ है, और सबसे अधिक आरोपों से घिरे एक संविदा-अफसर को लेकर यह सरकार हाईकोर्ट के कटघरे में खड़ी कर दी गई है। हाईकोर्ट ने पहली नजर में इस अफसर के खिलाफ आरोपों में कुछ दम देखते हुए उसके काम सम्हालने पर रोक लगाई है, हालांकि सरकार इससे भी सम्हलते दिख नहीं रही है। 

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ बनने से अब तक प्रदेश सरकार का सबसे भ्रष्ट विभाग रहा है। खुद कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख कार्यकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता लगातार जिस भ्रष्टाचार का भांडाफोड़ करते रहे हैं, उसी भ्रष्टाचार को इतना खुलकर आगे बढ़ाना राज्य सरकार की साख को चौपट कर रहा है। इस मामले के कागज यह भी बताते हैं कि किस तरह एक परिपक्व और वरिष्ठ मंत्री खुद एक विवाद में फंसते जा रहा है, और यह शायद इस सरकार को बड़ी बदनामी दिलाने वाला पहला स्कैंडल है जिसमें रमन सरकार के एक सबसे भ्रष्ट माने जाने वाले अफसर को भूपेश सरकार में इज्जत का मुद्दा बना लिया गया है। इस सरकार से जिन लोगों को बेहतर काम की उम्मीद थी, वे लोग कम से कम इस एक मामले को लेकर सरकार के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। बेहतर यही होगा कि यह सरकार समय रहते सम्हल जाए। 
-सुनील कुमार

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